भुवनेश्वर कुमार से जुड़े 25 तथ्य – भारत के प्रमुख स्विंग गेंदबाज़

25 facts to know about Bhuvneshwar Kumar

भुवनेश्वर कुमार ने पाकिस्तान के विरुद्ध एक चौंका देने वाला पदार्पण कर इस क्रिकेट जगत पर अपनी छाप छोड़ी | तब से, इस नौजवान ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा | निरंतर अच्छा प्रदर्शन करने के परिणाम स्वरुप वे घरेलु सर्किट में आगे बढ़ते रहे और आखिरकार टीम इंडिया में प्रवेश कर लिया | माना कि पिछले 6 और कुछ महीनों में वे अपनी सबसे बेहतरीन फॉर्म में नहीं रहे हो, लेकिन इस बात को कोई नहीं झुठला सकता कि इस समय वे भारतीय क्रिकेट के सबसे बेहतरीन स्विंग गेंदबाज़ों में से हैं | भुवनेश्वर कुमार से जुड़े कुछ रोचक तथ्य यहां प्रस्तुत हैं |

1. शुरूआती ज़िन्दगी:

भुवनेश्वर कुमार का जन्म उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में किरण पाल सिंह और इंद्रेश की संतान के रूप में हुआ था | उनके पिता उत्तर प्रदेश पुलिस के सब-इंस्पेक्टर हैं |

2. शुरूआती महत्वाकांक्षाएं:

भुवी हमेशा से ही एक सेना के अफसर बनना चाहते थे | भारतीय सेना का हिस्सा बनना उनके बचपन का सपना था | हालाँकि, किस्मत ने उनके लिए अन्य योजनाएं बनायी थी |

3. शर्मीले व्यक्ति:

राहुल द्रविड़ के बाद से वे ही नम्रता का प्रतीक हैं; यह कहना एक अतिशयोक्ति नहीं होगा | भुवनेश्वर स्वभाव से ही मृदु भाषी है और एक शर्मीले व्यक्तित्व है |

4. बहन का समर्थन:

उन्हें क्रिकेट खेलने का शौक था | और वो उनकी बहन रेखा अधाना ही थी, जिन्होंने उन्हें क्रिकेट खेलने के लिए प्रोत्साहित किया | वे उन्हें एक पेशेवर कोचिंग शिविर में ले गयी जब भुवी केवल 13 वर्ष के थे |

5. उपनाम:

भुवनेश्वर कुमार को भारतीय टीम में प्यार से भुवी बुलाया जाता है |

6. खेलने की शैली:

कुमार एक दाएं-हाथ के मध्यम तेज़ गेंदबाज़ है जो कि गेंद को दोनों तरफ सही तरीके से घुमा सकते हैं और पिछले कुछ समय से उन्होंने अपनी डेथ गेंदबाज़ी की प्रतिभा में भी बढ़ोतरी की है | वे एक उपयोगी निचले क्रम के बल्लेबाज़ भी हैं |

7. प्रथम-श्रेणी पदार्पण:

अपनी उम्र समूह के क्रिकेट में निरंतर अच्छा प्रदर्शन करने के कारण उन्हें उत्तर प्रदेश की प्रथम-श्रेणी घरेलु टीम में 2007 में प्रवेश मिला | 17 वर्ष की आयु में उन्होंने रणजी ट्रॉफी में बंगाल के विरुद्ध अपना पहला प्रथम-श्रेणी मैच खेला | उन्होंने पहली पारी में 25 रन देकर तीन विकेट लिए और दूसरी पारी में विकेटहीन रहे |

8. सचिन तेंदुलकर का विकेट:

अंतर्राष्ट्रीय सर्किट पर बड़े सितारों को मुश्किल में डालने से पहले भी, उन्होंने सचिन तेंदुलकर को शून्य पर आउट किया | 19 साल के भुवी ने यह कारनामा 2008-09 के रणजी ट्रॉफी फाइनल में किया | यह पहला मौका था जब सचिन तेंदुलकर प्रथम-श्रेणी क्रिकेट में शून्य पर आउट हुए हो |

9. प्रथम-श्रेणी शतक:

2012 की दिलीप ट्रॉफी के दूसरे सेमी-फाइनल के दौरान, भुवनेश्वर ने बल्ले से अपना हुनर दिखाया | नॉर्थ जोन के विरुद्ध, सेंट्रल जोन की ओर से खेलते हुए, वे आठवे नंबर पर बल्लेबाज़ी करने आये और 253 गेंदों पर 128 रन बना अपनी टीम को पहली पारी में बढ़त दिला दी | यह अभी तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनका इकलौता शतक है |

10. अंतर्राष्ट्रीय पदार्पण:

कुमार ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहली छाप पाकिस्तान के विरुद्ध दिसंबर 2012 के एक ट्वेंटी-20 मैच में छोड़ी | अपने पहले ओवर की आखिरी गेंद पर उन्होंने नासिर जमशेद को आउट किया | अगले ही ओवर में उन्होंने उमर अकमल को चलता किया और फिर मोहम्मद हफ़ीज़ का विकेट भी लेकर, पाकिस्तान को 3 ओवरों में 12/3 के स्कोर पर ले आये | अपने चार ओवरों की समाप्ति उन्होंने 3/9 के आंकड़ों के साथ की |

11. एकदिवसीय पदार्पण से टीम में जगह पक्की की:

इसी दौरे के दौरान, उन्होंने अपना एकदिवसीय पदार्पण भी किया | उनके एकदिवसीय करियर को और भी बेहतर शुरुआत मिली जब उन्होंने मोहम्मद हफ़ीज़ को अपने पहले ओवर की पहली गेंद पर ही चलता किया | उन्होंने मैच की समाप्ति 9 ओवरों में 2/27 के आंकड़ों के साथ की, वो मैच जो भारत 6 विकेट से हार गया | एक प्रभावशाली इकोनॉमी और बढ़िया स्विंग गेंदबाज़ी का प्रदर्शन करते हुए, उन्होंने टीम इंडिया में अपनी जगह पक्की कर ली |

12. टेस्ट पदार्पण: एमएस धोनी के साथ साझेदारी:

शीघ्र ही उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध 2013 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में चेन्नई में खेले गए मैच से अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की | हालाँकि वे पहली पारी में विकेटहीन रहे, बल्ले से उन्होंने बढ़िया काम किया | एमएस धोनी के साथ मिलकर उन्होंने 9वें विकेट के लिए 140 रनों की साझेदारी कर भारत के स्कोर को 572 तक पहुंचाया | उन्होंने 38 रन बनाए, जो कि किसी भी 10वें नंबर के भारतीय बल्लेबाज़ के लिए पहले मैच में सर्वाधिक स्कोर है | उनका पहला विकेट उनके दूसरे टेस्ट की दूसरी पारी में आया |

13. चैंपियंस ट्रॉफी 2013:

भारत ने 2013 की चैंपियंस ट्रॉफी जीती और इस जीत में भुवनेश्वर कुमार ने एक अहम किरदार निभाया और कई मौकों पर भारत को शुरूआती झटके दिलाये | टूर्नामेंट के बाद,उन्हें टूर्नामनेट की टीम में भी चुना गया था |

14. सर्वश्रेष्ठ एकदिवसीय आंकड़े:

उनके सर्वश्रेष्ठ एकदिवसीय आंकड़े श्रीलंका के विरुद्ध त्रिकोणीय श्रृंखला में आये जिसमे वेस्ट इंडीज भी शामिल थी | फाइनल्स से पहले के मैच में, उन्होंने एक वर्षा-बाधित मैच में 6 ओवरों में 8 रन देकर 4 विकेट लिए | उनके इस स्पेल के कारण श्रीलंका 96 रनों पर सिमट गया |

15. नाटकीय ब्रिटिश दौरा:

भारत को 2013 के इंग्लैंड दौरे पर 1-3 की दर्दनाक हार नसीब हुई | हालाँकि, भुवनेश्वर कुमार ने पूरे दौरे के दौरान काफी प्रभावशाली प्रदर्शन किया | उन्हें इस हरफनमौला प्रदर्शन के कारण भारतीय प्लेयर ऑफ़ द सीरीज चुना गया | न सिर्फ उन्होंने नाटिंघम में 5/82 और लॉर्ड्स में 6/82 की आंकड़े रखे, उन्होंने 9 नंबर पर रन भी बनाए, जिसमे तीन अर्धशतक शामिल थे |

16. लॉर्ड्स का ऑनर बोर्ड:

