क्रिकेट के इतिहास में किये गए 5 सबसे निःस्वार्थ कार्य

5 most unselfish acts in the history of cricket

क्रिकेट में निस्वार्थता के कई वाकये हैं और यहाँ हम क्रिकेट के इतिहास के शीर्ष पांच निःस्वार्थ क्षणों को देखेंगे

किसी टीम के किसी खेल में सफल होने के लिए सबसे जरुरी उस टीम में एकता का होना है। यह सभी टीमों के खेल पर लागू होता है और क्रिकेट एक अपवाद नहीं है। एक टीम 11 खिलाड़ियों से बनी हुई है और वह तभी कमजोर हो जाएगी, जब टीम से पहले कोई खुद को आगे रखने की कोशिश करेगा।

आखिरकार खिलाड़ी भी इंसान ही होते हैं और खिलाड़ियों के कई ऐसे उदाहरण हैं, जब वे स्वार्थी हो जाते हैं, खासकर फुटबॉल और क्रिकेट में, क्योंकि वे टीम की जीत के बजाय व्यक्तिगत रिकॉर्ड के लिए खेलने लगते हैं।

इतिहास में कई ऐसे स्वार्थपूर्ण कृत्य हैं, जब डेविड वार्नर टीम में अपनी जगह मजबूत करने के लिए धीरे खेलने लगे थे, या जब सचिन तेंदुलकर ने भारत की ओर से अपने 100 वें अंतरराष्ट्रीय शतक के लिए टीम की जीत को दाँव पर लगा दिया था।

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कई ऐसे वाकये भी थे, जब खिलाड़ी ने टीम और उनके साथियों को खुद से आगे रखा और अपने साथियों को इतिहास बनाने का मौका दिया। क्रिकेट में निस्वार्थता के भी कई कार्य हैं और यहाँ हम क्रिकेट के इतिहास के शीर्ष पांच निस्वार्थ क्षणों को देखेंगे।



जब गौतम गंभीर ने विराट कोहली को अपना मैन ऑफ द मैच पुरस्कार दे दिया

रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच होने वाले आईपीएल मैचों के दौरान गौतम गंभीर और भारतीय कप्तान विराट कोहली को उनकी तीखी झड़पों की वजह से सोशल मीडिया पर दुश्मनों के रूप में चित्रित किया जाता रहा है। लेकिन, सच्चाई यह है कि ये दोनों खिलाड़ी वास्तविक जीवन में अच्छे संबंध साझा करते हैं।

उनके अच्छे रिश्तों को दर्शाने वाले क्षणों में से एक तब देखने को मिला जब गंभीर ने 2009 में ईडन गार्डन में श्रीलंका के खिलाफ एक वनडे मैच के बाद विराट कोहली को अपनी मैन ऑफ द मैच ट्राफी सौंप दी।

जीतने के लिए 315 रन चाहिए थे और उस स्थल पर कभी भी इतने रनों का पीछा नहीं किया जा सका था। गंभीर और कोहली ने तीसरे विकेट के लिए 224 रनों की शानदार साझेदारी की और टीम आसानी से जीत भी गई। गंभीर 150 रन पर नाबाद रहे जबकि विराट कोहली 107 रन पर आउट हुए थे।

गंभीर को मैन ऑफ़ द मैच के तौर पर चुना गया लेकिन तत्कालीन भारतीय कप्तान ने प्रस्तुतकर्ता रवि शास्त्री से कोहली को अपना पुरस्कार दे देने का अनुरोध किया, जिनका इस जीत में महत्वपूर्ण योगदान रहा था।

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जब रिचर्ड हैडली ने पारी में 10 विकेट लेने का अवसर कुर्बान किया

जब रिचर्ड हैडली ने पारी में 10 विकेट लेने का अवसर कुर्बान किया
जब रिचर्ड हैडली ने पारी में 10 विकेट लेने का अवसर कुर्बान किया

