तस्वीरों में देखें हरभजन सिंह का उतार चढ़ाव भरा कैरियर

Harbhajan Singh - Career in pictures

वह न गेंद को प्रसन्ना की तरह फ्लाइट कराते हैं और न ही मुरलीधरन की तरह घुमाते हैं लेकिन अपनी शैली के चलते हरभजन भारत के सफलतम ऑफ स्पिनरों में से एक हैं। विश्व क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया की बादशाहत के बाद वर्ष 2000 के दौर में उन्होंने एक प्रतिद्वंद्वी भारतीय टीम के निर्माण में अहम भूमिका निभाई। लोग अनिल कुंबले को याद करते हैं लेकिन अगर अनिल कुंबले बैटमैन थे तो हरभजन सिंह बैटमैन के रॉबिन। कुंबले के सन्यास लेने के बाद हरभजन का कैरियर भी पटरी से उतर गया।

तस्वीरों में देखें हरभजन सिंह का सफर

Harbhajan representing India in the 16th Commonwealth Games in 1998
Harbhajan representing India in the 16th Commonwealth Games in 1998

वर्ष 1998 में 17 वर्ष की अवस्था मे उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पदार्पण किया। अपने पहले अंतर्राष्ट्रीय विकेट के रूप में उन्होंने ग्रेग ब्लेवेट को आउट किया और अपने अंदाज में जश्न मनाया।

वर्ष 2000 में वह लगभग क्रिकेट छोड़ चुके थे और भारत के लिए खेलने की उनकी संभावनाएं कम होती जा रही थीं। उनके पिता का देहांत हो चुका था और उन्हें अपने परिवार की देखभाल करना था। वहीं भारतीय चयनकर्ता मुरली कार्तिक और सरंदीप सिंह को प्राथमिकता देने लगे थे।

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सौरव गांगुली ने उन्हें टीम में वापस बुलाने में अहम भूमिका निभाई।

Harbhajan picked up a mind-boggling 32 wickets in 3 Tests against Australia
Harbhajan picked up a mind-boggling 32 wickets in 3 Tests against Australia

2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में उन्होंने शानदार प्रदर्शन के ज़रिए खुद को मैच विजेता के रूप में स्थापित किया। उन्होंने रिकी पोंटिंग सहित इस श्रृंखला में 32 विकेट लिए जिसके कारण कोलकाता और चेन्नई टेस्ट में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को मात दी। इस श्रृंखला में उन्होंने हैट्रिक ली और एक पारी में 8 विकेट चटकाए।

अगले वर्ष भी उन्होंने पर्याप्त विकेट चटकाए और अनिल कुंबले के साथ भारत के स्पिन युग को पुनर्जीवित किया। 2003 विश्व कप में वह भारत के मुख्य गेंदबाज़ थे। टूर्नामेंट में उन्होंने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ बेहतरीन प्रदर्शन किया और टूर्नामेंट में 11 विकेट लेकर अनिल कुंबले के विकल्प के रूप में खुद को उभारा।



Harbhajan exults after picking the wicket of Tim de Leede in the 2003 World Cup
Harbhajan exults after picking the wicket of Tim de Leede in the 2003 World Cup

2004 में चोट के चलते वह कुछ समय के लिए बाहर हो गए लेकिन उंगली की सर्जरी के बाद उन्होंने टीम में फिरसे वापसी की।

टेस्ट कैरियर में उतार चढ़ाव

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मुम्बई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने 29 रन देकर 5 विकेट चटका कर मेहमान टीम को अंतिम पारी में 93 रन पर ऑल आउट करने में मुख्य भूमिका निभाई। वर्ष के अंत मे उन्होंने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए जैक कालिस की बेहतरीन पारी के बावजूद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 7 विकेट लिए।

Harbhajan picked up a fifer in India’s sensational win over Australia in 2004
Harbhajan picked up a fifer in India’s sensational win over Australia in 2004

कुंबले और भज्जी की विकेट लेने की साझेदारी दिन प्रतिदिन आगे बढ़ती गई। 2005 में अहमदाबाद में श्रीलंका के खिलाफ दोनों ने मिलकर 17 विकेट चटकाए। इस मैच के साथ हरभजन ने अपने ऊपर लगे संदिग्ध गेंदबाज़ी एक्शन के आरोपों को भी छोड़ दिया। यह आरोप उन पर इसी वर्ष के आरंभ में लगा था।

पाकिस्तान दौरे पर पहले मैच में उन्होंने अपने कैरियर के सबसे निराशाजनक प्रदर्शन किया जिसमें 176 रन खर्च करने के बाद भी वह कोई विकेट न ले सके। दूसरे टेस्ट में भी खराब प्रदर्शन के बाद तीसरे मैच से उन्हें बाहर कर दिया गया।



A disappointed Harbhajan looks on as Younis Khan celebrates his fifty in Faisalabad
A disappointed Harbhajan looks on as Younis Khan celebrates his fifty in Faisalabad

इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू श्रृंखला में भी उनका प्रदर्शन कुछ खास नही रहा और पूरी श्रृंखला में वह सिर्फ 8 विकेट ले सके। हालांकि इस टेस्ट श्रृंखला के बाद एकदिवसीय श्रृंखला में उनका प्रदर्शन शानदार रहा जिसके एक मैच में उन्होंने 5 विकेट भी लिए।

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इसके बाद उनके एकदिवसीय मैचों के प्रदर्शन में भी गिरावट आई। 2006 चैंपियंस ट्रॉफी में वह मात्र 2 विकेट ले सके और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों में मात्र एक विकेट ले सके। 2007 विश्व कप के लिए उनकी संभावनाएं धूमिल हो रही थीं। 2006 में वेस्ट इंडीज दौरे पर उन्होंने एक टेस्ट खेला और फिर डेढ़ वर्षों तक वह कोई टेस्ट मैच खेल न सके।

टी 20 विश्व कप के बाद कठिन समय

A 27-year-old Harbhajan was one of the seniors in the young Indian team that won the 2007 World T20
A 27-year-old Harbhajan was one of the seniors in the young Indian team that won the 2007 World T20

ग्रेग चैपल के जाने के बाद टी 20 विश्व कप विजेता टीम में उनकी वापसी हुई और उसके बाद खेल के तीनों प्रारूपों में उनकी वापसी के रास्ते खुल गए। 2007 का ऑस्ट्रेलिया दौरा उनके लिए विवादों भरा रहा।

सिडनी में उन पर एंड्रू सायमंड्स पर जातिगत टिप्पणी का आरोप लगा। इस दौरे पर खराब अम्पायरिंग और खेल भावना के उल्लंघन के चलते भारतीय टीम ने बीच मे ही दौरे से वापस लौटने का मन बना लिया था।

The Harbhajan-Symonds ‘Monkeygate’ garnered extensive media coverage
The Harbhajan-Symonds ‘Monkeygate’ garnered extensive media coverage

2008 में पहले आई पी एल में मुम्बई इंडियंस ने उन्हें टीम में शामिल किया और उसके बाद से 10 वर्षों तक वह मुम्बई के साथ रहे। टूर्नामेंट के दौरान किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाड़ी श्रीसंथ को थप्पड़ मार कर उन्होंने नए विवाद को जन्म दिया और शेष टूर्नामेंट से उन्हें बाहर कर दिया गया।

टेस्ट में वापसी

Teammates look on as Harbhajan celebrates his 300th Test dismissal
Teammates look on as Harbhajan celebrates his 300th Test dismissal

इसी वर्ष जुलाई में श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने शानदार तरीके से वापसी करते हुए श्रृंखला में 16 विकेट लिए। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू श्रृंखला में उन्होंने रिकी पोंटिंग को 10 वीं बार आउट कर टेस्ट क्रिकेट में 300 विकेट पूरे किए।

2009 चैंपियंस ट्रॉफी और दूसरे टी 20 विश्व कप में औसत प्रदर्शन के बावजूद टेस्ट मैचों में उनका शानदार प्रदर्शन जारी रहा। बांग्लादेश और श्रीलंका के खिलाफ बेहतरीन गेंदबाज़ी के ज़रिए वह टेस्ट टीम में अपनी जगह पक्की करने में कामयाब रहे।



Harbhajan suddenly turned into a different batsman against the Kiwis in 2010
Harbhajan suddenly turned into a different batsman against the Kiwis in 2010

2010 में न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू श्रृंखला में उन्होंने लगातार दो शतक लगाए।

2011 विश्व कप और उसके बाद

रविचंद्रन अश्विन के उदय के बावजूद 2011 विश्व कप विजय में उनकी अहम भूमिका रही। इसके बाद इंग्लैंड दौरे पर चोटिल होने के कारण वह टीम से बाहर हुए और अगले वर्ष नवम्बर में वापसी की।

Despite Ravi Ashwin’s emergence, Harbhajan was a vital part of India’s 2011 World Cup win
Despite Ravi Ashwin’s emergence, Harbhajan was a vital part of India’s 2011 World Cup win

2011 विश्व कप के बाद अगले चार वर्षों तक वह भारत की एकदिवसीय टीम से बाहर रहे। इस बीच केवल एक बार 2012 टी 20 विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ इंडिया ब्लू की ओर से उन्होंने चार विकेट लिए।

आई पी एल में निरन्तर अच्छे प्रदर्शन के कारण बांग्लादेश के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच में उनकी वापसी हुई। पिछले पांच वर्षों में यह उनका चौथा टेस्ट मैच था। श्रीलंका में एक टेस्ट मैच के बाद उन्हें फिरसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया। 2016 में वह एशिया कप और टी 20 विश्व कप में भी भारतीय टीम का हिस्सा रहे।

Harbhajan and his Mumbai teammates pose with the 2017 IPL trophy
Harbhajan and his Mumbai teammates pose with the 2017 IPL trophy

मुम्बई इंडियंस की तीसरी खिताबी जीत में उन्होंने पावरप्ले में अपनी किफायती गेंदबाज़ी के ज़रिए अहम भूमिका निभाई। भले ही अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के लिए उनकी संभावनाएं लगभग खत्म हो गई हों लेकिन वह अपने कैरियर में इतनी उपलब्धि प्राप्त कर चुके हैं कि भारतीय क्रिकेट के इतिहास में महान खिलाड़ियों में उनकी गिनती की जाएगी।

Source: Harbhajan Singh over the years: The chequered career in pictures

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