क्रिकेट प्रेमियों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा पाकिस्तान, बदलाव ज़रूरी – इंज़माम (Inzamam says Pakistan cricket poor standard)

Inzamam says Pakistan cricket poor standard

टीम के मुख्य चयनकर्ता इंज़माम उल हक बात कर रहे हैं देश के क्रिकेट तंत्र में मौजूद ख़ामियों की और क्या बदलाव आएंगे अगर सारे प्रारूपो में एक ही कप्तान हो

◆ पाकिस्तान टीम के मुख्य चयनकर्ता के रूप में अब तक आपका कैसा अनुभव रहा है ?

● खिलाड़ियों का चयन एक मुश्किल काम है, लेकिन यह अपने आप में दिलचस्प भी है। जब अफगानिस्तान टीम की कोचिंग को छोड़ कर मैं आया था, तो मैंने सोच लिया था कि अपने देश के लिए फिर से कुछ अच्छा करने का यह एक शानदार मौका है। 15 से अधिक वर्षों तक के लिए प्रतिनिधित्व करने के बाद फिर से देश की सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात है। मैंने पद सँभालने से पहले वकार [यूनुस], मुशी [मुश्ताक अहमद] और कई अन्य खिलाड़ियों से बात की और मुझे एहसास हुआ की यह वास्तव में एक चुनौती भरा काम है। हम वनडे रैंकिंग्स में नौवें पायदान पर थे, आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में बने रहने की तलवार हमारे ऊपर लटक रही थी, तो और भी बहुत सारी बातों को हल किया जाना बाकी था।

यह कठिन काम है, क्योंकि लोगों को परिणाम की तुरंत उम्मीद रहती है, जो की संभव नहीं है। जब मैंने कार्यभार संभाला, तब मुझे गहराई से सोचने के लिए बहुत समय नहीं मिला। इंग्लैंड श्रृंखला के बाद हम वेस्टइंडीज, तो न्यूजीलैंड, फिर ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए चले गये। और साथ साथ हमारा घरेलू सत्र भी चल रहा है। मुझे ध्यान केंद्रित करने और आसपास चल रही चीज़ों पर गौर फरमाने का पर्याप्त वक़्त नहीं मिला, लेकिन फिर भी हम एक उपयुक्त टीम संयोजन का निर्माण शुरू करने में कामयाब रहे, और चीज़ों को व्यवस्थित करने के लिए वक़्त की जरूरत तो होती ही है। लोगों को पता होना चाहिए कि यह एक प्रक्रिया है और उन्हें धीरज के साथ परिणामो की प्रतीक्षा करनी चाहिए।

◆एक खिलाड़ी के रूप में वर्तमान प्रतिभा पूल कैसे आपके युग से अलग है?

वर्तमान में क्रिकेट हमारे समय से काफी अलग हो गया है। टी -20 ने क्रन्तिकारी रूप से क्रिकेट में काफी बदलाव लाये हैं और हर प्रारूप में खिलाड़ियो का दृष्टिकोण बदल गया है। अगर आप 2000 के दशक के खिलाड़ियो को देखें, तो तकनीक एक खिलाड़ी की प्रतिभा को तय करने का अहम् पैमाना हुआ करता था। लेकिन आजकल हमारी नज़र उनपे टिक जाती है जिनका स्ट्राइक रेट बेहतर है । दस साल पहले एक दिन में 3 विकेट पर 230 रन एक अच्छा स्कोर माना जाता था और सभी आपके प्रदर्शन से संतुष्ट होते थे, लेकिन अब नहीं। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में ऑस्ट्रेलिया ने 4 से अधिक की दर से रन बनाए, और हमने 2.5 से 3 की दर से, जो की स्वीकार्य नहीं है। यह एक बड़ा अंतर माना जाने लगा है। हमारे समय में 250-260 एक सम्मानजनक स्कोर हुआ करता था लेकिन इन दिनों 325 रन का स्कोर भी बचाव करने के लिए सुरक्षित नहीं हैं।

◆ क्या आप यह कहेंगे कि घरेलू क्रिकेट से आने वाले खिलाड़ी अविकसित और अपरिपक्व होते हैं?