1965 में इंग्लैंड के स्पिनर जिम लेकर, मैनचेस्टर टेस्ट की दूसरी पारी में दस ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को आउट करके एक टेस्ट पारी में दस विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बने। 34 साल बाद, भारतीय टीम के अनिल कुंबले ऐसा करने वाले दूसरे गेंदबाज बन गये, जब उन्होंने 1999 में दिल्ली टेस्ट में पाकिस्तान के खिलाफ दस विकेट लिए थे।

जब कुंबले ने इस उपलब्धि को हासिल किया था, उससे 14 साल पहले न्यूजीलैंड के रिचर्ड हैडली भी लगभग इस सूची में शामिल होने ही वाले थे, क्योंकि उन्होंने 1985 में ब्रिस्बेन टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 9/52 के आंकड़े के साथ मैच समाप्त किया। पहले आठ विकेट लेने के बाद उनकी नज़रें सभी दस विकेट लेने पर थीं।



लेकिन, उन्होंने अपनी टीम को अपने व्यक्तिगत मील का पत्थर हासिल करने से आगे रखा क्योंकि उन्होंने अपने टीम के साथी वॉन ब्राउन को 9वाँ विकेट लेने में मदद की और खुद आखिरी विकेट लिया।

ज्योफ लॉसन ने ब्रॉन्स की गेंद को हवा में उछाल दिया और हडली को उसे पकड़ने के लिए लंबी दूरी तय करनी थी, जिससे उन्हें अपने संभावित कीर्तिमान के बारे में सोचने का पर्याप्त समय भी मिल गया था। लेकिन, उन्होंने निर्विवाद रूप से कैच ले लिया और फिर आखिरी विकेट लेकर ऑस्ट्रेलियाई पारी को समाप्त कर दिया।

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जब जवागल श्रीनाथ ने अनिल कुंबले को एक पारी में 10 विकेट लेने दिए

जब जवागल श्रीनाथ ने अनिल कुंबले को एक पारी में 10 विकेट लेने दिए
जब जवागल श्रीनाथ ने अनिल कुंबले को एक पारी में 10 विकेट लेने दिए

इससे पहले इस आलेख में हमने देखा कि कैसे एक निःस्वार्थ प्रयास द्वारा रिचर्ड हैडली ने अपनी टीम को अपने व्यक्तिगत मील के पत्थर से आगे रखा। हैडली आसानी से एक पारी में सभी दस विकेट लेने वाले दूसरे गेंदबाज बन सकते थे, लेकिन नियति ने भारत के लेग स्पिनर अनिल कुंबले को यह कीर्तिमान दिलाने की ठान रखी थी। उन्होंने 1999 में नई दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में पाकिस्तान के खिलाफ यह उपलब्धि हासिल की।

कुंबले को दस विकेट मिले, यह संभवत: पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ के बलिदान के कारण ही हो सका था। कुंबले पहले ही 9 विकेट ले चुके थे, और फिर दाएं हाथ के तेज गेंदबाज को पाकिस्तान की पारी के 60 वें ओवर में गेंदबाजी करने का मौका मिला।

उन्होंने ओवर की सभी गेंदें ऑफ स्टंप के बाहर फेंकी जिससे कि बल्लेबाजों को उनके ओवर में विकेट देने का कोई मौका नहीं मिला। हालांकि वकार ने अपना विकेट देने की भरपूर कोशिश की, लेकिन वह क्रीज पर बने रहे।



कुंबले ने 61 वें ओवर की तीसरी गेंद पर शॉर्ट लेग पर कप्तान वसीम अकरम को वीवीएस लक्ष्मण के हाथों कैच कराया। श्रीनाथ के बलिदान के बिना कुंबले को इतिहास बनाने का यह मौका नहीं मिल पाता।

मार्क टेलर के द्वारा पारी की निःस्वार्थ घोषणा

मार्क टेलर के द्वारा पारी की निःस्वार्थ घोषणा
मार्क टेलर के द्वारा पारी की निःस्वार्थ घोषणा

