मशरफे मोर्तज़ा – बांग्लादेश – रिकॉर्ड

Mashrafe-Mortaza-records-in-Hindi

पूरा नाम – मशरफे बिन मुर्तजा

जन्म – 5 अक्टूबर, 1983, नोरेल, यसोर

प्रमुख टीमें – बांग्लादेश, एशिया इलेवन, ढाका ग्लेडियेटर्स, खुले डिवीजन, कोलकाता नाइट राइडर्स

कोषिक के रूप में भी जाना जाता है

भूमिका – गेंदबाज

बल्लेबाज़ी शैली – दाएं हाथ के बल्लेबाज़

गेंदबाजी शैली – दाएं हाथ के तेज-मध्यम

टेस्ट पदार्पण (कैप 19) – 8 नवंबर 2001 बनाम जिम्बाब्वे

एकदिवसीय पदार्पण (कैप 53) – 23 नवंबर 2001 बनाम जिम्बाब्वे

टी 20 पदार्पण (कैप 4) – 28 नवंबर 2006 बनाम ज़िम्बाब्वे

बल्लेबाजी और क्षेत्ररक्षण का औसत														 	मॅच 	पारी	नाबाद	रन	सर्वाधिक स्कोर	औसत	गेंद खेलीं	स्ट्राइक रेट	शतक	अर्धशतक	चौके	छ्क्के	कॅच	स्टमपिंग टेस्ट	36	67	5	797	79	12.85	1186	67.2	0	3	95	22	9	0 एकदिवसीय	176	130	21	1557	51*	14.28	1757	88.61	0	1	132	53	55	0 टी२०	54	39	11	377	36	13.46	277	136.1	0	0	28	23	10	0 प्रथम श्रेणी	54	96	7	1433	132*	16.1			1	6			23	0 लिस्ट ए	231	179	27	2567	104	16.88	2764	92.87	1	7			78	0 ट्वेंटी२०	122	79	18	777	56*	12.73	601	129.28	0	1	49	49	24	0
Mashrafe-Mortaza-Batting-and-Fielding-records-in-Hindi
गेंदबाज़ी औसत													 	मॅच 	पारी	गेंदें	रन	विकेट	बेस्ट/पारी	बेस्ट/मॅच	औसत	रन प्रति ओवर	स्ट्राइक रेट	4 विकेट	5 विकेट	10 विकेट टेस्ट	36	51	5990	3239	78	4/60	5/88	41.52	3.24	76.7	4	0	0 एकदिवसीय	176	176	8807	6982	231	6/26	6/26	30.22	4.75	38.1	6	1	0 टी२०	54	53	1139	1527	42	4/19	4/19	36.35	8.04	27.1	1	0	0 प्रथम श्रेणी	54		8673	4540	129	4/27		35.19	3.14	67.2	7	0	0 लिस्ट ए	231		11470	9006	322	6/26	6/26	27.96	4.71	35.6	10	3	0 ट्वेंटी२०	122	118	2537	3234	101	4/19	4/19	32.01	7.64	25.1	1	0	0
Mashrafe-Mortaza-Bowling-Records-in-Hindi

लोकप्रिय तौर पर ‘नरैल एक्सप्रेस’ के नाम से जाने जाने वाले, मोर्तज़ा का करियर चोटों से घिरा रहा है। बांग्लादेश से आने वाले पहले असली तेज गेंदबाज, 2001-02 में जब उन्होने जिम्बाब्वे के खिलाफ अपने पहले टेस्ट मैच की शुरुआत की, तब से उन में महानता के लक्षण देखे जाने लगे थे। स्थिर रूप से निर्मित, वह अपने मजबूत एक्शन के बल पर असुविधाजनक उछाल उत्पन्न कर सकते हैं|

उन्होंने एंडी रॉबर्ट्स को प्रभावित किया था, जो तब बांग्लादेश को प्रशिक्षित कर रहे थे और उन्हें टेस्ट टीम में चुना गया – जो कि उनका पहला प्रथम श्रेणी मुक़ाबला भी था – वह ऐसा करने वाले 31वें व्यक्ति थे और 1899 के बाद से तीसरे। पहले मुक़ाबले के बाद चोटों ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया और उन्होंने खुद को एक के बाद एक वापसी करते हुए पाया। उनकी पीठ और घुटने की चोटों ने उन्हें सबसे ज्यादा खेल से दूर रखा, लेकिन वह वापस आए और आफताब अहमद के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ दिया, जब उन्होंने एक एकदिवसीय मैच में केन्या के खिलाफ 6/26 लिए।

2006 के कैलेंडर वर्ष में, मोर्तज़ा एकदिवसीय क्रिकेट में विश्व में सर्वाधिक विकेट लेने वाले खिलाड़ी थे, जिसमें उन्होंने 49 विकेट लिए थे| यह किसी के भी द्वारा 17 वां सबसे अच्छा प्रदर्शन था और एक बांग्लादेशी द्वारा एक कैलेंडर वर्ष में ली गई सबसे ज्यादा विकटें थी| 2007 के विश्व कप में भारत के खिलाफ उनके पक्ष की शानदार जीत में वह मैन ऑफ द मैच थे जहाँ उन्होंने 4/38 लिए थे। यह आश्चर्य की बात नहीं कि वह विश्व कप में बांग्लादेश के सभी मैचों में खेले और वे दूसरे राउंड में भी पहुँचे।

मोर्तज़ा की ताकत डेक पर गेंदों के टकराने और सीम से प्रशंसनीय हरकत प्राप्त करने में है। जब वह अपने चरम पर होते है, तो वह अपनी तेज गति से बल्लेबाजों को आश्चर्यचकित करने में सक्षम रहते हैं, लेकिन लगातार चोटों के चलते उन्हें अपने एक्शन को बार-बार बदलना पड़ा और अब वह सबसे ज्यादा निर्भर करते है एक प्रतिबंधात्मक लाइन पर गेंदबाजी करते हुए बल्लेबाजों से त्रुटि करवाने में।

एक सक्षम निचले क्रम के बल्लेबाज, जो लंबे शॉट अच्छे प्रभाव के साथ मार सकते हैं, मोर्तज़ा को फरवरी 2009 में केकेआर की ओर से 600,000 डॉलर में ख़रीदा गया था। उनका पदार्पण केकेआर के लिए काफ़ी चकित करने वाला रहा ,जहाँ रोहित शर्मा ने उनके अंतिम ओवर 26 रन बनाकर लगभग असंभव दिख रही जीत को छीन लिया जब 21 रन बनाने आवश्यक थे। इस सत्र में यह उनका एकमात्र मुक़ाबला था क्योंकि इसके बाद फ्रैंचाइजी ने उन्हें बाहर बैठाए रखा|

कैरीबियन में ट्वेंटी -20 वर्ल्ड कप के बाद मोर्तजा को कप्तान नियुक्त किया गया। बांग्लादेश के वेस्टइंडीज और ज़िम्बाब्वे दौरे के दौरान उनका कप्तान के रूप में पदार्पण होना था, लेकिन टखने की चोट ने उन्हें शाकिब को कप्तानी के कर्तव्यों को सौंपने के लिए मजबूर किया। घुटने के अस्थि-बंधन के फटने के कारण उन्हें 2011 के विश्व कप में भी मौका नहीं मिला। वह समय पर ठीक होने की आशा कर रहे थे, और जब यह घोषित किया गया कि मोर्तज़ा को विश्व कप टीम में शामिल नहीं किया गया है तो बांग्लादेश में दंगे हुए और एक जगह आधे दिन की हड़ताल भी थी।

बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने 2012 में बांग्लादेश प्रीमियर लीग शुरू की, एक ट्वेंटी-20 टूर्नामेंट जो फरवरी 2012 में आयोजित होना था। खिलाड़ियों की नीलामी में मोर्तज़ा को ढाका ग्लेडियेटर्स द्वारा 45,000 अमरीकी डालर में ख़रीदा गया। प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापसी के बाद मोर्तजा को ढाका ग्लेडियेटर्स का कप्तान बनाया गया। टूर्नामेंट शुरू होने से पहले, उन्होंने बताया कि उनसे स्पॉट-फिक्सिंग में भाग लेने के अनुरोध के साथ संपर्क किया गया था। मोर्तजा ने बीपीएल के उद्घाटन संस्करण में अपनी टीम ढाका ग्लेडिएटर्स को खिताब जिताया, जहां उन्होंने ग्यारह मैचों में से 10 विकेट लिए थे।

बीपीएल के समापन के तुरंत बाद, बांग्लादेश ने 2012 एशिया कप की मेजबानी की। दिसंबर में पाकिस्तान से हारने के बाद, पांच नए खिलाड़ियों को बांग्लादेश की 15 सदस्यीय टीम में बुलाया गया, जिसमें मोर्तजा भी शामिल थे, जिनकी चोट के बाद राष्ट्रीय टीम में वापसी हुई थी। जब बीसीबी ने मार्च 2012 में अपने केंद्रीय अनुबंध की घोषणा की तो मोर्तजा ने अपने शीर्ष स्तर के अनुबंध को बरकरार रखा। बांग्लादेश ने सभी अपेक्षाओं को पार किया और पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में पहुंचा| यह दूसरी बार था जब बांग्लादेश किसी टूर्नामेंट के फाइनल तक पहुंचा था। हालांकि वह बीपीएल में खेले थे, लेकिन एकदिवसीय में दस ओवरों की गेंदबाजी मोर्तज़ा के लिए एक चुनौती साबित हुई। वह 10 ओवरों का अपना कोटा समाप्त करने के लिए संघर्ष करते रहे लेकिन चार मैचों में छह विकेट के साथ बांग्लादेश के सबसे बेहतर तेज गेंदबाज साबित हुए। मार्च 2012 में मोर्तज़ा टीम में अंदर और बाहर होने के बाद भी बीसीबी के साथ अपने शीर्ष स्तर के केंद्रीय अनुबंध को बनाए रखने में सक्षम रहे।