2014 में इंग्लैंड के विरुद्ध लॉर्ड्स में दूसरे टेस्ट मैच के दौरान भुवनेश्वर के 6/82 ने उन्हें लॉर्ड्स के ऑनर बोर्ड पर जगह दिलाई | भारत वह मैच 95 रनों से जीता |

17. तीन अर्धशतक:

2014 के ब्रिटिश दौरे के पहले टेस्ट में उन्होंने 58 और नाबाद 63 रनों की पारियां खेली और फिर दूसरे टेस्ट की दूसरी पारी में भी 52 रन बनाये, और इस तरह ऐसे पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए जिसने नंबर 9 पर बल्लेबाज़ी करते हुए एक श्रृंखला में तीन अर्धशतक बनाये हो | उन्होंने इस चार मैचों की श्रृंखला की समाप्ति तक 247 रन बनाये |

18. गेमर:

भुवनेश्वर कुमार गेमिंग के एक बहुत ही उत्साही प्रशंसक है | उन्हें अपने खाली समय में गेम्स खेलना बहुत पसंद है और प्लेस्टेशन उनका पसंदीदा शौक है |

19. उनके बन्नी – गेल:

क्रिस गेल ने विश्व भर के गेंदबाज़ों को परेशान किया हुआ है, लेकिन भुवनेश्वर ने इस बड़े जमैकन को अपने जाल में फंसाएं रखा है | अपने करियर में अब तक उन्होंने गेल को 4 बार आउट किया है |

20. अकेला लड़ाका:

यहाँ तक कि आईपीएल के दौरान भी, जब गेल पुणे वारियर्स को मैदान के चारों ओर धोते हुए 175 रन जमा रहे थे, तब भी भुवनेश्वर ने उन्हें कुछ हद तक काबू में रखा था | ऐसा मैच जिसमे सभी गेंदबाज़ों की धुलाई हुई हो, उसमे भुवी अपनी इकोनॉमी 6 से कम रखने में कामयाब रहे थे ! रॉयल चैलेंजर्स ने जब 263 रनों का भीमकाय स्कोर खड़ा किया, तब भुवी ने 4 ओवरों में केवल 23 रन खर्चे | इसका मतलब है कि बाकी के गेंदबाज़ों ने 16 ओवरों में 240 रन लुटाए !

21. सभी प्रारूपों में विकेटों को धराशायी किया:

उनके पास यह अद्वितीय कारनामा दर्ज है जब उन्होंने खेल के तीनों प्रारूपों में अपना पहला विकेट बोल्ड ही हासिल किया | उन्होंने टी20 में नासिर जमशेद, एकदिवसीय में मोहम्मद हफ़ीज़ और टेस्ट मैचों में डेविड वार्नर को बोल्ड आउट किया | ऐसा करने वाले वे पहले गेंदबाज़ बन गए |

22. पहले ओवरों में धूम मचाई:

भुवनेश्वर ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक उत्तेजक पदार्पण किया | उन्होंने अपना पहला टी20 विकेट अपने पहले ही ओवर में नासिर जमशेद को आउट कर, हासिल किया | यह कारनामा उन्होंने अपने पहले एकदिवसीय में भी दोहराया और मोहम्मद हफ़ीज़ को अपने पहले ओवर की पहली गेंद पर चलता किया|

23. आईपीएल करियर:

2008/09 के रणजी सीजन में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद उन्हें रॉयल चैलेंजर्स द्वारा ख़रीदा गया | 2011 में वे पुणे वारियर्स इंडिया का हिस्सा बने | पुणे वारियर्स के विघटन के बाद, 2014 में उन्हें सनराइज़र्स हैदराबाद ने ख़रीदा |

भुवनेश्वर कुमार – भारत – रिकॉर्ड

24. मुख्य टीमें:

विभिन्न टीमें जिनका प्रतिनिधित्व उन्होंने अब तक किया है, वे है – इंडिया, इंडिया ए. पुणे वारियर्स, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर, सनराइज़र्स हैदराबाद और उत्तर प्रदेश |

25. सम्मान और पुरस्कार:

भुवी को 2013 की चैंपियंस ट्रॉफी की टॉम ऑफ़ द टूर्नामेंट में शामिल किया गया था | 2014 में उन्होंने एलजी पीपल्स चॉइस अवार्ड भी जीता |

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