आशीष नेहरा की कहानी (Ashish Nehra interview in Hindi)

Ashish Nehra interview in Hindi

वो स्कूटर कहाँ है जिससे वीरेंद्र सहवाग आपको आपके शुरुआती दिनो मे लेने आया करते थे?

ये 20 साल पहले की बात है और हम दोनो के स्कूटर अब काफ़ी समय पहले जा चुके है. सुनहरी यादें थी वह

क्या ये सच है की जब आप नेट्स पर जाने के लिए तैयार होते थे तब वीरेन्द्र सहवाग आपका नाश्ता भी खा लेते थे?

नाश्ता नही- बस दूध. उस वक़्त मैं सुबह जल्दी उठने वालो मे से नही था. वीरू मेरे घर जल्दी आ जाता था और मुझे उठाता था. जब मैं 17-18 साल का था तब मुझे दूध बिल्कुल भी पसंद नहीं था. वही वीरू दूध का दीवाना था. मेरे घर वाले उसे दूध का पूछते थे तो वो मेरा गिलास भी पी जाता था. जब तक हम फिरोज़शाह कोटला मैदान पहुँचते थे तब तक वीरू एक लीटर दूध पी लेता था. फिर मैं मैदान जाके तला हुआ नाश्ता करता था.

उन स्कूटर सवारीयो से आपकी क्या यादें जुड़ी हुई है ?

हम दोनो के बीच एक समझौता हुआ था, वीरू मैदान जाते समय स्कूटर चलाता था और मैं लौटते वक़्त. मैं गेंदबाज था इसलिए मेरा बैग वीरू से छोटा था और उसकी किट बड़ी थी, जिस पर में अपना सर रख कर सो लिया करता था.

आप वीरू के सबसे पसंदीदा विषय लगते है, उनके ट्वीट भी आपसे जुड़े हुए रहते है. क्या आप उन्हे पढ़ते है ?

सच बताया जाए तो मुझे इस बारे मे ज़्यादा पता नहीं है. मैं दूसरे लोगो से इस बारे मे सुनता हू और मुझे सुनके हसी आती है. मैं ये ज़रूर जानता हूँ की वह सोशियल मीडीया एवं हिन्दी कॉमेंटरी मे छाया हुआ हैं. लेकिन मैं किसी सोशियल मीडीया पर नही हूँ. ट्वीट तो छोड़िए मैं ई मेल तक नही करता हूँ. जब चार्टर्ड अकाउंटेंट या वकील भी मेरे घर आते है तब भी मैं उस कमरे मे नहीं रहता हूँ. उन सब को मेरी पत्नी देखती हैं.

आपके चेहरे के हाव भाव वैसे ही रहते है, चाहे आपने एक ओवर मे 24 रन खर्च हुए हो या विकेट ही क्यों ना तोड़ा हों. आप मैदान पर अपनी भावनाओ को काबू मे कैसे रखते हैं?

मैं चाहे अच्छा कर रहा हू या बुरा मैं हमेशा एक ही तरह का इंसान हूँ. जब आप अच्छा ना कर रहे हो तो बिल्कुल दिमाग़ मे आता है की क्या ग़लत हो रहा है एवं क्या सुधारा जा सकता है.

एक तेज़ गेंदबाज होते हुए क्या आप कभी भावुक होते है ?

ये तो आप मुझसे बेहतर बता सकते हैं. वैसे ये निर्भर करता है की मैच की परिस्थिति क्या हैं. अगर आप रोमांचक मैच मे हारते है तो बिल्कुल भावुक हो जाते हैं. लेकिन मैं इस सब से खुद को ज़्यादा फ़र्क नही पड़ने देता हूँ. मेरा हमेशा से ये मानना रहा है की उपर उठने का असली मज़ा तभी है जब आप पूरी तरह से टूटे हुए है. यही वो समय होता है जब एक खिलाड़ी को अपना चरित्र दिखाना होता हैं क्यूकी अंत मे आपको ही उस परिस्थिति से बाहर आना हैं.

गेंदबाज़ी करते वक़्त वो कौन सी चीज़ है जो आपको गुस्सा दिलाती है?

