रिकी पोंटिंग बनाम हरभजन सिंह

Ricky Ponting vs Harbhajan Singh in Hindi

आइये हम विश्व क्रिकेट में सबसे कट्टर प्रतिद्वंद्वियों में से एक की ओर देखते हैं.

भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया मैच हमेशा अपने साथ रोमांच का बोनस लाता रहा है। इन दोनों टीमों की प्रतियोगिता हमेशा शानदार होती है। विशेष रूप से नई सदी की शुरुआत से इन दोनों प्रतिस्पर्धियों ने कुछ यादगार क्रिकेट लम्हों का निर्माण किया और हर मुठभेड़ के साथ विवादों की एक ताजा लहर भी सामने आई।

पर दोनों टीमों की तरफ से सबसे आगे एक तरफ एक जोरदार, उच्छृंखल ऑफ स्पिनर और दूसरी तरफ इस पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक थे। हरभजन सिंह और रिकी पोंटिंग हमेशा एक दूसरे से क्रिकेट के मैदान में लोहा लेते आये हैं और अक्सर पंजाब के स्पिनर ही विजयी साबित हुए हैं।

दोनों ने अपनी प्रतिद्वंदिता से हमें (क्रिकेट प्रशंसकों) उस समय रोमांचित किया है जब भारत धीरे-धीरे शीर्ष क्रिकेटिंग देशों में से एक के रूप में खुद को स्थापित कर रहा था। यहां हम क्रिकेट पिच पर उनके अविस्मरणीय दंगल पर नजर डालते हैं।

# 1 आमना सामना

यह सब 1998 में शुरू हुआ, जब भारत ने शारजाह में एकदिवसीय मैच में ऑस्ट्रेलिया का सामना किया था। हरभजन उस समय केवल 17 वर्ष के थे और अपने चौथे एकदिवसीय मैच में ही खेल रहे थे। रिकी पोंटिंग गेंद को खेलने के चक्कर में ट्रैक पर आगे बढ़ गए और पूरी तरह से गेंद की लाइन को मिस कर गए। नयन मोंगिया ने कोई गलती नहीं की और उन्होंने गिल्लियां बिखेर दीं। हरभजन जश्न मनाते हुए विकेट की ओर आगे बढ़े और अपने विरोधी की ओर चिल्लाकर इशारे से उन्हें पविलियन का रास्ता दिखाया।

हालांकि मोंगिया ने स्पिनर को वापस खींच लिया। पोंटिंग ने भी ड्रेसिंग रूम में जाने से पहले कुछ कड़े शब्दों से हरभजन को मुंहतोड़ जवाब दिया। इससे दोनों के बीच उस प्रतिद्वंद्विता की शुरुआत हुई जो एक दशक से अधिक समय तक क्रिकेट प्रशंसकों को रोमांचित करती रही। दोनों ने एक-दूसरे का सामना 47 बार किया – टेस्ट मैचों में 14 बार और 50 ओवर के मैचों में 33 बार।

Ricky Ponting vs Harbhajan Singh 1
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# 2 पोंटिंग को बार बार आउट करते रहे हरभजन

पोंटिंग और हरभजन के बीच की प्रतियोगिता तो हमेशा से ही थी, लेकिन कुछ अजीब कारणों से इसमें भारतीय खिलाड़ी का ही वर्चस्व कायम रहा था। यह ऑफ-स्पिनर की कलात्मकता कही जाय या कोई मानसिक बढ़त कि पोंटिंग कभी भी हरभजन के खिलाफ पकड़ नहीं बना पाए। 14 टेस्ट मैचों में दोनों एक-दूसरे के सामने आये और हरभजन ने पोंटिंग को 10 मौकों पर आउट किया। इसमें से तीन बार तो उन्होंने पोंटिंग को शून्य पर आउट कर दिया। किसी भी गेंदबाज ने ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान के सामने इससे बेहतर प्रदर्शन नहीं किया है।

विशेषकर 2001 की बॉर्डर-गावस्कर श्रृंखला में (हरभजन ने उस श्रृंखला में 32 विकेट लिए थे), हरभजन ने पांच बार दाएं हाथ के बल्लेबाज को आउट कर दिया। उन पांच पारियों में पोंटिंग का सर्वाधिक स्कोर केवल 11 रन ही था और उन्होंने पूरी श्रृंखला में केवल 17 रन ही बनाये! यह ध्यान रखना दिलचस्प है कि हरभजन का 300 वां टेस्ट शिकार उनके पसंदीदा रिकी पोंटिंग ही थे। ओडीआई में हालाँकि हरभजन ने पोंटिंग का विकेट 33 मुकाबलों में केवल तीन बार ही लिया।

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Ricky Ponting vs Harbhajan Singh 2
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# 3 हरभजन के खिलाफ पोंटिंग ने कितने रन बनाए

कई बार पोंटिंग हरभजन की गेंदबाजी के शिकार हो चुके हैं और ऐसा लगता है कि यह ऑस्ट्रेलियाई, स्पिनरों के खिलाफ सामान्य रूप से सहज नहीं होगा। हालांकि इसके विपरीत, विश्व कप जीतने वाले कप्तान दाएं हाथ के स्पिनरों के खिलाफ काफी कुशल थे। वास्तव में मुथैया मुरलीधरन के खिलाफ, जो कि महानतम ऑफ स्पिनरों में से एक हैं, पोंटिंग ने टेस्ट मैचों में 61.00 का अविश्वसनीय औसत दर्ज किया है। पोंटिंग का टेस्ट में दाएं हाथ के ऑफ स्पिनरों के खिलाफ औसत 57.60 का था। स्पिन के खिलाफ उनका समग्र औसत 55.41 का था। लेकिन जब हरभजन की बात आती है, तब महान ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ हमेशा लड़खड़ाते हुए नज़र आते थे।

हरभजन की मौजूदगी वाली भारतीय टीम के खिलाफ उनका टेस्ट बल्लेबाजी औसत 51.85 से गिरकर 22.30 पर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी 10 पारियों में केवल एक शतक ही बना पाए और कुल 223 रन बनाये। ओडीआई में हालांकि उन्होंने हरभजन की गेंदों पर 35.00 की औसत से थोड़ा बेहतर प्रदर्शन किया।

Ricky Ponting vs Harbhajan Singh 3
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# 4 यादगार मुकाबले

यादगार मुकाबलों के बारे में अगर बात की जाय, तो पोंटिंग और हरभजन के बीच ऐसे बहुत सारे वाकये हैं। शारजाह के साथ साथ सिडनी का कुख्यात मंकी-गेट कांड भी किसी से छुपा नहीं है। लेकिन हर क्रिकेट प्रेमी के दिमाग में जो मैच हमेशा रहेगा, वो 2001 में ईडन गार्डंस में खेला गया टेस्ट मैच था। हरभजन की पहली पारी में हेट-ट्रिक के बावजूद (उन्होंने कुल मिलाकर सात विकेट लिए थे) ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 445 रन बनाये। जवाब में भारतीयों ने केवल 171 रन बनाए और उन्हें फॉलो ऑन खेलने पर मजबूर होना पड़ा। तब राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के बीच मशहूर साझेदारी हुई। जब भारत ने पांचवें दिन सुबह पारी घोषित की, तब उन्हें 383 की बढ़त मिल चुकी थी और ऑस्ट्रेलिया को सिर्फ दो सत्रों में ही बल्लेबाजी करनी थी। लेकिन हरभजन सिंह की दूसरी ही योजना थी। उन्होंने दूसरी पारी में छह विकेट लिए और भारत को एक अविश्वसनीय जीत दिलाने में मदद की।

इसके अलावा जोहान्सबर्ग में दोनों देशों के बीच 2003 विश्वकप का फाइनल खेला गया था जिसमें पोंटिंग ने 140 रन बनाए। उन्होंने पूरी तरह से भारतीय गेंदबाजी लाइन-अप को तबाह कर दिया। हरभजन ने अपने 8 ओवरों में 49 रन दिए और दो विकेट लिए। हालांकि, भारत 360 रनों के विशालकाय लक्ष्य का पीछा नहीं कर पाया और ऑस्ट्रेलिया ने खिताब जीत लिया।

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# 5 टिप्पणियां

प्रतिद्वंद्विता के वर्षों के बाद अंत में दोनों के संबंधों में परिवर्तन देखने को मिला। यद्यपि वे अपने खेल के दौरान हमेशा विवादों में रहते थे, लेकिन हरभजन और पोंटिंग दोनों एक-दूसरे का बेहद सम्मान करते थे, जहां तक ​​क्रिकेट का संबंध था।

हरभजन ने 2012 में पोंटिंग की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “जिन शीर्ष पांच टेस्ट बल्लेबाजों के खिलाफ मैं खेला, उनमें पोंटिंग भी शामिल हैं। वह एक ऐसे क्रिकेटर थे जो अपने दम पर मैच जीता सकते थे। अपने पूरे करियर में उन्होंने हमें कभी निराश नहीं किया। फील्ड में भी उनकी ऊर्जा देखने लायक होती थी और इस वजह से ही उन्हें एक कप्तान के रूप में इतना सम्मान और प्यार मिला।”

“मैं और रिकी कभी अच्छे दोस्त तो नहीं थे, लेकिन मेरे दिल में उनके लिए बहुत सम्मान है क्योंकि उन्होंने क्रिकेट के लिए बहुत कुछ किया है।”

2016 में अपने विरोधी के बारे में बोलते हुए पोंटिंग ने स्वीकार किया था कि वह हरभजन के बारे में अब तक बुरे सपने देख रहे थे।

पोंटिंग ने कहा, “जब मैं भारत के खिलाफ खेलता था, तब हरभजन सिंह ही मुझे सबसे ज़्यादा परेशान करते थे। मैं अभी भी उनके बारे में बुरे सपने देखता हूं।”

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