मोर्तज़ा को एक छोटे प्रारूप के गेंदबाज के रूप में देखा जाता है। उन्होंने 2009 के बाद से एक टेस्ट मैच भी नहीं खेला है और 2014 टी-20 विश्व कप खेलने के दौरान वह फिर से घायल हो गए थे। पाकिस्तान के खिलाफ मैच में, उन्होंने टी-20 अन्तर्राष्ट्रीय में बांग्लादेशी गेंदबाज द्वारा दिए गए सबसे अधिक रनों के रिकॉर्ड के बराबरी की। वह जिम्बाब्वे के खिलाफ नवंबर-दिसंबर 2014 की श्रृंखला में तीसरे सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज थे। पहली बार जब कप्तानी को प्रारूपों में विभाजित किया गया तो, उन्हें उस श्रृंखला के लिए कप्तान नियुक्त किया गया था। बीसीबी ने, उनकी एकदिवसीय कप्तानी से खुश होकर, उन्हें 2015 के विश्व कप में भी टीम का नेतृत्व करने के लिए कहा, जहां उन्होंने बांग्लादेश को क्वॉर्टर फाइनल तक (पहली बार बांग्लादेश नॉकआउट में पहुँचा था) पहुँचाया।

2015 के विश्व कप के बाद, मशरफे ने अपनी टीम को एकदिवसीय श्रृंखला में पाकिस्तान (3-0) और भारत (2-1) के खिलाफ घर पर जिताया। इन परिणामों ने 8 देशों के टूर्नामेंट, इंग्लैंड में होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी के 2017 संस्करण में बांग्लादेश के लिए एक स्थान पक्का किया। मशरफे ने, जिनके लिए कुछ लोग सन्यास के बारे में सोच रहे थे, इन बातों को विराम दिया और दौरे के लिए कठिन परिश्रम किया। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एक एकदिवसीय श्रंखला में जीत दर्ज करने के बाद, बांग्लादेश के कप्तान ने कहा, “हम बड़ी टीमों को हराने का सपना देखते थे। अब हम उन्हें हरा रहे हैं।”
एशिया कप में उपविजेता बनने के बाद, मशरफे की अगली नियुक्ति भारत में आयोजित विश्व टी-20 के लिए थी| टूर्नामेंट के दौरान एक अलग मोर्तज़ा को देखा गया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, अवैध गेंदबाजी एक्शन के लिए तस्कीन अहमद और अराफात सनी के निलंबन के बारे में पूछने पर वह आंसू बहाते हुए पाए गए। बांग्लादेश निश्चित रूप से उनकी सेवाओं से वंचित रहा और सुपर-10 चरण में एक भी जीत दर्ज करने में विफल रहा।

श्रीलंका में एकदिवसीय श्रृंखला की बराबरी में समाप्ति के बाद, मोर्तज़ा ने दो टी-20 अंतर्राष्ट्रीय में से पहले के टॉस के दौरान खेल के सबसे छोटे प्रारूप से अपने सन्यास की घोषणा की। उनकी टीम के सदस्यों ने उनके अंतिम टी-20 अंतर्राष्ट्रीय खेल में जीत दर्ज कर एक उचित विदाई दी और इस तरह श्रृंखला को 1-1 से बराबर कर दिया।

मई 2017 में आयरलैंड में त्रिकोणीय श्रृंखला के अंतिम मुक़ाबले में न्यूजीलैंड को हराकर, बांग्लादेश रैंकिंग में श्रीलंका से ऊपर, छठे स्थान पर पहुंच गया। मशरफे चैंपियंस ट्रॉफी में बांग्लादेश का नेतृत्व करेंगे, जो कि उनके हिसाब से विश्व कप के बाद दूसरे स्थान पर हैं।

रोचक तथ्य:

– यद्यपि वह युवावस्था से फुटबॉल और बैडमिंटन जैसे खेल खेलते आ रहे थे – कभी-कभी स्कूल के काम के बजाय पास की नदी चित्रा में तैरते हुए पाए जाते थे – मोर्तजा एक युवा के रूप में क्रिकेट में अधिक रूचि रखते थे, विशेष रूप से बल्लेबाजी में।

– वह अपने घरेलू शहर में बहुत लोकप्रिय हैं, जहाँ उन्हें ‘दिलों का राजकुमार’ भी कहा जाता है।

– सरकारी विक्टोरिया कॉलेज, नरैल में, मोर्तज़ा सुमोना हक सुमी से मिले, जिनके साथ उन्होंने 2006 में शादी की|

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Mashrafe Mortaza Records | Bangladesh | CricketinHindi.com
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