वृद्धिमान साहा के पिता ने उनके लिए क्या कहा?

Wriddhiman Saha father interview in Hindi

सिलीगुड़ी में एक छोटी सी बस्ती शक्तिनगर के चार सूत्री क्रासिंग के पास दो मंजिला इमारत शायद ही अपने पड़ोस से
अलग दिखता है। एक बार दीवानखाने के अंदर कदम रखने पर एक ट्रॉफी से लदी अलमारी और एक बल्लेबाज की गाले स्टैंड
में जश्‍न मनाने की तस्वीर नजर आती है। इसके अलावा, सिलीगुड़ी में रिद्धिमान साहा के घर साधारणता साफ झलकती है।

“यह सिर्फ शुरुआत है, उसे अभी कई और बाधाओं को पार करना पड़ेगा,” प्रशांत साहा ने अपने सबसे छोटे बेटे के बारे
में कहा, जो वर्तमान में भारतीय टीम के टेस्ट विकेटकीपर है।

2015 के गाले टेस्ट मैच में रिद्धिमान साहा का पहला टेस्ट अर्धशतक (60) भारत को हारने से रोकने के लिए पर्याप्त नहीं था ,
लेकिन ऐसे साहसी प्रदर्शन की बदौलत इस बंगाल विकेटकीपर बल्लेबाज ने घोषणा की कि वह महेंद्र सिंह धोनी की जगह भरने
के लिए तैयार है।

जैसे जैसे रिद्धिमान के पिताजी पुरानी यादें ताज़ा करते गये, कोई भी उनका रिद्धिमान के करियर पर जो प्रभाव पड़ा उसको अनदेखा
नही कर सकता।

प्रशांत, जो 2014 में एक पश्चिम बंगाल राज्य विद्युत बोर्ड कर्मचारी के रूप में सेवानिवृत्त हुए, वे 1970 के दशक में स्थानीय भगाजतिन
क्लब के लिए गोलकीपर के रूप में और अग्रगामी क्लब के लिए विकेटकीपर के रूप में खेले।

सैलेन मन्ना एक बार जब अपनी मोहन बागान टीम को सिलीगुड़ी में एक स्थानीय टूर्नामेंट के लिए ले गया, तब यह दिग्गज फुटबॉलर प्रशांत
के प्रदर्शन से इतने प्रभावित हुए कि उन्होने उसे हरे और मरुन मैदान पर एक परीक्षण की पेशकश की।

“मैं परिवार के कारणों की वजह से कोलकाता नहीं जा सकता,” 62 वर्षीय प्रशांत ने कहा।

किशोरी, उपनाम पापनी, अपने पिता के ही साथ जाता था जब भी उसके पिता मैच खेलने जाते थे, चाहे वह क्रिकेट हो या फुटबॉल हो।

समय के साथ, प्रशांत ने महसूस किया कि उनका सबसे छोटा बेटा ही उनके अधूरे सपनों को प्राप्त कर सकता है।

“शुरू में वह (रिद्धिमान) मेरी तरह एक गोलकीपर बनना चाहता था। लेकिन 1990 के दशक में जब सिलीगुड़ी में एक क्षेत्रीय क्रिकेट
कोचिंग कैंप आयोजित किया गया, हमने उसे वहाँ भर्ती कराया। उस समय वह सिर्फ 13 वर्ष का था और बहुत जल्द ही उसे
क्रिकेट से लगाव हो गया, “प्रशांत ने स्मरण किया।

क्रिकेट में रिद्धिमान की शुरुआत एक तेज गेंदबाज-सह-विस्फोटक बल्लेबाज के रूप में हुई। परन्तु जब कोचिंग शिविर में विकेटकीपर
मौजूद नही हुआ, तब उसके पिता ने उसे दस्ताने पहनने को कहा।

“शुरू में वह अपनी नई भूमिका को लेकर संकोच में था, लेकिन फ़िर मैने उसे किसी भी काम को नियंत्रण मे लाने के कुछ सुझाव दिए।
गुणवत्ता जो उसमे अपने युवा दिनों में भी थी वह थी ध्यान और दृढ़ संकल्प जब भी उसे एक नई चुनौती का सामना करना पड़ता था।

एक छोटे से शहर से भारत के सबसे पुरस्कृत खेल टीम के लिए स्नातक होने का सफ़र आसान नहीं था। भाग्य ने अपनी भूमिका निभाई
हैं, लेकिन उसकी कड़ी मेहनत ने भी इस मुकाम को उसके हिस्से में डालने सहायता की।

दीप दासगुप्ता के इंडियन क्रिकेट लीग में शामिल होने के निर्णय ने साहा के लिए बंगाल रणजी ट्रॉफी टीम में भाग लेने का रास्ता
बनाया और कैरियर की शुरुआत करते हुए एक शतक ने आईपीएल 2008 के उद्घाटन मैच में कोलकाता नाइट राइडर्स में शामिल
होने के दरवाजे खोल दिए।

उनके भाग्य से जब वीवीएस लक्ष्मण और रोहित शर्मा समय पर चोट से उबरने मे असमर्थ रहे तब उन्हे 2010 में भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका
नागपुर टेस्ट के लिए एक विशेषज्ञ बल्लेबाज के रूप में चुना गया।

प्रशांत, हालांकि, जोर देते रहे कि यह उसका ध्यान केंद्रित कर पाना और अपने कार्य को पूर्ण करने का बेहिचक संकल्प है जिसने उसे उसकी
बाधाओं पर काबू पाने में सहायता की।

फॉर्मूला वन के शौकीन, रिद्धिमान प्लेस्टेशन पर इसे खेला करते है। “वह एक कार रेसिंग ड्राइवर बन गया होता अगर उसका भारतीय
क्रिकेट टीम के लिए चयन नहीं होता,” प्रशांत ने मुस्कुराते हुए कहा।

रिद्धिमान के बड़े भाई अनिर्बान मुंबई में एक संगीत निर्माता है।

“मैं अपने दोनो बेटों की उपलब्धियो से काफी खुश हूँ,” गौरवान्वित 62 वर्षीय प्रशांत ने कहा।

क्या आपकी कोई अधूरी इच्छा है? “हाँ,” प्रशांत ने जल्द जवाब दिया।”मैंने अभी तक स्टैंडस से रिद्धिमान को टेस्ट मैच में खेलते हुए नही देखा।
उम्मीद है कि यह जल्द ही होगा,” इस तरह उन्होंने इस बातचीत की समाप्ति की।

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