कभी अगर कोई कैच छूटता है और फिर वही बल्लेबाज़ आपको 3 या 4 छक्के मार दे तो गुस्सा आता है. लेकिन फिर कई बार ऐसा भी होता है की मैने कोई कैच छोड़ा हो या मिसफ़ील्डिंग की हो, तो अगर गेंदबाज जूनियर भी हो तो उसे भी गुस्सा आ सकता है, लेकिन ये सब सिर्फ़ एक या दो मिनिट के लिए होता है.

अपने आप को एक फ़ील्डर के तौर पर आप कैसे आँकते है ?

पहली बात तो भारत मे आपको अपनी छवि बदलने मे बहुत दिक्कतो का सामना करना पड़ता है. लेकिन मुझे फिर भी लगता है की मेरे शुरुआती करियर के मुक़ाबले मैं बेहतर फ़ील्डर हूँ. अब मैं काफ़ी ज़्यादा प्रयास करता हूँ . मैं जनता हूँ कि मैं रवीन्द्र जडेजा या अजिंक्या रहाने या विराट कोहली जितना अच्छा फ़ील्डर नही हो सकता, लेकिन ऐसा भी ना हो की मेरी तरफ आया हुआ कैच छूटे या एक रन दो रन मे बदल जाए या मेरे पैरो के बीच से गेंद निकलती रहे. पहले मैं फील्डिंग को बिल्कुल भी तवज्जो नही देता था लेकिन पिछले 5-6 साल मे मैने काफ़ी मेहनत की है.

एक टी-२० मैच मे आप किस जगह फील्डिंग करना पसंद करते हैं?

अधिकतर समय मैं शॉर्ट फाइन या शॉर्ट थर्ड मैंन पर फील्डिंग करता हूँ, ख़ासकर के तब जब स्पिन्नर्स गेंदबाजी कर रहे होते हैं. लेकिन इसका मतलब ये नही है की आशीष नेहरा बुरा फ़ील्डर है. मॅच मे आपको हमेशा 4 फ़ील्डर सर्कल के अंदर रखने होते है. और मैं अकेला नहीं हूँ इन जगहो पर खड़ा रहने वाला. आपके सबसे अच्छे फ़ील्डर तो स्वाभाविक रूप से सर्कल के बाहर ही रहेंगे.

कुछ ही समय मे आप 38 वर्ष के हो जाएँगे, भारत के सबसे उम्रदराज खिलाड़ी, क्या आपको इस बात पर गर्व हैं?

जी बिल्कुल. अभी हाल ही मे कुछ जूनियर खिलाड़ी मुझसे आके बोले की मैं उनके लिए प्रेरणा का स्त्रोत हूँ. यदि मैं किसी को प्रेरित कर सकता हूँ, तो इससे ज़्यादा खुशी की बात मेरे लिए कुछ नहीं है. मेरी 10-12 सर्जरी हुई है, और मैं एक तेज़ गेंदबाज हूँ. कप्तान मुझे पहले 6 ओवर एवं अंतिम ओवेरो मे भी गेंदबाज़ी देते हैं. कई बार मैने पावरपले के दौरान भी 3 ओवर्स किए है जब सिर्फ़ दो फ़ील्डर सर्कल के बाहर होते है. तो मुझे खुशी है की 37आ वर्ष का होते हुए भी मई इस काबिल हूँ. मैं कभी भी 125 किलोमीटर प्रति घंटे वाला गेंदबाज नही रहा , मैने हमेशा 138-140 की रफ़्तार से ही गेंदबाज़ी की हैं.

किस चीज़ ने आपको प्रेरित किया हैं?

चलते रहने के लिए मुझे दिन के 5 घंटे क्रिकेट को देने होते है. फिर चाहे वो ट्रैनिंग हो, रन्निंग हो, या कोई मसाज ही लेना हो. अपनी चोटो की वजह से मैने इतना क्रिकेट मिस किया है की मुझे लगता है की अभी मेरा मन इससे नहीं भरा.

चोटो के साथ आपका हमेशा से नाता रहा हैं. सबसे खराब चोट कौन सी थी आपकी नज़र में?

2002 की चॅंपियन्स ट्रोफी में, मुझे याद है की मैं हर्शल गिब्ब्स या ग्रीम स्मिथ मे से किसी एक को रन आउट करने का प्रयास कर रहा था और गेंद के बदले मेरी उंगलिया स्टंप्स मे घुस गयी थी.

