पोंटिंग ने सचिन और लारा में से ज़्यादा महान किसे माना? (Ponting compares Sachin and Lara)

Ponting compares Sachin and Lara

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग ने भारत के बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को, सर डॉन ब्रैडमैन के बाद, दुनिया के सबसे सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज का दर्जा दिया हैं। उनका कहना हैं कि “दिग्गज” जैसे शब्द का आँकलन सचिन जैसे खिलाड़ी से ही होना चाहिए।

“मेरे लिए, डॉन ब्रैडमैन के बाद, वो ही सबसे सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं। हालांकि, मैं ब्रायन लारा को भी ऊँचे दर्जे का खिलाड़ी मानता हूँ क्योंकि उनके मैच जीताने की क्षमता अपार थी , लेकिन सचिन से ज्यादा इस खेल में किसी ने कुछ अर्जित नहीं किया हैं।” पोंटिंग ने कुछ इन शब्दों में अपने विचार को “तेंदुलकर इन विस्डन :एन एंथोलॉजी” किताब में व्यक्त किया।

“दुनिया भर में खिलाड़ीयों की तुलना सर्वश्रेष्ठता से की जाती हैं, लेकिन दिग्गज वहीं खिलाड़ी हैं, जो इतने लंबे समय तक सफ़ल रहा हो। सचिन ने 200 टेस्ट मैच, 463 एकदिवसीय( 1 टी-20) मैचों में 34,357 रन बनाए हैं, जिसमे 100 अंतरराष्ट्रीय शतक शामिल हैं- और यह उनकी महानता का सबूत हैं।

युवा खिलाड़ी अच्छी प्रदर्शन के बदौलत 12-18 महीने में शीर्ष पर पहुँच जाते हैं, यह महान नहीं हैं, बल्कि सचिन की तरह ख़ुदको लंबे अरसे तक शीर्ष पर बनाए रखना एक महान खिलाड़ी की पहचान हैं।

रिकी पोंटिंग बनाम हरभजन सिंह

लिट्ल मास्टर की तारीफ़ पोंटिंग ने इन पाँच शब्दों में की- “प्रतियोगी, आवेशपूर्ण, अस्थायी, संतुलित और पूर्ण”
“मेरे दशक के वह सबसे बेहतरीन बल्लेबाज थे , क्योंकि उनके खेल ने बल्लेबाजी को काफी आसान कर दिया था। तकनीकी रूप से बिलकुल अड़िग होने के बावजूद भी वह अपने प्रतिद्वंदी से कभी भी जीत छीन सकते थे। वह एक सम्पूर्ण बल्लेबाज थे।” ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने कहा।

सचिन की लक्ष्य के प्रति भूख ने पोंटिंग को सबसे ज्यादा प्रफुल्लित किया।

सचिन का क्रिकेट के प्रति प्रेम और अपने लक्ष्य को पाने की इच्छा अतुलनीय रही हैं। प्रत्येक दिन, 24 साल तक ख़ुदको फिट रखना औऱ खेल के प्रति भूख बनाये रखना, बिलकुल प्रशंसा के पात्र हैं। उनका विश्व कप जीतने का सपना 2011 , उनके छठे विश्व कप, में पूरा हुआ। “कोई खिलाड़ी 200 टेस्ट मैच खेल पाए और 100 अंतरर्राष्ट्रीय शतक लगाए” पोंटिंग की सोच में यह नामुमकिन हैं।

ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज के अनुसार, सचिन के दशक के बेहतरीन बल्लेबाज़ों ने हमेशा सचिन के द्वारा बनाए गए मानक का पीछा किया हैं। “हम लोगों ने हमेशा उनके आंकड़ों का पीछा किया, लेकिन वह हमेशा सबसे आगे रहते थे। हालांकि, वह उम्र में मुझसे 2 वर्ष बड़े हैं लेकिन उन्होंने यह खेल मेरे बाद तक खेला, बिलकुल मेरे अनुमान के अनुकूल। पोंटिंग की क्रिकेट करियर में सबसे बेहतरीन पल वह रहा जब उन्हें मास्टर के साथ पारी की आग़ाज़ करने का मौका मिला।

“उनसे क्रिकेट की बातें करना और खेल की तरफ़ उनका नज़रिया जानना काफ़ी रोचक होता हैं। मेरा यह सौभाग्य हैं कि मैंने उनकी तैयारी, बिलकुल क़रीब से देखी हैं। चाहे वो बैटिंग की तकनीक को लेकर हो या खेल का कोई उपकरण, उनकी तैयारी औरों से अलग और एक आला दर्जे की रहती हैं।”

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पोंटिंग ने यह भी खुलासा किया कि उनकी ऑस्ट्रेलियाई टीम घंटो ड्रेसिंग रूम में तेंदुलकर के लिए योजना बनाती थी।
“कैसे हम उन्हें गेंदबाजी करेंगे और किस्मत का कोई मदद मिलेगी या नहीं? क्रिकेट का ज्ञान और अपनी बैटिंग की समझ के अलावा वह मानसिक तौर पे भी बड़े ही स्थिर खिलाड़ी थे।”

पोंटिंग ने सचिन के साथ हुए एक वाकया याद करते हुए बताया ” सिडनी टेस्ट 2003-04 में, फॉर्म और टाइमिंग से जूझने के कारण उन्होंने उस पारी में अपने खेल का महत्वपूर्ण स्ट्रोक-कवर ड्राइव ही हटा दिया था। मैं इस मानसिक नियंत्रण और अनुशाशन की काफी इज़्ज़त करता हूँ। किसी सोच के साथ बल्लेबाजी करना एक चीज़ हैं, और उसे अपने खेल में ढालना दूसरी। उन्होंने इस सोच को 436 गेंद एवं 10 घंटे से ज्यादा चली 241 रनों की पारी में ढाल लिया था और आखिर तक वो नाबाद रहे थे।”

पोंटिंग ने तेंदुलकर को काफी शांत और स्थिर इंसान बताया- मैदान में और खेल से बाहर भी।” वह हमेशा ही शांत एवं स्थिर खिलाड़ी रहे हैं, जिसने अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रखा हैं। खेल के बाहर भी वह वैसे ही इंसान हैं- शांत और स्थिर। लेकिन ड्रेसिंग रूम में वो बेचैन हो जाते थे। मुझे उन्हें देखने में बहुत मजा आता था, खेल से पहले उनके अपने तरीके और वहम होते थे”- पोंटिंग बोले, जिहोंने 77 टेस्ट मैच और 247 एकदिवसीय मैचों में ऑस्ट्रलियाई टीम की अगुवाई थी।

आईपीएल का शुक्रिया करते हुए पोंटिंग ने कहा, इस प्रतियोगिता की वजह से वह तेंदुलकर को व्यक्तिगत रूप से जान पाए।

“पिछले दो वर्षों में, जबसे मैंने मुम्बई इंडियंस के हेड कोच का दायित्व लिया हैं, मैं सचिन को और बेहतर तरीके से जान पाया हूँ….. वह एक अलग ही अनुभव था- मीडिया और कैमरे से दूर होकर उनको व्यग्तिगत रूप से जानना। और यह एक ऐसा अनुभव हैं जिसकी वजह से हम दोनों एक दूसरे को और अच्छे तरीक़े से समझ पाए हैं, और अन्तः हमारी एक दूसरे के लिए इज़्ज़त और सम्मान बढ़ गया हैं।” पोंटिंग बोले। सचिन की तारीफ करते हुए पोंटिंग ने कहा कि वह करोड़ो की उम्मीदों पे हमेशा खरे उतरते आये हैं, जो काफ़ी सराहनीय हैं।

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