किसी देश के लिए सबसे अधिक व्यक्तिगत रन बनान किसी भी क्रिकेटर के लिए सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान मार्क टेलर के पास 1998 में पाकिस्तान के खिलाफ ऐसा करने का मौका था।

टेलर दूसरे दिन के अंत में 334 रन पर नाबाद रहे। उन्होंने 1930 में हेडिंग्ले, लीड्स में इंग्लैंड के खिलाफ सर डॉन ब्रैडमैन के 334 के स्कोर की बराबरी कर ली थी, जो किसी ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज द्वारा बनाया गया सर्वोच्च स्कोर था।

ऑस्ट्रेलियाई टीम ने दिन का खेल खत्म होने के बाद एक मतदान का आयोजन किया और फैसला किया कि टेलर को पारी घोषित करने की बजाए बल्लेबाजी करनी चाहिए। लेकिन, कप्तान ने इसे नजरअंदाज कर दिया, पारी रातों रात घोषित कर दी और यह सुनिश्चित किया कि वह ब्रैडमैन के रिकॉर्ड से आगे न निकलें, क्योंकि वे रिकॉर्ड को उनके पक्ष में बने रहने देना चाहते थे। उन्होंने वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा के 375 रनों के रिकॉर्ड को तोड़ने का भी मौका छोड़ दिया, जो तब टेस्ट मैचों में सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत स्कोर था।

“मैंने सर डोनाल्ड ब्रैडमैन के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है और यह मेरे लिए संतोषजनक से भी ज्यादा है। उस [ब्रायन लारा] रिकॉर्ड का मतलब कुछ भी नहीं है। मैं इस मैच को अपनी टीम के लिए जीतना चाहूंगा, और इसीलिए मैं यहाँ हूँ,” टेलर ने मैच के बाद कहा।

रोबिन उथप्पा के बलिदान ने रोहित शर्मा को 264 रनों तक पहुँचाया

रोबिन उथप्पा के बलिदान ने रोहित शर्मा को 264 रनों तक पहुँचाया
रोबिन उथप्पा के बलिदान ने रोहित शर्मा को 264 रनों तक पहुँचाया

13 नवंबर 2014 को भारतीय सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा ने एकदिवसीय मैचों में 250 के असंभव आंकड़े को पार किया और 264 रनों की शानदार पारी खेली, जो इस प्रारूप में किसी भी बल्लेबाज के द्वारा बनाया गया सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है।

यद्यपि रोहित को इस पारी का अधिकतम श्रेय मिलना चाहिए, लेकिन 264 रन बनाना कर्नाटक के विकेटकीपर-बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा के सहयोग के बिना संभव नहीं हो पता। नियमित विकेटकीपर-बल्लेबाज एमएस धोनी ने आराम करने का फैसला किया और उथप्पा, जो कि पूर्ण ताकत वाली भारतीय टीम का हिस्सा नहीं थे, को आखिरी दो एकदिवसीय मैचों में ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले खुद को साबित करने का मौका मिला (पहले तीन मैचों में साहा को मौका मिला था)।

उथप्पा 41 वें ओवर में बल्लेबाजी करने के लिए आये और तब स्कोर 276/4 था और रोहित 155 रन बनाकर बल्लेबाजी कर रहे थे। जब वह पविलियन लौटे, तब स्कोर 404/4 था और उथप्पा के विकेट पर आने के बाद रोहित ने 43 गेंदों में 91 रन बना लिए थे।

उथप्पा ने भारतीय पारी की शेष 58 गेंदों में से मात्र 16 गेंदों का सामना किया और 16 रन पर नाबाद रहे। उन्होंने सिंगल्स लेकर यह सुनिश्चित किया कि रोहित को यह मील का पत्थर हासिल करने का पूरा मौका मिले।

कई लोग राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह सुनिश्चित करने के लिए ऐसा नहीं करते।

Source: 5 most unselfish acts in the history of cricket

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