चोटो से ज़्यादा वे जिस समय आई उन्होने मुझे ज़्यादा परेशान किया. 2011 विश्वकप के सेमिफाइनाल मे पाक के खिलाफ मुझे उंगली मे चोट आई जिसकी वजह से मैं फाइनल से बाहर हो गया. मेरी उंगली की एक हड्डी के 7 हिस्से हो गये थे. मैं अभी भी उस उंगली को मोड़ नही पाता हूँ. लेकिन मुझे अंत मे विश्वकप उठाने का मौका तो मिला. मुझे खुशी थी की मैने प्रतियोगिता को पहले नहीं छोड़ा. विश्वकप से पहले दो अभ्यास गेम मे मेरी पीठ मे बहुत दर्द था और मैं प्रतियोगिता से हटने का सोच रहा था, लेकिन किस्मत से मैने खुद को फिट रखने की कोशिश की और विश्वकप हमारे नाम हुआ .

पीठ की चोट या पैर की- क्या ज़्यादा बुरी रही आपके लिए ?

दोनो.

हरभजन सिंह ने हाल ही मे आपकी तारीफ की एवं कहा की आप बहुत रन्निंग करते है और वही आपके इतने लंबे समय तक बने रहने का राज़ है. क्या ये सच हैं ?

उत्तर भारत मे मेरे शुरुआती दिनों मे यही माना जाता था की फिटनेस का मतलब रन्निंग. चाहे बारिश का मौसम हो या ठंड का , आपको अपने जूते पहन के निकल जाना होता था सड़को पर दौड़ने के लिए.मुझे अभी भी याद है, कोच खिलाड़ियो को बोलते थे, 10-20 चक्कर लगाने है कोटला के. तो एक साल पहले तक मैं लंबी दूरी का धावक हुआ करता था. उसके अलावा भी मैं 12-14 किलोमीटर या 45 मिनिट तक दौड़ता था, वह भी गेंदबाज़ी करने के बाद.

पिछले महीने मुझे याद है की बीसीसीआई ने यो यो टेस्ट करवाया था, मैं शायद प्रथम तीन स्थानो मे आया था, मैं और दौड़ सकता था, मेरी साँसे नही फूल रही थी.

दौड़ना हमेशा से मेरी ताक़त रहा है. इसके दो फाय्दे हैं, मैं बहुत ज़्यादा वज़न नहीं उठाता हूँ और दौड़ना एक मानसिक चीज़ ज़्यादा हैं. आपका शरीर भले ही थका हुआ हो लेकिन आप अपने को दिमाग़ से पुश करते है, लेकिन आजकल मैं तेज़ दौड़ ज़्यादा करता हूँ लंबी दूरी की दौड़ के मुक़ाबले.

कितना मुश्किल रहा है आपके लिए क्रिकेट मे वापसी करना और इतनी बढ़िया गेंदबाज़ी करना?

बिल्कुल भी आसान नही होता. हाल ही मे मैने घुटने एवं हॅम्स्ट्रिंग के बहुत बड़े ऑपरेशन के बाद वापसी की है. ये ऑपरेशन पिछले आई पी एल के वक़्त हुआ था और मैने अभी इंग्लेंड सीरीज़ मे वापसी की.इसके पहले मैने सिर्फ़ एक प्रॅक्टीस मैच खेला ब्रबोवर्न स्टेडियम पर जब एम एस धोनी ने आख़िरी बार टीम की कमान संभाली थी.

यहाँ मेरे लिए मेरा अनुभव कारगर साबित होता है, मुझे अपनी लिमिट मालूम है, और मैं खुद पे भरोसा रखता हू. मेरे आत्मविश्वास का राज़ ये है की मैने मैदान के बाहर खुद के ऊपर बहुत काम किया है.

आपके द्वारा डाला गया सबसे महँगा ओवर कौन सा है?