● हाँ। मैं नहीं मानता कि किसी भी खिलाड़ी को जिसने एक प्रथम श्रेणी मैच में अच्छा स्कोर बना लिया है, उसे सीधे राष्ट्रीय टीम में चुन लिया जाना चाहिए। अगर वह दो से तीन सत्रों में लगातार अच्छा प्रदर्शन करता है तभी उसे चुनने के योग्य माना जा सकता है। मैं फिर से अपने समय में वापस जा के एक उदाहरण देना चाहूँगा। एक समय था जब खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम में जगह देकर शीर्ष स्तर के लिए तैयार किया जाता था। अभी चीज़ें काफी तेज़ी से बदल रही हैं और आपके पास उतने मौके नहीं हैं, आपको मौके भुनाने के लिए तैयार रहना होगा अन्यथा आप मुश्किल में पड़ सकते हैं।
आपसे उम्मीद की जाती है की आप घरेलू क्रिकेट से सब कुछ सीख कर आये होंगे। आपको हर मैच गंभीरता से खेलने की जरुरत है, हर गुजरते खेल के साथ अपनी क्षमता बढ़ाने की जरुरत है, अन्यथा आपके लिए टीम में जगह बनाये रख पाना मुश्किल हो जायेगा।

इंज़माम-उल-हक़ – पाकिस्तान – रिकौर्ड़स

◆ क्या आपको लगता है कि यहाँ आप पर अतिरिक्त दबाव है, क्योंकि कोच मिकी आर्थर शायद ही पाकिस्तान आते हैं या पाकिस्तान के घरेलू क्रिकेट पर ध्यान देते हैं?

● हम जानते हैं कि जब हम कोच के रूप में एक विदेशी को चुनते हैं, तो उसे देश की संस्कृति और देश के नियमों को समझने के लिए कुछ समय देने की जरूरत है। इसलिए हमें उन्हें कुछ समय देना चाहिए। उन्होंने पीएसएल में कराची किंग्स के साथ कुछ समय बिताया है, तो उन्हें प्रतिभा की एक झलक मिल गयी है। लेकिन जब तक वह पाकिस्तान के लिए नहीं आते हैं, वह हमारी प्रतिभा पूल की एक व्यापक तस्वीर प्राप्त करने में सक्षम नहीं हो पाएंगे, और खिलाड़ियों के साथ सामंजस्य बिठा पाना उनके लिए मुश्किल होगा। पीएसएल के अलावा भी उन्हें चीज़ों को व्यवस्थित रखने के लिए मौजूद रहना होगा।
“हम एक भी कप्तान खोजने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं, लेकिन फिर भी हम तीन अलग-अलग प्रारूपों के लिए तीन कप्तानों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। क्या यह हास्यास्पद नहीं है?”
हम उन्हें इस पहलू को स्पष्ट करने में मदद कर रहे हैं।उन्होंने हमारे साथ सात, आठ महीने बिताने के बाद हमारे खिलाड़ियों के बारे में एक विचार प्राप्त करना शुरू कर दिया है। वेस्टइंडीज दौरे के बाद हमारे पास पर्याप्त समय होगा ताकि हम घरेलू खिलाड़ियों के प्रदर्शन का आकलन कर सकें और तदनुसार आगे की योजना बना सकें। उनका आकलन जरूरी है।

◆ यदि बात किसी भी परिणाम की आती है, तो क्या आप पर उनसे और अधिक जिम्मेदारी बढ़ जाती है?

● कोच और चयनकर्ता हमारी प्रणाली का हिस्सा हैं। किसी भी नुकसान के लिए एक दूसरे को दोष देने का कोई मतलब नहीं है। यह बात किसी चीज़ में फायदेमंद नहीं है बल्कि हमें नुकसान ही पहुँचाती है। हम एक ही प्रणाली का हिस्सा हैं, और अगर हम जीत के लिए श्रेय लें, तो हम सब लोगों को हार के लिए भी दोषी ठहराया जाना चाहिए। हमें गलतियों का एहसास होना चाहिए और उनपे चर्चा करके उन्हें सुधारना चाहिए।
मेरा मानना ​​है कि कप्तान अधिक महत्व रखता है, और उस पर ही अधिक से अधिक जिम्मेदारी होती है। हम चयनकर्ता और कोच तो असल में परदे के पीछे होते हैं और वह कप्तान ही है जो मैदान पर अपनी टीम के साथ डट कर लड़ता है और सभी योजनाओं का निष्पादन करता है। मेरी चीजों को अपने तरीके से करने के लिए कप्तान के रूप में भी आलोचना हुई थी, और अब मुख्य चयनकर्ता के रूप में मुझे टीम के चयन में कप्तान को एक बड़ा दर्जा देने के लिए भी आलोचना का शिकार होना पड़ रहा है।

◆टीम से बाहर किये जाने पर खिलाड़ी अक्सर चयनकर्ताओं की आलोचना करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें खुद को साबित करने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिले। क्या आप ऐसे समय में पहले खिलाड़ियों के लिए बात करते हैं?

●मैंने खिलाड़ियों से बात करने की एक संस्कृति शुरू कर दी है। एक ताजा उदाहरण अहमद शहजाद और उमर अकमल हैं। मैंने दोनों खिलाड़ियों के साथ बात की है और उन्हें उन शिकायतों के बारे में बताया है जो राष्ट्रीय टीम में चयन से पहले उन्हें ठीक करने की जरूरत है। अगर खिलाड़ियों को निकाल दिया गया है, इसका मतलब यह नहीं है कि वे बुरे बन गए हैं। उन्हें वापस आने के लिए सहायता दिए जाने की जरूरत है। उनके साथ बैठ कर उनसे बात करके उन्हें विश्वास देना मेरा काम है। कोच को उनके साथ काम करने की जरूरत है, और कप्तान को भी उनसे बात करने और उन्हें बताने की आवश्यकता है कि टीम को उनकी जरूरत क्यों है। आप उन्हें अपनी पीठ नहीं दिखा सकते और उन्हें सिस्टम से बाहर धक्का नहीं दे सकते हैं। वे प्रणाली का हिस्सा हैं। यह प्रक्रिया टीम के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक है। खिलाड़ी ही हमारा धन हैं और हमारी विचारधारा में कोई अंतर नहीं रहना चाहिए। टीम से निकाला जाना कठिन और दर्दनाक है, लेकिन यह खिलाड़ियों के लिए अच्छा है, उन्हें मौका मिलता है कि वे वापस जाएं और उन समस्याओं को हल कर के मज़बूती के साथ वापस आएं।

◆ आपके अनुसार एक खिलाड़ी के आंकलन के लिए कितना वक़्त दिया जाना चाहिए?

● यह बदलता रहता है। यहाँ कोई समय सीमा या मैच या किसी भी तरह के मानदंड की संख्या नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का सामना कैसे करते हैं। कभी कभी एक खिलाड़ी में हमें वो चिंगारी तीन या चार श्रृंखलाओं के बाद भी देखने को नहीं मिलती है। एक अन्य खिलाड़ी, कुछ मैचों के भीतर ही आप को आकर्षित कर लेता है। तो यह कहना मुश्किल है कि श्रृंखला या मैचों की एक निश्चित संख्या एक खिलाड़ी को चिह्नित करने में हमें मदद कर सकती है।

◆ आप एक खिलाड़ी में क्या देखते हैं ?

क्रिकेट बहुत तेज़ी से परिवर्तित हो रहा है। यहाँ आपकी मानसिक क्षमता और स्वभाव का परीक्षण होता है। मैं एक खिलाड़ी में ये देखता हूँ कि वह मानसिक रूप से कितना मजबूत है और दबाव का किस तरह से सामना कर सकता है। यही वो प्रमुख बात है जिसपे मैं गौर करता हूँ। खिलाड़ी किस तरह से मैच को ख़त्म करता है ये देखना भी महत्वपूर्ण है। कुछ लोग रन स्कोर ज़रूर करते हैं लेकिन मैच को खत्म नहीं कर पाते। आपने रन बनाने के लिए प्रयास किया, लेकिन आपने अपनी टीम को जीताने के लिए आवश्यक मेहनत नहीं की। जब टीम को 140 रनों की आवश्यकता हो फिर आपके 120 रन बनाने का क्या मतलब है? पांच विकेट लेने का कारनामा किस काम का जब टीम को छह विकेट ही लेने की जरूरत है? इमरान [खान] भाई हमें हमेशा सलाह देते थे कि स्कोरबोर्ड के अनुसार अपने खेल को बदलो। कभी कभी टीम की जीत में आपके 20 रनों का योगदान भी किसी के शतक से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।

