महेंद्र सिंह धोनी बनाम एडम गिलक्रिस्ट (टेस्ट)

Dhoni vs Gilchrist in Test Cricket

गिलक्रिस्ट और धोनी दोनों का ही कद उनके समकक्षों से ऊपर था और पूरी क्रिकेट बिरादरी उनका सम्मान करती है.

एक पारी की पूरी लंबाई तक पैर की उंगलियों पर खड़े रहना, ध्यान में कोई विचलन नहीं, और पूरी शक्ति के साथ विस्फोटक बल्लेबाजी- एक विकेटकीपर बल्लेबाज की भूमिका टेस्ट क्रिकेट में कभी भी आसान नहीं होती। एमएस धोनी और एडम गिलक्रिस्ट, क्रिकेट के इतिहास में दो सबसे बड़े विकेटकीपर-बल्लेबाजों में से एक थे। दोनो ने क्रमश: 90 और 96 टेस्ट मैच खेले। दोनों का ही कद उनके समकक्षों से ऊपर था और पूरी क्रिकेट बिरादरी उनका सम्मान करती है। क्रिकेट के दो महान खिलाड़ियों के बीच तुलना करना थोड़ा कठोर होगा, लेकिन धोनी और गिलक्रिस्ट के सम्मान में आँकड़ों और अन्य पहलुओं पर प्रकाश डाला जाना चाहिए।

घर के बाहर कितने रन बनाए

घरेलु मैदान पर एक क्रिकेटर ज्यादा से ज्यादा मौके भुनाने की कोशिश करता है और उसे शायद ही किसी प्रकार की परेशानी होती है, लेकिन असली चुनौती कहीं और स्थित है। विदेशी परिस्थितियों में खेलना एक आसान काम नहीं है और बाधाएँ हर समय खुद को आपके सामने पेश करती हैं। धोनी और एडम गिलक्रिस्ट ने पिछले कुछ सालों से अपनी संबंधित टीमों के लिए बहुत मेहनत की है। हालांकि भारतीय खिलाड़ी के पास कई शतक दर्ज नहीं है, लेकिन वह कई मौकों पर बल्लेबाजी क्रम में महत्वपूर्ण साबित हुए हैं। पाकिस्तान, न्यूजीलैंड और बांग्लादेश में उनका औसत सब कुछ बयान कर जाता है और एक खिलाड़ी के तौर पर धोनी की उपेक्षा नहीं की जा सकती है। दूसरी ओर, गिलक्रिस्ट के आंकड़े शानदार हैं और दस शतकों के साथ वह महानतम निचले क्रम के बल्लेबाजों में गिने जा सकते हैं। भारत और संयुक्त अरब अमीरात में खेलने के अलावा, न्यू साउथ वेल्स के बाएँ हाथ के बल्लेबाज के लिए कभी भी औसत गिर नहीं पाया।

    महेंद्र सिंह धोनी – भारत – रिकॉर्ड


टीम की जीत में कितने रन बनाए

रनों का पहाड़ खड़ा कर देना एक अलग चीज है, लेकिन टीम की जीत में योगदान देना कोई आसान उपलब्धि नहीं है और इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। विकेटरक्षक बल्लेबाजों के रूप में दोनों ही निचले क्रम में खेलते हैं और विरोधियों के शरीर में कांटे की तरह चुभते भी हैं।

धोनी के पास औसत के आंकड़े तो शानदार नहीं हैं, लेकिन जब जीत की जिम्मेदारी लेने की बात आती है, तो वह महान लोगों के पीछे नहीं हैं। उनके छह शतकों में से चार अच्छे गेंदबाजी आक्रमणों के खिलाफ आये हैं। इंग्लैंड के अलावा, धोनी का शानदार योगदान खारिज नहीं किया जा सकता। कंगारूओं के खिलाफ उनका दोहरा शतक अभी भी किसी विकेटकीपर बल्लेबाज के द्वारा खेली गयी सबसे साहसी परियों में से एक है।

जीत में गिलक्रिस्ट का प्रभाव बहुत ही विध्वंसक रहा है क्योंकि उनका औसत किसी भी विरोधी टीम के खिलाफ 42.42 से कम नहीं है। यह एक बल्लेबाज के रूप में उनका असर दिखाता है। विशिष्ट बात यह है कि उन्होंने प्रत्येक टेस्ट खेलने वाले राष्ट्र के खिलाफ जीत में कम से कम एक शतक जरूर लगाया है और यह एक कारण है कि क्यों उन्हें एक किंवदंती माना जाता है।

किस प्रकार आउट हुए

आक्रामक मार्ग अपनाना दोनों खिलाड़ियों के लिए आगे बढ़ने का सबसे पसंदीदा रास्ता था और उनके आउट होने के कारण भी उनके खेलने की शैली से काफी प्रभावित हैं। वे असाधारण शॉट्स खेलने के लिए जाने जाते थे और यह आँकड़े भी उस पर ही प्रकाश डालते हैं।

धोनी मुख्यतः एक निचले हाथ का प्रयोग करने वाले खिलाड़ी हैं और गेंद को मैदान के चारों तरफ मारने के लिए वह क्रीज के चारों ओर घूमना पसंद करते हैं। बारह मौकों पर वह स्टंप के सामने कैच आउट हुए। उन्होंने गेंदबाज की लय को बिगाड़ने के लिए हवाई मार्ग भी अपनाया और फिर गेंद कई मर्तबा क्षेत्ररक्षकों की पकड़ में भी आई।

    एडम गिलक्रिस्ट – ऑस्ट्रेलिया – रिकॉर्ड

हालांकि गिली ने अपना खेलने का रवैया कभी नहीं बदला और धोनी की तरह ही हमेशा गेंदबाजों की खबर लेने में भरोसा करते थे। तेज और उछाल भरी पिचों पर खेलने वाले ऑस्ट्रेलियाई, कट और पुल खेलने में माहिर थे और गेंद को ऑन द राइज खेलने में उन्हें कोई परेशानी नहीं थी।

पेस बनाम स्पिन

सबसे महान खिलाड़ियों में गिने जाने के लिए प्रत्येक को हर पहलू में प्रभावी होना चाहिए और यह किसी एक क्रिकेट पृष्ठभूमि को ध्यान में नहीं रख कर चलने से नहीं हासिल होगा। महानता बहाने की तलाश नहीं करती है और इसलिए चुनौतियों के खिलाफ सीना तान कर खड़ा होना ही असली पराक्रमी की पहचान है।

भारतीय ने धीमी और लो विकेटों पर परचम लहराया है और उनका औसत और आउट होने का तरीका स्पिन गेंदबाज़ी के खिलाफ उनकी महारथ का एक स्पष्ट प्रमाण है। स्पिन गेंदबाजी को आसानी से खेलने के अलावा धोनी ने सीम के अनुकूल परिस्थितियों में भी गेंदबाजों के खिलाफ कुछ उपयोगी रन बनाए हैं।

इसके विपरीत, गिलक्रिस्ट ने गति और स्पिन दोनों के खिलाफ विध्वंसक रवैया अपनाया और शांत रहने में कभी भी विश्वास नहीं किया। तथ्य यह है कि वह उसी युग के थे जब शेन वॉर्न के रूप में एक विश्व स्तरीय स्पिनर उनकी टीम में था, जिससे उन्हें गुणवत्ता वाली स्पिन गेंदबाजी का सामना करने में मदद मिली।

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कैच / स्टम्पिंग

विकेटकीपिंग में जबरदस्त एकाग्रता और फिटनेस मानकों की मांग होती है और धोनी और गिलक्रिस्ट दोनों ने अच्छी तरह से यह जिम्मेदारी संभाली है। दोनों ने 100 के करीब टेस्ट मैच खेले हैं और कुछ ही ऐसे मौके थे जब वे उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाये।

महेंद्र सिंह धोनी विकेट के पीछे सबसे तेज नहीं थे, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने त्वरित रिफ्लेक्स और तेज़ हाथों से खुद के लिए काम आसान बनाया। उनके पास परंपरागत विकेटकीपिंग तकनीक नहीं थी, लेकिन उन्होंने विकेट के पीछे उनकी भूमिका को अपने तरीके से ही महत्वपूर्ण बनाये रखा।

एडम गिलक्रिस्ट विकेटों के पीछे काफी तेज और एथलेटिक थे और उस स्थान पर शायद ही कोई उनके जैसी चपलता दिखा सके। 416 शिकारों के साथ गिली टेस्ट क्रिकेट में एक विकेटकीपर द्वारा आउट करने की सूची में दूसरे स्थान पर आते हैं।

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