वसीम अकरम के साथ रहे मसलों पर वक़ार ने जताया खेद

Wasim Akram vs Waqar Younis rivalry in Hindi

पूर्व पाकिस्तानी कप्तान वक़ार यूनिस ने वसीम अकरम के साथ रहे कड़वे रिश्ते पर अत्यंत खेद जताया है, यह बात तब की है जब दोनों खिलाड़ी साथ खेलते थे। वक़ार ने कहा की आपसी मसलों के कारण दल में कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

आगे कहते हुए “मैं और वसीम भाई दोनों ही बहुत अच्छे मित्र है, और वह हमेशा मेरे बड़े भाई की तरह रहे है”।
“उन्होंने हमेशा मेरा समर्थन किया है चाहे वह मैदान में हो या बहार”।

मैं मानता हूँ की हमारे आपस में कुछ मसले थे, सिर्फ हम दोनों में ही नहीं बल्कि दल में हमारे मसले थे, इस से पाकिस्तानी क्रिकेट को कोई फायदा नहीं हुआ, और इसका मुझे खेद है।

“यदि धैर्य से देखा जाए तो यह मसले केवल मैदान के बहार थे, मैदान के अंदर प्रतिस्पर्धा अलग तरह की थी, की कौन ज़्यादा विकेट झटका पाता है, इस से हमे थोड़ा फायदा ज़रूर हुआ। पर वह जो किस्सा हुआ था वह होना कतई उचित नहीं था, तब हम बच्चे थे और सूझ बूझ के साथ काम नहीं किया, अब हम काफी समझदार हो चुके है, पर मुझे उस बात का खेद ज़रूर है।

वसीम अकरम – पाकिस्तान – रिकॉर्ड

वक़ार को लगता है की पाकिस्तान में “प्रथम-श्रेणी” क्रिकेट के स्तर में गिरावट आई है क्योंकि बहुत से दलों को एकत्रित किया गया है, अगर स्तर उठाना है तो गम्भिर प्रतिस्पर्धा की इन्होंने मांग की है। इनका मानना है की उस समय क्रिकेट प्रणाली आज के दौर से बेहतर थी क्योंकि कम दल खेल खेला करते थे, इसलिए प्रतिभावान खिलाड़ी आगे आते थे, इसका कतई ये मतलब नहीं है की अब खिलाड़ियों में प्रतिभा किसी अंश में कम है। पर स्पर्धा की विविधता बढ़ती जा रही है अवं ज़यादा दल प्रथम श्रेणी स्पर्धा में हिस्सा ले रहे है, इसलिए प्रतिभा कहीं खो सी जाती है।

उन दिनों में क्रिकेट खेलना काफी मुश्किल भरा काम था और बहुत परिश्रम के बाद ही प्रथम श्रेणी क्रिकेट का किसी को हिस्सा बनाया जाता है, अब यह एक तोहफे की तरह लोगो को दे दिया जाता है अवं हर कोई क्रिकेट खेल रहा है, मै पाकिस्तान के बच्चों से क्रिकेट नहीं लेना चाहता परंतु जब हम अपनी सोच के दायरे को बढ़ाते है और अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट की ओर देखते है, तब पता चलता है की गंभीर प्रतिस्पर्धा होना कितना आवश्यक है, पाकिस्तानी क्रिकेट के स्तर में वृद्धि लाने के लिए, और इस गंभीर प्रतिस्पर्धा के कमी दिखाई देती है।

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वक़ार ने कहा की तेज़ गेंदबाज़ी इंसान में प्राकृतिक रूप से आती है, एवं खेलते समय गेंद को हल्का सा मोड़ा जा सकता है बिना उसकी गति को कम करते हुए, इन्होंने इमरान खान और अकरम का ज़िक्र किया और कहा इनसे काफी कुछ सीखा, इन्होंने ये भी कहा की तेज़ गेंदबाज़ी सीखी नहीं जा सकती, आप स्वयं इस प्रतिभा के साथ जनम लेते है, आप तरक्की और बदलाव ज़रूर ला सकते है, पर एक मध्यम क्रम के तेज़ गेंदबाज को, उच्चतम तेज़ गेंदबाज नहीं बना सकते। मै ये प्रतिभा लेके पैदा हुआ था और काफी खुश हूँ, की तत्कालीन कप्तान इमरान खान ने मुझे हमेशा प्रोत्साहित किया एवं वह मेरे रोल मॉडल भी है, उन्होंने कभी मुझको धीमा नही होने दिया, और इसी कारणवश मैं अपने आप को खुशकिस्मत समझता हुँ, और जब तक मैंने खेला मैंने इस प्रतिभा को बरकरार रखा।

जब मै नया नया आया था तब वसीम अकरम कुछ मैच खेल चुके थे, अज़ीम हफ़ीज़ अपनी खिलाडी के रूप में पारी खत्म करने ही वाले थे, इमरान खान भी थे और तेज़ गेंदबाज़ी का क्रम बहुत अच्छा था, इनको देखकर काफी कुछ सीखने को मिला, इसलिए अपने आप को खुशकिस्मत समझता हूँ।

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