शेन वॉर्न – ऑस्ट्रेलिया – रिकॉर्ड

Shane Warne Records in Hindi

पूरा नाम – शेन वार्न कीथ

जन्म – 13 सितंबर, 1969, फेर्नत्री गली, विक्टोरिया

प्रमुख टीमें – ऑस्ट्रेलिया, हैम्पशायर, आईसीसी विश्व एकादश, मेलबर्न स्टार्स, राजस्थान रॉयल्स, विश्व एकादश के बाकी, विक्टोरिया

उपनाम – वारने

भूमिका – गेंदबाज

बल्लेबाजी की शैली – राइट-हैंड बैट

गेंदबाजी की शैली – लेग-ब्रेक गुगली

अन्य – कमेंटेटर

ऊंचाई – 1.83 मीटर

टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण (कैप 350) – 2 जनवरी 1992 बनाम भारत
अंतिम टेस्ट – 2 जनवरी 2007 बनाम इंग्लैंड

वनडे कैरियर की शुरुआत (कैप 110) – 24 मार्च 1993 बनाम न्यूजीलैंड
अंतिम वनडे – 10 जनवरी 2005 बनाम एशिया एकादश
वनडे शर्ट नंबर 5, 99, 12, 23

Batting and fielding averages
Mat Runs HS Ave SR 100 50 4s 6s Ct
Tests 145 3154 99 17.32 57.65 0 12 353 37 125
ODIs 194 1018 55 13.05 72.04 0 1 60 13 80
First-class 301 6919 107* 19.43 2 26 264
List A 311 1879 55 11.81 0 1 126
T20s 73 210 34* 9.54 92.1 0 0 15 7 18
Bowling averages
Mat Wkts BBI BBM Ave Econ SR 4w 5w 10
Tests 145 708 8/71 12/128 25.41 2.65 57.4 48 37 10
ODIs 194 293 5/33 5/33 25.73 4.25 36.3 12 1 0
First-class 301 1319 8/71 26.11 2.76 56.7 69 12
List A 311 473 6/42 6/42 24.61 4.25 34.7 20 3 0
T20s 73 70 4/21 4/21 26.61 7.22 22.1 1 0 0

पहले शेन वॉर्न के खेल में बेचैनी और गलफुल्लपन था. फिर उन्होने बड़ी लेग स्पिन और फ्लिप्पर से प्रसिद्धि अर्जित की. कुछ समय के लिए उनके जीवन में औरतें आई, फिर एक सट्टेबाज़ से नाम जुड़ा, फिर ड्रग्स के इल्ज़ाम लगे, फिर और औरतें आई – और वॉर्न हमेशा सुर्ख़ियों में बने रहे. इन सब बातों के बाद भी वॉर्न क्रिकेट इतिहास के सबसे महान गेंदबाज़ों में से एक बने और एक स्टार के रूप में अपना क्रिकेट जीवन ख़त्म किया. वॉर्न, जिन्हें 2000 में 20वीं सदी के 5 महानतम खिलाड़ियों में गिना गया था, 2006 में उससे भी बेहतर गेंदबाज़ी कर रहे थे.

वॉर्न की क्रिकेट कहानी काफ़ी फिल्मी रही जिसमें ड्रामा, एक्शन, कॉमेडी और रोमांस था. उन्होने टेस्ट हैट ट्रिक ली, विश्व कप के फाइनल में मॅन ऑफ द मैच रहे, और उन पर कुल सात किताबें लिखी गईं. टेस्ट क्रिकेट में 700 विकेट लेने वाले वे विश्व के पहले क्रिकेटर बने. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में बिना शतक बनाए सबसे ज़्यादा रन बनाने का विश्व कीर्तिमान वॉर्न के नाम है, और शायद सबसे होनहार कप्तान थे जो ऑस्ट्रेलिया को कभी नही मिला. 1993 में उनकी वो गेंद जिसने लेग स्टंप के बाहर ठप्पा खा कर इंग्लैंड के माइक गॅटिंग का ऑफ स्टंप उड़ाया, को बॉल ऑफ द सेंचुरी कहा गया. लेग स्पिन की कला जो कहीं खोती सी जा रही थी, शेन वॉर्न के दम पर क्रिकेट में वापस आई, और आज के युग में स्पिन गेंदबाज़ी इतनी सफल है की तेज़ गेंदबाज़ों की खोज करनी पड़ती है.

इन सब के बावजूद वॉर्न के क्रिकेट जीवन के सबसे बड़े कीर्तिमान अंत के दो सालों में आए. प्रतिबंधित ड्रग के सेवन की वजह से एक साल के प्रतिबंध के बाद शेन वॉर्न ने 2004 में वापसी करते हुए श्रीलंका के खिलाफ 3 टेस्ट मैचों में 26 विकेट चटके. और इसके अगले साल रिकौर्ड़ 96 विकेट ले डाले – 24 ज़्यादा उनके 1993 के करिश्माई प्रदर्शन से – फिर भी उन्हें एलेन बॉर्डर मैडल नही मिला. इनमें से 40 विकेट इंग्लैंड के खिलाफ थे, अधिकतर एशेज़ सीरीज़ में. उन्होने अपनी गेंदबाज़ी में अनेकों विविधता लाते हुए ज़ूटर, स्लाइडर, टॉप स्पिन, बैक स्पिन और रॉंग वन का इजात किया. लेकिन सबसे ज़्यादा भरोसा अपने दो पुराने मित्रों – सटीकता और लेग स्पिन पर रखा. वॉर्न की महानता इतनी थी की वे गेंद को कितना स्पिन करना है ये भी नियंत्रित कर लेते थे. और एक कलाकार की भाँति अपने अंतिम वर्षों में उन्होने अपनी गेंदबाज़ी बेहद सरल कर ली थी जो देखने में बेहद आकर्षक थी और अत्यंत कारगर थी.

शायद वॉर्न को जितनी प्रसिद्धि मिली उतना प्यार नही मिला. शायद उनके खेल को लोगों ने तब तक उतना सम्मान नही दिया जिसका एहसास उनके सन्यास लेने के बाद हुआ – जब 2006-07 की एशेज़ में उन्होने इंग्लैंड को हराया. शायद शेन वॉर्न की महानता भी ब्रॅड्मन की भाँति गुज़रते दशकों के साथ ज़्यादा प्रत्याशित होती जाएगी. लेकिन एक बात तो तय है की वॉर्न के क्रिकेट छोड़ने के बाद से खेल अधूरा रह गया है.

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