जाधव और पांड्या की परिपक्वता से खुश हैं कप्तान कोहली (Kohli happy with maturity of Jadhav and Pandya)

Kohli happy with maturity of Jadhav and Pandya

भारतीय कप्तान विराट कोहली ने इंग्लैंड से 2-1 से एकदिवसीय श्रंखला जीतने का सबसे बड़ा लाभ केदार जाधव और हार्दिक पांड्या जैसे खिलाड़ियों की परिपक्वता को माना है. भारत ने ये सीरीज़ एक अस्थिर मध्य क्रम से शुरू की थी जिसमे सुरेश रैना और अंबाति रायुडु जैसे खिलाड़ी नही थे, और युवराज सिंह भी तीन साल बाद वापसी कर रहे थे.

“मैं बेहद खुश हूँ केदार को ऐसे बल्लेबाज़ी करते देख, हार्दिक पांड्या ने भी बल्ले और गेंद से बेहतरीन प्रदर्शन किया हैऽउर भी ज़्यादा खुशी मिली युवराज और धोनी को इस अंदाज़ में खेलते देख और ऐसी साझेदारी करने में. और आख़िरी मैच में भी केदार जाधव और हार्दिक पांड्या की साझेदारी उस समय आई जब टीम के सभी अनुभवी बल्लेबाज़ 170 रन के भीतर आउट हो चुके थे.” – कोहली ने तीसरे मैच के बाद कहा.

“इन खिलाड़ियों ने अपने चरित्र का प्रदर्शन किया एक ऐसी स्थिति में जब हम पर बहुत दबाव था. और मेरे लिए एक कप्तान के तौर पर यह बहुद सुखद अनुभव रहा. जिस तरह युवा खिलाड़ियों ने प्रदर्शन किया और युवराज-धोनी ने बल्लेबाज़ी की, देखते ही बनता था. दो युवाओं को अपने खेल का स्तर बढ़ाते देखना दो अनुभवी खिलाड़ियों के मैच जीतने से भी ज़्यादा आनंदमय था. उनके लिए ये एक अवसर था और उन्होने बेहतरीन खेल के प्रदर्शन किया” – विराट कोहली


विराट कोहली – भारत – रिकौर्ड़स (Virat Kohli Records)

जाधव ने श्रंखला के पहले मैच में पुणे में शतक बनाकर इंग्लैंड को चौंकाया था. रविवार को हुए सीरीज़ के अंतिम मुक़ाबले में वे एक बार फिर निचले क्रम के साथ एक विशाल स्कोर का पीछा करते हुए अकेले पड़ गए. पांड्या ने जाधव के साथ 46वें ओवर तक बल्लेबाज़ी की और परिस्थिति केवल 27 गेंदों में 45 रन तक ला दी थी, लेकिन अंतिम ओवर में भारत हार गया. गेंदबाज़ी करते हुए भी पांड्या ने इंग्लैंड को क्षतिग्रस्त किया और अपने अंतिम स्पेल में ईयन मॉर्गन, जोस बटलर और जॉनी बेर्स्टो को आउट कर 6 ओवर में 21 रन दे कर 3 विकट लिए.

कोहली पांड्या के टीम में आने से खुश हैं जो की नंबर 7 पर आक्रामक बल्लेबाज़ी कर सकते हैं और तेज़ गेंदबाज़ी आक्रमण में भी एक विकल्प हैं. “ये काफ़ी मददगार है” – कोहली ने कहा. “विश्व में सभी टीमों के पास तेज़ गेंदबाज़ी करने वाले ऑल-राउन्डयर हैं जो उन्हे संतुलन देता है. इसके चलते आप एक अतिरिक्त बल्लेबाज़ को खिला सकते हैं. और इसके बाद भी आप दो स्पिनर और दो तेज़ गेंदबाज़ खिला सकते हैं और अगर वो अपने दिन पे काम कर दें तो आप एक अच्छी स्थिति में होते हैं.” – कोहली ने कहा.

“मुझे लगता है कि पांड्या ने पहले और तीसरे मैच में बहुत अच्छी गेंदबाज़ी की. अंतिम मैच में भी उन्होने 3 विकट लिए. उन्होने अच्छी जगहों पर गेंद डाली और उन कम गेंदबाज़ों में से थे जिन्होने जान लगर बॉल पटकी और पिच से मदद ली. बल्लेबाज़ी के समय भी उन्होने सूजबूझ से अपनीी आक्रामक शैली को नियंत्रण किया और हर मैच के साथ वो और समझदार और भरोसेमंद होते जा रहे हैं. हमने उन्हे समझाया था की शुरू में उन्हें ज़्यादा आक्रामक होने की आवश्यकता नही है और केवल एक रन ले ले कर वे स्कोर बोर्ड को चलाते रहें. वो जानते हैं की कब उन्हे बड़े शॉट खेलने चाहिए. इस वजह से वो टीम में एक बहुत अच्छा संतुलन लाते हैं.” – कोहली ने कहा.

Virat Kohli and Hardik Pandya
Virat Kohli and Hardik Pandya

कोहली ने कहा की इंग्लैंड की मज़बूत बल्लेबाज़ी को देखते हुए वे इस लक्ष्य से संतुष्ट थे. उन्हें उम्मीद थी की कलकत्ता की तेज़ पिच पर इंग्लैंड के गेंदबाज़ कारगर साबित होंगे. भारत ने मैच के अंतिम ओवर तक संघर्ष किया और आख़िरी ओवर में जब 16 रन की आवश्यकता थी तब मैच इंग्लैंड की तरफ तब पलटा जब क्रिस वॉक्स ने जाधव को 90 के निजी स्कोर पर आउट किया.

