भारतीय टीम का कोच बनने की प्रबल इच्छा थी: गांगुली

Sourav Ganguly reveals he was desperate to coach India

पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने कहा कि वह राष्ट्रीय कोच बनने के इच्छुक थे लेकिन सिर्फ एक प्रशासनिक अधिकारी ही बन सके।
उन्होंने कहा “जिस चीज़ को आप कर सकते हैं, वह आपको करना चाहिए और परिणाम की चिंता नहीं करनी चाहिए। आप नही जानते कि जीवन आपको किस मोड़ पर ले जाएगा। जब सचिन कप्तान थे तो मैं उपकप्तान भी नही था लेकिन 3 महीने में ही मैं कप्तान बन गया।”

“जब मैं प्रशासन में आया तो मुझ मे राष्ट्रीय कोच बनने की इच्छा जागृत हुई। डालमिया ने मुझे फोन किया और कहा कि तुम कोच बनने के लिए आवेदन क्यों नहीं करते। उनका देहांत हो गया और उस समय उनका स्थान लेने वाला कोई नहीं था और तब मैं क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल का अध्यक्ष बन गया। अध्यक्ष बनने के लिए लोगों को 20 वर्ष लग जाते हैं।”

तस्वीरों में देखें 1992-2008 तक सौरव गांगुली का दादागीरी भरा सफर

उन्होंने कोच ग्रेग चैपल के साथ विवाद पर भी चर्चा की।

भारत के सफलतम कप्तानों में से एक सौरव गांगुली को 2006 में टीम से बाहर कर दिया गया लेकिन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जोहान्सबर्ग में खेले गए टेस्ट मैच में उन्होंने वापसी की और नाबाद 51 रन बनाए।

2007 में पाकिस्तान के खिलाफ घरेलू श्रृंखला में उन्होंने एक शतक और एक दोहरा शतक लगाया। नवम्बर 2008 में नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच खेलने के बाद उन्होंने सन्यास ले लिया।



उन्होंने बताया “जब मैंने 2008 में सन्यास की घोषणा की तो सचिन मेरे पास आए और मुझ से इस निर्णय लेने के पीछे की वजह पूछी। मैंने कहा क्योंकि अब मैं और नही खेलना चाहता। इस पर उन्होंने कहा पिछले तीन साल तुम्हारे लिए बहुत अच्छे रहे हैं और इस फॉर्म के साथ खेलने का यह सर्वश्रेष्ठ समय है।”

“मैंने सन्यास लिया क्योंकि उस समय तक मैं बहुत खेल चुका था। इसकी वजह यह नही थी कि मैं खेल से थक गया था बल्कि वजह यह थी कि मैं बहुत बार चयनित हो चुका था। उन दिनों मैंने सोचा कि व्यक्तिगत खेल एक टीम के ऊपर निर्भर रह कर खेलने से बेहतर है।”

गांगुली ने कहा कि टीम के ऊपर निर्भर रहने में यह खराबी है कि आप किसी दूसरे के द्वारा चयनित किए जाते हैं और अच्छा खेलने के बावजूद टीम में बने रहने की कोई गारंटी नही होती।

भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच भरत अरुण के बारे में 11 तथ्य

उन्होंने कहा “मैं हमेशा लिएंडर पेस का उदाहरण देता हूँ। वह इस प्रकार से खेलते हैं क्योंकि वह खुद पर निर्भर हैं। इसके विपरीत अगर आप नीचे गिर जाते हैं तो वापस आना मुश्किल होता है। टीम से बाहर होना और वापसी करना हर खेल का भाग है। महान खिलाड़ी जैसे डिएगो मैराडोना और राहुल द्रविड़ और खेल सकते थे लेकिन उन्होंने दूसरे खिलाड़ी के लिए जगह बनाई।”

उन्होंने बताया कि चैपल के साथ विवाद के बाद उन्होंने काफी कुछ सीखा और एक बेहतर इंसान बने। उन्होंने कहा “1995 से 2006 तक मेरा ग्राफ ऊपर ही था। मैंने कोई श्रृंखला नही छोड़ी और 6 साल तक भारत का कप्तान रहा। 2006 तक दुनिया मेरे कदमों में थी।”

“विश्व मे शायद ही कोई ऐसा कप्तान होगा जिसकी कप्तानी के अलावा टीम से स्थान भी चला गया हो।”

उन्होंने विराट कोहली का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे वह पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का सम्मान करते हैं।

उन्होंने कहा “आप धोनी को देखिए वह कप्तान नहीं हैं लेकिन कोहली को देखिए वह किस तरह उनका सम्मान करते हैं और एक दूसरे के साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं।”

Source: Was desperate to become national coach: Ganguly

Summary
Review Date
Reviewed Item
Sourav Ganguly reveals he was desperate to coach India
Author Rating
51star1star1star1star1star

Leave a Response

share on: