हरभजन सिंह से जुड़े 15 तथ्य: वो सरदार जो कभी हार नहीं मानता

15 facts to know about Harbhajan Singh

हरभजन सिंह – द टर्बनेटर – पिछले दशक से भारत के लिए एक सुखद घटना के रूप में प्रकट हुए हैं और उन्होंने भारत के लिए कई लाजवाब मैच-जिताऊ प्रदर्शन भी किये हैं | भारत की ओर से खेलने वाले खिलाड़ियों में हरभजन सिंह सबसे बेहतरीन ऑफ-स्पिनरों में से रहे हैं | यहाँ तक कि, ‘भज्जी’ क्रिकेट के सबसे दमदार खिलाड़ियों में से हैं जो कि कभी हर नहीं मानते और कभी उम्मीद नहीं छोड़ते | बहुत से मौकों पर उन्होंने भारत के स्पिन आक्रमण का नेतृत्व किया हैं और टीम को कई उच्च मुकामों तक पहुंचाया हैं |

1. जन्म:

हरभजन सिंह का जन्म 3 जुलाई 1980 को जालंधर पंजाब के एक सिख परिवार में हुआ था और वे पांच बहनों के इकलौते भाई है |

2. शुरूआती जीवन:

हरभजन पारिवारिक कारोबार सँभालने के लिए कतार में थे, लेकिन उनके पिता ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हरभजन क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित करे और आगे चलकर भारत का नेतृत्व करे |

3. बल्लेबाज़ के तौर पर शुरुआत:

हरभजन को उनके पहले कोच चरणजीत सिंह भुल्लर द्वारा एक बल्लेबाज़ के तौर पर शिक्षित किया गया था, लेकिन उनके कोच के असामयिक निधन के बाद वे दविंदर अरोड़ा से सीखने लगे जिसके बाद उन्होंने स्पिन गेंदबाज़ी की ओर रुख कर लिया | अरोड़ा हरभजन की सफलता का श्रेय उनकी लग्न और मेहनत को देते है, जिसमे सुबह तीन-घंटे का अभ्यास सत्र, और उसके बाद दोपहर का सत्र भी शामिल है जो कि दोपहर के तीन बजे से सूरज ढलने तक चलता था |

4. पारिवारिक आदमी:

2000 में अपने पिता के देहांत के बाद, हरभजन एक पारिवारिक आदमी बन गए, और 2001 के अंत तक उन्होंने अपनी तीन बहनों की शादियां करा दी |

5. पहला शानदार प्रदर्शन:

15 वर्ष और 4 महीने की उम्र में उन्होंने पंजाब-16 में जगह बना ली | हरियाणा के विरुद्ध पहले मैच में उन्होंने 1995-96 के नवंबर सत्र में 184 रन देकर 12 विकेट लिए |

6. टेस्ट पदार्पण:

मार्च 1998 में बेंगलुरु में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध अपना टेस्ट पदार्पण किया, वे दो विकट लेने में कामयाब भी रहे, लेकिन भारत फिर भी मैच हार गया | वे केवल 18 वर्ष के थे और अपना अंतराष्ट्रीय करियर शुरू ही किया था |

7. प्रतिकूल हालात:

उनके करियर का पहला भाग बहुत मुश्किलों भरा था | 1999/2000 का सीजन उनके लिए चुनौतीपूर्ण था | टेस्ट टीम में उनकी जगह पर भी संदेह था | हरभजन के घरेलु आंकड़े भी बड़े साधारण थे और उन्होंने सीजन का अंत 26.23 के औसत के साथ 46 प्रथम-श्रेणी विकेट लेकर किया था | अनुशासन-सम्बन्धी कारणों और भारतीय प्रशासको से झगड़ा मोल लेने के कारण भी उनपर कई मुसीबतें आयी | जल्द ही, मुरली कार्तिक, सुनील जोशी और नए खिलाड़ी सरनदीप सिंह के कारण उन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया गया जब स्पिन विभाग का ज़िम्मा इन तीनों को दिया गया | परिवार के इकलौते बेटे होने के नाते हरभजन पर उनकी माँ और बिन-ब्याही बहनों का ध्यान रखने की ज़िम्मेदारी भी थी | एक समय उन्होंने क्रिकेट छोड़ अमेरिका जाकर ट्रक चलाने तक की सोच ली थी |

8. भारत की ऐतिहासिक जीतों के सितारे:

हरभजन सिंह के लिए सबसे यादगार प्रसंग 2001 में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध घरेलु टेस्ट श्रृंखला में उनका प्रदर्शन था | उन्होंने केवल तीन टेस्ट मैचों में 32 विकेट चटकाए, जिसमे एक भारतीय द्वारा पहली टेस्ट हैट-ट्रिक भी शामिल थी, जहां उनके साथी गेंदबाज़ तीन से अधिक विकेट लेने में असफल रहे |

9. अस्थिर 2008:

2008 में हरभजन को एंड्रू साइमंड्स पर नस्लीय टिपण्णी करने के आरोप में आई.सी.सी. द्वारा प्रतिबन्ध लगा दिया गया था | एक अपील के बाद इस प्रतिबंध को ख़ारिज किया गया था | 2008 के अंतिम भाग में पहले आई.पी.एल. के दौरान एक मैच के बाद श्रीसंथ को थप्पड़ मारने के कारण हरभजन को टूर्नामेंट से बैन कर दिया गया था |

10. भारतीय प्रीमियर लीग:

हरभजन सिंह को आई.पी.एल. के उद्घाटन संस्करण में मुंबई इंडियंस द्वारा यू.एस. डॉलर 850,000 में ख़रीदा गया था | तब से, वे इसी फ्रैंचाइज़ी का हिस्सा रहे हैं और 2011 और 2014 में मिली खिताबी जीत में अहम किरदार निभाया है |

11. दो विश्व कप उनके नाम:

हरभजन सिंह दो बार विश्व-कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रह चुके हैं – आई.सी.सी. ट्वेंटी 20 2007 में, और आई.सी.सी. क्रिकेट विश्व कप 2011 में |

12. पंजाब पुलिस में डी.एस.पी.:

ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध 2001 में उनके प्रदर्शन के बाद, पंजाब पुलिस ने उन्हें पंजाब पुलिस के मानद उप-अधीक्षक बनने का प्रस्ताव दिया |

13. उपलब्धियां:

2003 में उन्हें क्रिकेट के लिए अर्जुन पुरस्कार से नवाज़ा गया | 2009 में उन्हें पद्मा श्री पुरस्कार भी दिया गया |

14. एक दुर्लभ उपलब्धि:

400 टेस्ट विकेट लेने वाले वे केवल तीसरे भारतीय गेंदबाज़ हैं |

15. बल्लेबाज़ी क्षमता:

वे ऐसे पहले आंठवे नंबर के बल्लेबाज़ हैं जिन्होंने लगातार टेस्ट मैचों में शतक लगाए हो | उन्होंने यह कारनामा 2010 में न्यू ज़ीलैंड के विरुद्ध घरेलु टेस्ट सीरीज में किया |

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