“अगर विकट पर घांस हो और सतह कड़क हो तो आप इंग्लैंड जैसे मज़बूत तेज़ गेंदबाज़ी आक्रमण से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद करते हैं. उन्हें पता होता है की ऐसी पिच पर कैसी गेंदबाज़ी करनी है क्योंकि उन्हे मालूम होता है कि गेंद कितना सीम करेगी और कितना उछाल लेगी. उन्होने बहुत चालाकी से अपनी लाइन और लेंथ बदली.” – कोहली ने कहा.

“ये सामान्य भारतीय पिच थी थी जिस पर गेंद रिवर्स स्विंग होती है और हमें इसका अंदाज़ा था. इसमें कुछ भी नया नही था. हमें पता था की इस पिच पर उनके तेज़ गेंदबाज़ों का सामना करना चुनौतीपूर्ण होगा. इसलिए मैने कहा की ऐसे में दो युवाओं को अपने खेल का स्तर बढ़ाते देख मैच को अंत तक ले जाना एक सुखद अनुभव है. इससे हमें चॅंपियन्स ट्रोफी के लिए बहुत आत्मविश्वास मिला है. इनमें काबिलियत है की गेंद की गति और स्विंग का सामना करते हुए आक्रामक क्रिकेट खेल सकें. पिच पूरे दिन चुनौती भरी थी.” – विराट कोहली

केदार जाधव – भारत – रिकॉर्ड्स (Kedar Jadhav Records)

“ये सीरीज़ जीतना इसलिए भी ख़ास है क्योंकि हमने एक ऐसी टीम को हराया जिसके पास शायद फिलहाल एकदिवसीय क्रिकेट में सबसे अच्छा संतुलन है. उनके पास नंबर 10 तक बल्लेबाज़ी करने की क्षमता है, बेहतरीन ऑलराउंडर हैं और अच्छे तेज़ गेंदबाज़ हैं. हमने पारी के 45वें ओवर तक अच्छी गेंदबाज़ी और अंत के पाँच ओवेरो में उनका आक्रमण करना अपेक्षित था. 50 ओवर की समाप्ति पर इंग्लैंड के स्कोर से मैं संतुष्ट था. बल्लेबाज़ी में ज़रूर हम बड़ी साझेदारी कर सकते थे, ख़ास तौर पर मैं और युवराज. शायद खेल का नतीजा कुछ और होता.”

भले ही पूरी सीरीज़ में भारत की मध्य क्रम बल्लेबाज़ी चमकी लेकिन ओपनिंग निराशाजनक रही और केवल – 13, 14 और 13 के स्कोर पर ही विकट गिरे. के एल राहुल ने तीनों मैच खेले और कुल 24 रन बनाए, शिखर धवन ने कलकत्ता मैच में टीम से निकले जाने से पहले दो मैचों में केवल 12 रन बनाए. अजिंक्य रहाणे जिन्होने तीसरे मैच में धवन की जगह ली, दूसरे ही ओवर में एक रन पर बोल्ड हो गए.

हार्दिक पांड्या – भारत – रिकौर्ड़स (Hardik Pandya Records)

चूँकि भारत को चॅंपियन्स ट्रोफी तक और कोई एकदिवसीय मैच नही खेलना है, कोहली ने कहा की वो अपने नियमित ओपनर पर भरोसा करेंगे की वो अच्छा प्रदर्शन करेंगे. उन्हें इस बात की चिंता नही है अगले कई महीनो तक भारत केवल टेस्ट, टी२० और आईपीएल खेलेगा और मानते हैं की खेल का सबसे छोटा प्रारूप उन्हे चॅंपियन्स ट्रोफी के लिए तैयार करने में सहयता देगा.

“हमें जिन जगहों पर दिक्कत है, उनपर ध्यान देंगे. पहले हमें ओपनिंग में कोई समस्या नही थी, लेकिन मध्य क्रम चिंता का विषय था. अब मध्य क्रम स्थिर लग रहा है, और हमारे पास अच्छे ओपनर भी हैं. ऐसा नही है की हमें नये ओपनर ढूँढने की ज़रूरत है. आप को लोगो को फॉर्म में आने के लिए मौके देने होते हैं. मुझे लगता है की यदि हम अपने ओपनेरो पर भरोसा रखें तो इस स्तर पर फॉर्म में वापसी करने के लिए आपको एक दो पारी ही पर्याप्त हैं. एक बार आप लय में आ जाएँ तो चीज़ें अपने आप अनुकूल हो जाती हैं. 2013 कि चॅंपियन्स ट्रोफी में हमने रोहित शर्मा और शिखर धवन की ओपनिंग साझेदारी को क्रांति लाते देखा था. हमने अभी अपनी क्षमता का केवल 70-80% ही खेला है. अगर हम 100% पर आ जाएँ तो मुझे नही मालूम कितने रन बनाएँगे.” – कोहली ने कहा.

“जितना ज़्यादा हम टी२० खेलेंगे उतना अच्छा अंतिम ओवेरो में गेंदबाज़ी करने का अनुभव मिलेगा. जहाँ तक बल्लेबाज़ी का सवाल है तो जिस एक चीज़ पर हमें ध्यान देने की आवश्यकता है वो है बल्लेबाज़ी की तकनीक और टी२० और एकदिवसीय मुकाबलों को हमें केवल टेस्ट मैचों का एक विस्तार समझना चाहिए – लापरवाही से शॉट खेलकर हर बॉल को मारने की ज़रूरत नही है.”

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