मार्क टेलर – ऑस्ट्रेलिया – रिकॉर्ड

Mark Taylor Records in Hindi

पूरा नाम – मार्क एंथोनी टेलर

जन्म – अक्टूबर 27, 1964, न्यू साउथ वेल्स

प्रमुख टीमें – ऑस्ट्रेलिया, न्यू साउथ वेल्स

बल्लेबाजी शैली – बाएं हाथ के बल्लेबाज

गेंदबाजी शैली – दाएं हाथ के मध्यम

अन्य – टिप्पणीकार

टेस्ट पदार्पण (कैप 346) – 26 जनवरी 1989 बनाम वेस्टइंडीज
अंतिम टेस्ट – 2 जनवरी 1999 बनाम इंग्लैंड

एकदिवसीय पदार्पण (कैप 107) – 26 दिसंबर 1989 बनाम श्रीलंका
अंतिम एकदिवसीय – 24 मई 1997 बनाम इंग्लैंड

Batting and fielding averages
Mat Runs HS Ave SR 100 50 4s 6s Ct
Tests 104 7525 334* 43.49 41.48 19 40 727 9 157
ODIs 113 3514 105 32.23 59.46 1 28 273 7 56
First-class 253 17415 334* 41.96 41 97 350
List A 178 5463 105 31.57 1 47 98
Bowling averages
Mat Wkts BBI BBM Ave Econ SR 4w 5w 10
Tests 104 1 1/11 1/11 26 3.71 42 0 0 0
ODIs 113
First-class 253 2 1/4 38.5 3.08 75 0 0
List A 178 0 2.33 0 0 0

ऑस्ट्रेलिया के विश्व वर्चस्व में वृद्धि का दो लोगों को श्रेय देना होगा। एक एलन बॉर्डर और दूसरा मार्क टेलर। बॉर्डर के संन्यास के बाद, टेलर ने सराहनीय रूप से कप्तानी की और यह सुनिश्चित किया कि ऑस्ट्रेलिया एक ऐसी इकाई बन जाए जो अपने विपक्षियों को कुचल डाले। उनकी शानदार कप्तानी, ठोस बल्लेबाजी और शानदार क्षेत्ररक्षण ने साथ मिलकर, ऑस्ट्रेलिया को पूरा पैकेज बनाया।

स्टीव वॉ – ऑस्ट्रेलिया – रिकॉर्ड

टेलर ने 1985/86 में एनएसडब्ल्यू के लिए अपना शेफ़ील्ड शील्ड पदार्पण किया और अपने प्रथम श्रेणी के कैरियर की शानदार शुरुआत की। उन्होंने 49.3 की औसत से 937 रन बनाए लेकिन उन्हें अगले वर्ष में एक ख़राब दौर से गुजरना पड़ा। उनका फॉर्म 1989 में बदला, जहां उन्होंने 49.6 के औसत से 1241 रन बनाए। स्लिप में उनके सुरक्षित क्षेत्ररक्षण ने चयनकर्ताओं को आकर्षित किया और उन्हें 1989 में एशेज दौरे के लिए चुना गया।

टेलर ने अपनी पहली एशेज श्रंखला में सभी कीर्तिमान तोड़ दिए क्योंकि उन्होंने छह टेस्ट की श्रंखला में 83.9 की औसत से 839 रन बनाए थे, जिसमें ट्रेंट ब्रिज में पांचवें टेस्ट मैचों में 219 रनों की शानदार पारी शामिल थी। उन्होंने 1934 में सर डॉन ब्रैडमैन के 974 रन के बाद एशेज सीरीज में दूसरा सर्वश्रेष्ठ योग बनाया। उनका धमाकेदार फार्म प्रथम श्रेणी के मैचों में भी बना रहा जहाँ उन्होंने 70 की औसत से 1403 रन बनाए। उन्होंने टेस्ट मैचों में 1000 से अधिक रन बनाए और इस प्रकार, वह टेस्ट मैचों में 1000 से अधिक रन, अपने पहले साल में बनाने वाले पहले क्रिकेटर बन गए।

मार्क वॉ – ऑस्ट्रेलिया – रिकॉर्ड

1994 में ऑस्ट्रेलिया का पाकिस्तान दौरा टेलर का कप्तान के रूप में पहला दौरा था। ऑस्ट्रेलिया ने एक विकेट से कराची में एक रोमांचक मैच गंवा दिया और शेष दो टेस्ट मैचों में भी अच्छा प्रदर्शन करने में विफल रहे। 35 साल बाद पाकिस्तान में अपना पहला टेस्ट जीतने की ऑस्ट्रेलिया की तलाश को गंभीर रूप से झटका लगा। उस अवधि के दौरान, टेलर की बल्लेबाजी फॉर्म में गिरावट नजर आई लेकिन उनकी कप्तानी शानदार रही। अपने दल का नेतृत्व करते हुए उनके शांत और उत्साही आचरण के लिए अक्सर उनकी प्रशंसा होती रही|

हालांकि, माइकल स्लेटर के आगमन ने उनका दृष्टिकोण बदल दिया| स्लेटर दोनों में से अधिक आक्रामक थे जबकि टेलर धीरे-धीरे विपक्ष को नीचे ढकेलते थे। वे दोनों अपनी शैली में खेले और सलामी बल्लेबाजों के रूप में 78 पारियों में, उन्होंने 51.6 के औसत से 3887 रन बनाए, जिसमें 260 का सर्वश्रेष्ठ भी शामिल है।

माइकल स्लेटर – ऑस्ट्रेलिया – रिकॉर्ड

टेलर को 1997/98 सत्र में फॉर्म में लम्बी गिरावट का सामना करना पड़ा क्योंकि वह 21 पारियों में एक भी अर्धशतक नहीं जमा पाए थे। उन्हें टीम से बाहर किए जाने की आवाज़े भी आने लगी थीं और कुछ ने तर्क दिया था कि टीम में टेलर की लगातार उपस्थिति नाराजगी पैदा कर रही थी। बहरहाल, टेलर ने यह सब झेल लिया और बर्मिंघम में कैरियर को बचाने वाली 129 रनों की पारी खेली। हालांकि ऑस्ट्रेलिया ने मैच खोया, पर टेलर का प्रदर्शन अच्छा रहा। बाद में पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद 334 रन बनाकर उन्होंने अपनी वापसी का सफ़र पूरा किया। उन्होंने कीर्तिमान के लिए नहीं जाने का फैसला किया और सर डॉन ब्रैडमैन के स्कोर को बराबर करने के तुरंत बाद पारी घोषित कर दी। व्यक्तिगत कीर्तिमान की बजाय टीम परिणाम पर उनके ज़ोर की वजह से उन्हें बहुत सराहना मिली।

1999 में एशेज की दूसरी जीत में कप्तानी करने के बाद टेलर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अपने सन्यास की घोषणा की। वह अब चैनल 9 के लिए एक टिप्पणीकार के रूप में काम करते हैं|

मजेदार तथ्य: मार्क टेलर का प्रचलित नाम टबी है, लेकिन, स्टंप को छोड़ कर जा रही गेंद को छोड़ने के लिए अपने कूल्हों के ऊपर तक बल्ले को उठाने की उनकी आदत के कारण, उन्हें ‘हीलियम बैट’ का भी उपनाम दिया जाता है।

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Mark Taylor Records | Australia | CricketinHindi.com
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