तस्वीरों में देखें 1992-2008 तक सौरव गांगुली का दादागीरी भरा सफर

Sourav Ganguly - Career in Pictures - 1992 to 2008,

यदि किसी व्यक्ति को भारतीय टीम का योद्धा भी कहा जाए और रक्षक भी, तो वह सौरव गांगुली हैं। गांगुली न सिर्फ अपने समय के दिग्गज खिलाड़ी रहे हैं बल्कि सन्यास लेने के बाद भी वह भारतीय क्रिकेट की प्रशासनिक देख रेख में हैं।

उनकी साहसिक कप्तानी के कारण भारतीय टीम मैच फिक्सिंग के काले धब्बे को हटा कर एक नए रूप में विश्व क्रिकेट में उभरी। वह एक दिग्गज बल्लेबाज़ और मैदान पर साहसिक निर्णय लेने वाले खिलाड़ी थे। उन्होंने सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वी वी इस लक्ष्मण और अनिल कुंबले के साथ भारतीय क्रिकेट की ड्रीम टीम बनाई। उन्होंने एक ऐसी टीम तैयार की जो कुशलता, साहस और उत्साह से परिपूर्ण थी। इन चार खिलाड़ियों ने दादा की कप्तानी में भविष्य की भारतीय टीम की नींव रखी।

आइये देखते हैं तस्वीरों में उनका सफर:

गांगुली 1991-92 रणजी ट्रॉफी में सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज़ों में से एक थे। उन्हें 1992 में पहली बार एकदिवसीय मैच के लिए चयनित किया गया। उन्होंने वेस्ट इंडीज के खिलाफ पदार्पण किया लेकिन पहले मैच में केवल 3 रन बना सके। समीक्षकों ने उनके व्यवहार को खराब बताते हुए इस मैच के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया।

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Ganguly made his international debut at the age of 20
Ganguly made his international debut at the age of 20

इसके बाद वह घरेलू क्रिकेट में खेलने लगे और सभी श्रृंखलाओं में जम कर रन बनाए। अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर 1996 में इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टीम में उन्होंने जगह बनाई। टेस्ट टीम में उन्हें नवजोत सिंह सिद्धू की जगह चयनित किया गया।



गांगुली और राहुल द्रविड़ दोनों ने एक ही मैच से एक साथ पदार्पण किया और पहले ही मैच में दोनों ने अपना लोहा मनवाया। लॉर्ड्स के मैदान पर खेले गए इस मैच में द्रविड़ 95 रन पर आउट हो गए लेकिन गांगुली ने 131 रनों की बेजोड़ पारी खेली। इसके अगले ही मैच में ट्रेंट ब्रिज में उन्होंने 148 रनों की पारी खेल विश्व क्रिकेट में अपना बिगुल बजाया।

Ganguly was stunning on his Test debut, scoring a magnificent hundred at Lord’s
Ganguly was stunning on his Test debut, scoring a magnificent hundred at Lord’s

आई सी सी विश्व कप 1999 में इन दोनों युवा खिलाड़ियों की असली प्रतिभा देखने को मिली। पूरे टूर्नामेंट में दोनों शानदार फॉर्म में रहे। श्रीलंका के खिलाफ एक मैच में दोनों ने 318 रनों की साझेदारी की जिसमे गांगुली ने 157 गेंदों पर 17 चौकों और 7 छक्कों की मदद से 183 रन बनाए।

Ganguly scored 183 at one end, Dravid scored 145 at the other
Ganguly scored 183 at one end, Dravid scored 145 at the other

20 वीं शताब्दी के अंत में मैच फिक्सिंग प्रकरण के बाद गांगुली को कप्तान नियुक्त किया गया। इस निराशाजनक घटना के बाद एक युवा खिलाड़ी द्वारा कप्तानी का दायित्व संभालना बेहद साहसिक निर्णय था लेकिन उन्होंने यह दायित्व आत्मविश्वास और कुशलता के दम पर संभाला।

कप्तान नियुक्त होने के तुरंत बाद ही उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एकदिवसीय श्रृंखला में जीत दिलाई। कप्तान के रूप में उनकी बड़ी उपलब्धियों में से एक बॉर्डर – गावस्कर ट्रॉफी में देखने को मिली जिसमें भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से पराजित किया।

Ganguly with the trophy at the M Chidambaram Stadium in Chennai
Ganguly with the trophy at the M Chidambaram Stadium in Chennai

कप्तान के रूप में 2003-04 का दौर गांगुली के लिए अद्वितीय रहा। 2003 विश्व कप में उनकी कप्तानी में भारतीय टीम फाइनल तक पहुंची।



इसके बाद भारतीय टीम, ऑस्ट्रेलिया के यादगार दौरे पर गई जहाँ ऑस्ट्रेलिया में भारतीय टीम ने पहली बार टेस्ट मैच में जीत दर्ज की। गांगुली की कप्तानी पूरे दौरे पर शानदार रही और यह श्रृंखला 1-1 से बराबर रही। गांगुली का व्यक्तिगत प्रदर्शन भी शानदार रहा। उन्होंने 47 के औसत से रन बनाए जिसमे एक शतक और एक अर्धशतक शामिल था।

इसके बाद भारतीय टीम पाकिस्तान दौरे पर गई जहाँ एक बेहद नाटकीय टेस्ट मैच देखने को मिला। दोनों टीमें 2 टेस्ट मैच जीत चुकी थीं और अंतिम टेस्ट में भारत ने रोमांचक जीत दर्ज की। हालाँकि इस श्रृंखला में गांगुली सिर्फ एक टेस्ट मैच खेल सके और चोट के चलते अन्य टेस्ट मैच नहीं खेल सके।

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Ganguly’s men had a scintillating World Cup campaign before they were outplayed by Australia in the final
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इसके बाद अगले दो वर्ष गांगुली के लिए बेहद कठिन रहे। कोच ग्रेग चैपल से उनका सार्वजनिक विवाद तूल पकड़ता गया और इसका खामियाजा उन्हें कप्तानी छोड़ कर और भारतीय टीम से बाहर हो कर भुगतना पड़ा।

The tussle between the captain and the coach affected the dynamics of the entire team
The tussle between the captain and the coach affected the dynamics of the entire team

लेकिन इसके बाद भी दादा ने हार नहीं मानी और दोबारा टेस्ट और एकदिवसीय टीम में वापसी की। उनकी वापसी भारतीय क्रिकेट की बड़ी वापसियों में से एक मानी जाती है। 2007 में उनका प्रदर्शन लाजवाब रहा जिसमें उन्होंने टेस्ट और एकदिवसीय दोनों प्रारुपों में 1000 रन बनाए।



उस वर्ष टेस्ट मैचों में उनका औसत 61.44 रहा जिसमे उन्होंने तीन शतक और चार अर्धशतक लगाए। उनमें से एक शतक पाकिस्तान के खिलाफ दोहरा शतक था। उस वर्ष वह एकदिवसीय मैचों में सर्वाधिक रन बनाने वाले पांचवें बल्लेबाज़ रहे। उस वर्ष एकदिवसीय मैचों में उनका औसत 44.28 रहा।

The left-hander scored a thumping 239 against arch-rivals Pakistan
The left-hander scored a thumping 239 against arch-rivals Pakistan

2008 में भारत- ऑस्ट्रेलिया श्रृंखला के दौरान उन्होंने सन्यास की घोषणा की। श्रृंखला के चौथे टेस्ट मैच में महेंद्र सिंह धोनी ने उन्हें विशेष श्रद्धांजलि देते हुए मैच के अंतिम क्षणों में टीम का कप्तान नियुक्त कर दिया।

Dada’s retirement was an emotional affair for every Indian cricket follower
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सौरव गांगुली आज भी भारतीय क्रिकेट की सेवा में लगे हैं और साथ ही साथ भारत में अन्य खेलों को भी प्रोत्साहन दे रहे हैं। वर्तमान में वह क्रिकेट सलाहकार समिति का अंग हैं जिसने भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच को नियुक्त किया।

Ganguly continues to serve Indian cricket post his retirement
Ganguly continues to serve Indian cricket post his retirement

Source: Sourav Ganguly over the years: The journey full of Dadagiri from 1992-2008 in pictures

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Sourav Ganguly - Career in Pictures - 1992 to 2008 | CricketinHindi.com
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