एक समय था जब भारत कागज़ पर एक बड़ी [बल्लेबाजी] टीम थी , और उनमें से हर एक बड़ा स्कोर कर रहा था, लेकिन टीम जीत नहीं पा रही थी । दूसरी ओर,पाकिस्तान, इतनी बड़ी टीम नहीं थी,खिलाड़ियों के स्कोर छोटे छोटे होते थे, लेकिन वे टीम को जीत की ओर ले जाते थे। सईद अनवर अपने रनों की संख्या के बारे में कभीे चिंतित नहीं होते थे, वह स्कोरबोर्ड को देखकर चलते थे। यही सटीक चीज़ हमारी टीम में अभी मौजूद नहीं है। बोर्ड आपसे कुछ और चाहता है, और आप कुछ और कर रहे हैं। हमारे खिलाड़ियों को जिम्मेदारी लेने की जरूरत है। मैं किसी को दोष नहीं देना चाहता लेकिन यही हमारी कमजोरी है।

◆ क्रिकेट में संन्यास लेने की औसत उम्र 37-38 के आसपास है, लेकिन मिस्बाह-उल-हक अब 42 से ऊपर के हो गए हैं। आप इसे कैसे देखते हैं?

● यहाँ इस पहलू को देखने के दो तरीके हैं। खुद को फिट रखने के लिए और प्रदर्शन में प्रासंगिक बने रहने लिए आप मिस्बाह की सराहना कर सकते हैं। उन्होंने यह उदाहरण पेश किया है कि यदि आप फिट हैं और खेल में पर्याप्त योगदान दे रहे हैं, तो आप जितना मर्ज़ी खेल सकते हैं।
एकदिवसीय और ट्वेंटी -20 क्रिकेट में उम्र मायने रखती है और आपके खेल में उसका असर दिख जाता है। टेस्ट मैचों में आप अगर फिट हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं तो बात बन सकती है लेकिन हाँ, यहाँ भी एक चक्र है और आपको उसी के अनुरूप चलना होगा। तो मिस्बाह और यूनुस जैसे खिलाड़ी जो की उम्र के अगले पायदान पर चढ़ रहे हैं, वो तबतक खेल सकते हैं जब तक वो टीम पर बोझ नहीं बन रहे।

◆ आपने हाल ही में सार्वजनिक रूप से कहा है कि आप सलमान बट को लाने पर विचार कर रहे हैं। क्या वास्तव में टीम को उनकी जरूरत है?

● उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में काफी रन बनाए हैं, लेकिन हम यह भी देखते हैं की टीम की आवश्यकताएँ अभी किस स्तर की हैं। यह आवश्यक नहीं है कि किसी भी खिलाड़ी को जो प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अच्छे रन बनाता है उसे सीधे टीम में शामिल कर लिया जायेगा। लेकिन एक ही समय में यह एक अच्छा संकेत भी है कि हमारे पास पर्याप्त खिलाड़ी हैं जो कि कठिन प्रतिस्पर्धा के बीच खुद को साबित करने की कोशिश में लगे हुए हैं। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा हमारे लिए एक ताकत के तौर पर काम करती है। प्रतियोगिता की इसी भावना से पाकिस्तान टीम को मदद मिलेगी। रही बात सलमान की, तो मैं और मिकी साथ बैठेंगे और देखेंगे की मिकी की क्या राय है और वो क्या कहना चाहते हैं।

◆ क्या आप खिलाड़ियों की रोटेशन नीति में विश्वास करते हैं ?

● मैं रोटेशन नीति में विश्वास करता हूँ,लेकिन बल्लेबाजों के लिए कम और गेंदबाजों के लिए अधिक। कोई कप्तान एक विजयी टीम को बदलना नहीं चाहता है। और वहीं मोहम्मद आमिर जैसे खिलाड़ी भी हैं जो मैच का पासा कभी भी पलट सकते हैं और उन्हें बिठाया नहीं जा सकता। लेकिन हमें पता है कि किसी गेंदबाज़ के लिए एक साथ तीनों प्रारूपों में खेलना मुश्किल काम है। एक बल्लेबाज के लिए मुख्य बात है कि वह फॉर्म में है या नहीं।
“क्रिकेट आधुनिक तकनीक और मानसिकता के साथ काफी बदल गया है। क्यों हमारे बल्लेबाज 13 गेंदों पर 70 रन का स्कोर बना रहे हैं ? क्यों वे सिंगल्स लेने में सक्षम नहीं हैं? वे क्यों स्ट्राइक रोटेट नहीं कर सकते हैं? ”
लोगों के अनुसार हो सकता है कि हमारे गेंदबाजों ने ऑस्ट्रेलिया में ज्यादा अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। लेकिन मैं आमिर, राहत [अली] और वहाब [रियाज] की सराहना करना चाहूँगा कि चार कठिन श्रृंखलाओं में खेलने के बावजूद वो चोटों से बचे रहे और फिटनेस बरक़रार रखी । उन्हें इसका श्रेय मिलना चाहिए कि वो फिट हैं और अब पीएसएल में खेल रहे हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने श्रृंखला के दौरान अपने गेंदबाजों को रोटेट किया। गेंदबाजों को रोटेशन द्वारा तरो ताजा रखने का विचार चल रहा है, और हम इस लक्ष्य को हासिल करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। लेकिन इस विचार को हमारी संस्कृति में लाना उतना आसान भी नहीं है।

◆ पीसीबी संविधान कहता है कि अध्यक्ष के पास अपने स्वयं के विवेक का उपयोग कर एक कप्तान नियुक्त करने की शक्ति है। क्या आपको लगता है की चयन समिति को भी जिम्मेदार होना चाहिए?

● मैं इस बारे में क्या कह सकता हूँ ? मुझे नहीं लगता कि यह मेरे लिए एक मुद्दा है। चेयरमैन हमारे साथ चर्चा करते हैं और एक कप्तान नियुक्त करने से पहले पाकिस्तान क्रिकेट के सभी हितधारकों से सुझाव लेते हैं। यह अध्यक्ष के साथ आपके सामंजस्य पर भी निर्भर करता है। मेरा सिफारिशों को मूल्य दिया जाता है। फिर भी, मैं ये फैसला अकेले नही लेना चाहता।

◆ आप ने सभी तीन प्रारूपों के लिए एक कप्तान की वकालत की है। क्या आप इसके पीछे की सोच को समझा सकते हैं?

● यह इन दिनों एक बड़ी बहस बन गया है। हम सबने देखा है कि हमारे पास एक रेडीमेड कप्तान या कप्तानी के लिए एक स्वचालित विकल्प नहीं है। हम एक कप्तान खोजने में सक्षम नहीं हैं, लेकिन फिर भी हम तीन अलग-अलग प्रारूपों के लिए तीन कप्तानों का पता लगाने के लिए काम कर रहे हैं। क्या यह अजीब नहीं है? लोगों को यथार्थवादी और चीजों के बारे में व्यावहारिक होने की जरूरत है। कभी कभी कोई विचार आकर्षक हो सकता है और सुर्खियों में भी रह सकता है, पर जरुरी नहीं की वो व्यावहारिक तौर पर संभव हो।
एक टी -20 कप्तान एक ऐसे खेल से कितनी कप्तानी सीख सकता है जो की 365 में से 10 दिन ही खेला जाता हो ? इसी तरह वनडे में 25 दिन एक वर्ष में हैं। इसलिए कप्तान के रूप में खुद को विकसित करने के लिए एक सीमा तय सी हो गयी है। आपमें निश्चित रूप से नेतृत्व क्षमता का एक तत्व होना चाहिए, लेकिन जितना अधिक आप खेलते हैं ,आप एक कप्तान के रूप में और भी विकसित होते जाते हैं। विचार एक कप्तान का है जो एक समान दृष्टि के साथ टीम का नेतृत्व कर सके। हमें एक दृष्टि, एक दिशा, और एक कप्तान की आवश्यकता है जो कठिन समय में भी हमारी टीम का डटकर नेतृत्व कर सके।

◆ क्या आप कहेंगे कि पाकिस्तान कप्तानी को लेकर असमंजस में है क्योंकि लंबी अवधि तक कप्तानी करने के लिए कोई ठोस उम्मीदवार नहीं है?

● अफसोस की बात है कि हमें काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और एक सक्षम कप्तान ढूंढना भी उनमें से एक है। एक अच्छा खिलाड़ी होना अलग बात है और एक अच्छा खिलाड़ी जो कप्तानी करने में सक्षम है सो अलग। मैंने क्षेत्रीय कोचों के साथ हाल ही में एक बैठक में इस मुद्दे को उठाया है।

यह विचित्र है कि हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अच्छा नेतृत्व ढूंढने के लिए कितने प्रयोग कर रहे हैं। खिलाड़ी अगर उस स्तर पर असफल हो, तो हमें पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू करनी होती है, और समय की बर्बादी होती है। मैंने सभी कोचों को बताया है कि घरेलू स्तर पर जिन खिलाड़ियों में कप्तानी के लिए पर्याप्त क्षमता दिखती है, उनकी पहचान करें और उन्हें पनपने का अवसर दें। हाल ही में मैंने एक सीनियर खिलाड़ी, सोहेल तनवीर, को रावलपिंडी पक्ष का नेतृत्व करते देखा जबकि उनके पाकिस्तान का कप्तान बनने की दूर तक कोई सम्भावना नहीं है। क्यों नहीं एक युवा खिलाड़ी जिसके अंदर नेतृत्व क्षमता है, उसको शुरुआत से ही कप्तानी का मौका दिया जाए ताकि वो हालातों में खुद को और अच्छे से ढाल सके।
मैंने सभी घरेलू कोचों को बता दिया है, कि जिन खिलाड़ियों में उन्हें वो बात दिखती है जो पाकिस्तान का कप्तान बनने के लिए जरुरी है, उनकी पहचान करें और उन्हें पर्याप्त मौके दें। उन्हें प्रणाली में लाओ, उन्हें अनुभव देते रहो। अन्यथा संभावना है कि किसी भी खिलाड़ी को यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अचानक कप्तान बनाया जाय तो टीम का पतन हो सकता है।

◆ क्या आपको ऐसा लगता है कि पूरे ढांचे को एक तरह से बदलने की जरूरत है? क्या आप सहमत हैं कि पाकिस्तान क्रिकेट गंभीर गिरावट की स्थिति में है?

● हमें स्थिति को गिरावट के रूप में लेने की जरूरत नहीं है। हम क्रिकेट की दुनिया के बाकी देशों से एक कदम पीछे हैं। हमें खेल के हर पहलू में अपने स्तर को बढ़ाने की जरूरत है। देखें तो खेल के एक प्रारूप में हम नंबर 7, और दूसरे में 6 वें नंबर पर हैं, वनडे में हम 8वें पायदान पर हैं और यह एक खतरनाक स्थिति है। हम दुनिया की मांग के अनुरूप क्रिकेट नहीं खेल रहे हैं। सबसे पहली बात, हमें अपनी गलतियों को स्वीकार करने और हमारी समस्याओं को समझने की जरूरत है। नहीं तो सुधार कभी नहीं होगा। जब तक हम अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं करते हैं और बदलाव की ओर कदम नहीं बढ़ाते हैं, तब तक सुधार नहीं होगा।

हमें अपने खेल को हर स्तर पर बढ़ाना होगा: खिलाड़ियों का स्तर, फिटनेस, पिचें, प्रथम श्रेणी के खेल, अंपायरिंग, सुविधाओं के मानक, सबकुछ। हमें दुनिया के साथ कदम से कदम मिला कर चलना होगा ताकि हम उनसे प्रतिस्पर्धा कर सकें।

यह एक लंबी प्रक्रिया है। छह महीने में सब बदल जायेगा ऐसी उम्मीद ना करें। लय टूट सी गयी है। हमें इसे ठीक करने की जरुरत है ताकि प्रणाली ठीक ढंग से काम कर सके। संघों, विभागों और पीसीबी को एक साथ काम करने की जरुरत है, चीजें तब तक नहीं बदलने जा रही हैं। सभी पर्याप्त योगदान और ईमानदारी के साथ अपनी भूमिका निभाएंगे तभी हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।
मिकी आर्थर या कोई और प्रमुख कोच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों को नहीं बदल सकते। आप वास्तव में बहुत अधिक उम्मीद कर के अपने कार्य और अधिक कठिन बना रहे हैं। दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से उन्हें खिलाड़ियो को बुनियादी चीजें जैसे स्ट्राइक रेट, विकेटों के बीच दौड़ इत्यादि सिखानी पड़ रही है और वो आपके लिए मैच प्लान भी बना रहे हैं। तो जब तक इन बातों का घरेलू स्तर पर समाधान नहीं किया जाता, हम सुधार नहीं कर सकते हैं।

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