वैसे मुझे पूरी तरह तो याद नही है लेकिन मुझे याद है 2012 आईपीएल मे एक बार ए बी डिविलयर्स ने मॅच के आखरी ओवर मे 22 या 23 रन मारे थे. मैं जनता हू की हर दूसरे दिन ऐसा ओवर आता है, लेकिन उस मॅच मे आरसीबी को आखरी ओवर मे 21 रन चाहिए थे और डिविलियर्स ने 18 एवं सौरभ तिवारी ने 7 रन बनाए थे, जिसमे आखरी गेंद पे मारा गया छक्का भी शामिल था. डिविलियर्स उस मैच मे बस मारते ही गये थे.

हर बल्लेबाज़ का एक ख़ास शॉट होता है, आपके लिए आपकी ख़ास गेंद कौन सी है?

ये तो खेल की परिस्थिति पर निर्भर करता है. ऊपर बताए गये बंगलोर वाले मैच मे मुझे याद है की मैने दो यॉर्कर डालने की कोशिश की थी, लेकिन दोनो लोवर फुल टॉस गयी. एक बार तो गेंद बल्ले के बीच से लगी भी नही थी फिर भी सीमा रेखा के पार चली गयी. तो यह कहना बहुत आसान है की ” ” मैं दबाव मे अच्छी यॉर्कर गेंद डालता हूँ” लेकिन आजकल कुछ बल्लेबाज़ यॉर्कर गेंद को लेंथ बॉल से ज़्यादा अच्छा खेलते है.

जहाँ तक ख़ास गेंद का सवाल है, एक अच्छी लेंथ बॉल एवं यॉर्कर कारगर साबित होती है. एक धीमी बआउन्सर गेंद के बाद आप एक तेज़ गति का बआउन्सर फेक सकते है, जिसको अधिकतर बल्लेबाज़ सीमा के पार नही पहुँचा पाते, लेकिन फिर ऐसी गेंदे परिस्थितियो पर भी निर्भर करती हैं.

आप कौन से बाए हाथ के तेज़ गेंदबाज़ को पसंद करते है?

मुझे चमिंडा वास की गेंदबाज़ी बेहद पसंद थी. वो बहुत ही सरल व्यक्ति है लेकिन यदि आप उनका रिकौर्ड़ देखे और ये देखे की उन्होने किन पिच पर खेला है, तो आपको समझ मे आएगा की वे कितने शानदार गेंदबाज थे. ऐसे विकेट जो की मुरली या धरमसेना या किसी अन्य स्पिन्नर के लिए बनाए जाते थे, वहाँ पर 400 वन डे विकेट लेना अपने आप मे बहुत बड़ी उपलब्धि है.

आप किस क्रिकेटर को सबसे ज़्यादा टेक्स्ट करते है?

कोई एक खिलाड़ी नही है. और काफ़ी बार ऐसा होता है की मैं टेक्स्ट करने के बजाय फ़ोन उठाके कॉल कर लेता हूँ. युवराज सिंह, हरभजन सिंह, वीवीएस लक्ष्मण कुछ ऐसे क्रिकेटर है जिनसे मैं अक्सर बात करता हूँ.

आपकी आत्मकथा का शीर्षक क्या होगा ?

मुझे नही लगता की मैं कभी कोई किताब लिखूंगा.

क्या लंबे तेज़ गेंदबाज़ो को जूते खरीदने मे दिक्कत का सामना करना पड़ता है?

मेरे पैर साधारण लंबाई के है, तो मुझे कोई दिक्कत नही हुई. और वैसे भी जूते की कंपनिया आजकल कुछ ही वक़्त मे आपके हिसाब से जूते बना देती है. मेरे पदार्पण मैच के वक़्त ऐसा कुछ नहीं हुआ करता था. मुझे याद है 1999 मे श्रीलंका मे मेरे पहले मैच के समय मेरे पास सिर्फ़ एक जोड़ी जूते थे. किस्मत से एसएससी मे एक मोची था, जो की हर दूसरे सेशन के बाद मेरा जूता सील के दे देता था. मैं उसे यह नही बताता था की मेरे पास एक ही जोड़ी है .मुझे अभी भी याद है की आख़िरी के कुछ ओवर डालते समय कील बाहर आने लगी थी. वो आखरी बार मैने उन जूतो मे गेंदबाज़ी की थी.

फैंस को आपके बारे मे सबसे ज़्यादा क्या पसंद है?

मुझे नही लगता फैंस मुझे ज़्यादा पसंद करते है.

Leave a Response

share on: