हार्दिक पांड्या के ग्राफ में एक और बढ़ोत्तरी

Hardik Pandya rises to the top again

रविवार को चेपक की भीड़ ने तीन भारतीय बल्लेबाज़ों के लिये सबसे ज्यादा तालियां बजायीं। इनमें से दो विराट कोहली और एम एस धोनी के लिये तो हमेशा और हर जगह तालियां बजती हैं किंतु वैसी ही सराहना की गयी 23 वर्षीय 7 नंबर के बल्लेबाज हार्दिक पांड्या की। पांड्या जिस वक़्त मैदान पर उतरे उस वक़्त साहस और धैर्य की आवश्यकता था क्योंकि भारत के ऊपरी क्रम के बल्लेबाज गेंदबाज़ों की गति, स्विंग और बाउंस के आगे घुटने टेक चुके थे।

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पांड्या टीम के आखिरी बल्लेबाज़ के रूप में आये और उनके साथ थे पूर्व भारतीय कप्तान एम एस धोनी। दर्शक अपने घरेलू खिलाड़ी धोनी के नाम के नारे लगा रहे थे लेकिन पांड्या ने अपनी पारी से सबका दिल जीत लिया।

अक्टूबर 2016 में न्यूजीलैंड के खिलाफ एकदिवसीय मैच पहली बार हार्दिक पांड्या भारत के मध्य क्रम में बल्लेबाजी करने उतरे। अक्षर पटेल के बाद नंबर 8 पर बल्लेबाज़ी करते हुए उन्होंने 32 गेंद पर 36 रन बना कर अपने भविष्य की नींव रखी। इसके बाद उन्होंने इंग्लैंड को कड़ी चुनौती दी।

हार्दिक की ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी का नज़ारा एक अभ्यास मैच में देखने को मिला जब चार वर्ष पूर्व वह 19 रन पर खेल रहे थे और इरफ़ान पठान के एक ही ओवर में 22 रन बना डाले। लेकिन भारतीय टीम का फिनिशर होने के लिये इतना ही पर्याप्त नहीं था। क्योंकि उस समय उन्हें पिंच हिटर माना जाता था जो कि निरंतर वैसा प्रदर्शन नहीं कर सकता।

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आम तौर पर बल्लेबाज़ गेंद को उठा कर हवा में मारने से पहले भी पर्याप्त समय लेता है।उस समय ऐसे प्रश्न उठ रहे थे कि क्या हार्दिक विपरीत परिस्थितियों में भी ऐसी ही आतिशी बल्लेबाज़ी करेंगे और क्या वह गेंदबाज़ी करते समय विकेट हासिल कर सकेंगे।

इंग्लैंड के खिलाफ उनके खेल में सुधार देखने को मिला। न्यूजीलैंड के खिलाफ लय हासिल करने के बाद पांड्या ने इंग्लैंड के खिलाफ पुणे में श्रृंखला के पहले ही मुकाबले में मैच जिताऊ पारी खेली और उसके बाद कोलकाता में तीन मैचों की टी20 श्रृंखला के तीसरे मैच में अदभुत पारी खेली जिसमें इंग्लैंड हारते हारते बचा। उनकी गेंदबाज़ी में भी निखार आया जिससे कोहली उन्हें ऊपरी क्रम या मध्य क्रम कहीं भी उपयोग कर सकते थे। श्रृंखला के अंत में वह भारत के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने।

ऑस्ट्रेलिया ने भारत के ऊपरी क्रम के खिलाफ अपनी कुशलता दिखाई लेकिन हार्दिक से पार नहीं पा सका। हार्दिक के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया ने छोटी गेंदों का उपयोग किया ताकि वह शॉट खेलते समय गलती करें। उस समय पांड्या और धोनी को बिना जोखिम उठाये साझेदारी निभानी थी और उन्होंने यह बखूबी किया। इस साझेदारी में पहला चौका 28 वें ओवर में लगा जब स्मिथ, पांड्या के एक शॉट को रोकते समय ढीले पड़ गए। दोनों बल्लेबाज़ों के लिये उस समय एक एक रन जोड़ना ही सबसे सुरक्षित तरीका था। 22 वें ओवर में जाधव के आउट होने से लेकर 36 वें ओवर तक दोनों ने 41 डॉट गेंदे खेलीं।

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मिड ऑफ़ और मिड ऑन के बीच लगा एक चौका जल्द ही ज़ैम्पा के खिलाफ आक्रामक रूप में बदल गया। लेग स्पिनर ज़ैम्पा ने विकेट की तलाश में फुल लेंथ गेंदबाज़ी की लेकिन इसका परिणाम लॉन्ग ऑफ़ और लॉन्ग ऑन पर तीन छक्के के रूप में सामने आया। ज़ैम्पा के एक ओवर में 24 रन पड़े और हार्दिक 45 गेंदों पर 35 के स्कोर से 50 गेंदों पर 58 के स्कोर पर पहुँच गए। इससे भारतीय टीम की रफ़्तार बढ़ी। इसके बाद हार्दिक ने मार्कस स्टॉयनिस और ज़ैम्पा की गेंदों पर 2 और छक्के लगाये। एक और छक्का मारने के प्रयास में हार्दिक आउट हो गए लेकिन उन्होंने 66 गेंद पर 83 रन की अपने कैरियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेली। उनकी यह पारी ज़ैम्पा के एक ओवर में ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी के अलावा उनके सही ढंग से शॉट खेलने की कुशलता(क्लीन हिटिंग) के लिये भी याद रखी जायेगी।

इस पारी से उनकी बल्लेबाज़ी शैली में भी निखार देखने को मिली जिसमे धोनी के साथ साझेदारी में वह धीरे धीरे अधिक प्रभावी हो गए। 118 रन की इस साझेदारी में धोनी का योगदान सिर्फ 29 रन का रहा।

पारी समाप्ति के बाद हार्दिक ने कहा ” हमने विकेट खो दिए थे और मेरे लिये धोनी के साथ साझेदारी बनाना बहुत ज़रूरी था। मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है, अभी भी सीख रहा हूँ। हम आपस में सलाह कर रहे थे कि खेल को कैसे बदलना है। उनके साथ बल्लेबाज़ी करना ख़ुशी की बात है। मैं ज़ैम्पा के ओवर के पहले से ही हिट करने की कोशिश कर रहा था। मेरा विचार यही होता है कि मैं सीधा प्रहार करूँ। मैं यह नहीं देखता के लॉन्ग ऑन है या लॉन्ग ऑफ। यदि मैंने सही ढंग से शॉट खेला तो मैं आश्वस्त रहता हूँ कि वह मैदान के बाहर ही गिरेगा।”

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पांड्या ने शुरुआत में ही शानदार गेंदबाजी के ज़रिये स्मिथ को आउट कर ऑस्ट्रेलिया के लिये लक्ष्य का पीछा करना मुश्किल बना दिया।

दिसम्बर 2015 में अपने पहले अंतर्राष्ट्रीय मैच से पहले हार्दिक ने क्रिकबज़ से कहा था ” मैं एक सम्पूर्ण तेज़ गेंदबाज़ और सम्पूर्ण बल्लेबाज़ बन सकता हूँ। मैं बेहतरीन क्षेत्ररक्षक भी हूं। इसलिये मुझे लगता है कि मैं उपयोगी साबित होऊंगा।” उनका आत्मविश्वास उनके इन शब्दों में साफ़ नज़र आता है।
हार्दिक अपनी उम्र के और खिलाड़ियों की तरह दबाव की परिस्थितियों में बिखरने वाले खिलाड़ी नहीं हैं। अपने कैरियर के सबसे मज़बूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ ऐसे प्रदर्शन से हार्दिक भारत के सबसे बहुमूल्य खिलाड़ी के रूप में उभरे हैं।

Source: Another upward spike in the Hardik Pandya graph

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Hardik Pandya rises to the top again | CricketinHindi.com
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