एलेस्टर कुक – इंग्लैंड – रिकॉर्ड

Alastair Cook Records in Hindi

पूरा नाम – एलेस्टर नेथन कुक

जन्म – 25 दिसंबर 1984, ग्लौसेस्टर

प्रमुख टीमें – इंग्लैंड, बेडफ़ोर्डशायर, इंग्लैंड लायंस, इंग्लैंड अंडर-19, एसेक्स, मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब

उपनाम – कुकी, शेफ

भूमिका – बल्लेबाज

बल्लेबाजी शैली – बाएं हाथ के बल्लेबाज

गेंदबाजी शैली – दाएं-हाथ धीमी गति से

ऊँचाई – 6 फुट 2 इंच

शिक्षा – बेडफ़ोर्ड स्कूल

टेस्ट पदार्पण (कैप 630) – 1 मार्च 2006 बनाम भारत

एकदिवसीय पदार्पण (कैप 196) 28 जून 2006 बनाम श्रीलंका
अंतिम एकदिवसीय – 16 दिसंबर 2014 बनाम श्रीलंका

Batting and fielding averages
Mat Runs HS Ave SR 100 50 4s 6s Ct
Tests 152 12005 294 46.35 47.05 32 55 1380 11 156
ODIs 92 3204 137 36.4 77.13 5 19 363 10 36
T20Is 4 61 26 15.25 112.96 0 0 10 0 1
First-class 273 21540 294 48.08 50.85 61 101 281
List A 159 5840 137 40 79.89 12 34 66
T20s 32 892 100* 31.85 127.61 1 5 95 15 13
Bowling averages
Mat Wkts BBI BBM Ave Econ SR 4w 5w 10
Tests 152 1 1/6 1/6 7 2.33 18 0 0 0
ODIs 92
T20Is 4
First-class 273 7 3/13 30.14 4.48 40.2 0 0 0
List A 159 0 3.33 0 0 0
T20s 32



किसी भी बल्लेबाज़ के लिए किसी पूर्व क्रिकेटर द्वारा प्रशंसा किया जाना आसान नहीं है, खासकर कि तब, जब दोनों खिलाड़ी अलग-अलग देशों का हिस्सा हो | बड़ी बात तो ये है कि ये शब्द ऐसे बल्लेबाज़ के मुँह से आये, जिन्हे टेस्ट क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ सलामी बल्लेबाज़ों में गिना जाता है, जिस कारण इन शब्दों की अहमियत और भी बढ़ गयी है | विश्व क्रिकेट में कुक की तूती कुछ ऐसी बोलती है, कि उन्हें एक किंवदंती, या फिर कम-से-कम एक किंवदंती की राह चलते तो माना ही जा रहा है |”15,000 टेस्ट रन और 50 टेस्ट शतक एलेस्टेयर कुक की पहुंच से बाहर नहीं है” – सुनील गावस्कर, एलेस्टेयर कुक के बारे में |

इंग्लैंड जैसे देश में टेस्ट क्रिकेट में सलामी बल्लेबाज़ बनना कभी भी आसान नहीं रहा है – नई गेंद आमतौर पर तेज़ी से स्विंग करती है और क्रीज़ पर टिके रहने, और निरंतर रन बनाने के लिए एक सलामी बल्लेबाज़ को हुनर की आवश्यकता पड़ती है | लेकिन कुक एक मज़बूत तकनीक, शसक्त स्वभाव और धीरज के साथ इस खेल में आये है जिस कारण वे बल्लेबाज़ी के लिए प्रतिकूल परिस्थितियों का भी डटकर सामना कर पाते है, खासकर कि ऊँचे क्रम पर |

जो रुट – इंग्लैंड – रिकॉर्ड

टेस्ट क्रिकेट में कुक की रन बनाने की क्षमता को उनके बड़े स्कोरों से बेहतर तरीके से कोई और बात बयान नहीं कर सकती | क्रिकेट खेलने वाले किसी भी ब्रिटिश बल्लेबाज़ से अधिक टेस्ट शतक इनके नाम दर्ज है | शतकों से ज़्यादा काबिलेतारीफ है, रनों की उनकी भूख, जो कि शतक लगाने के बाद भी समाप्त नहीं होती | इंग्लैंड के बल्लेबाज़ी कोच – ‘ग्राहम गूच’ – ने अपने बल्लेबाज़ों को ज़ोर देते हुए कहा कि उन्हें ‘भीमकाय शतक’ लगाने चाहिए, न कि केवल शतक बनाकर खुश हो जाना चाहिए | कुक ने उनकी बातों पर प्रवीणता से ध्यान दिया और 150 से अधिक के सात स्कोर बनाये, जिसमे दो दोहरे शतक शामिल थे | 2011 में भारत के विरुद्ध बर्मिंघम में 294 रनों की उनकी मैराथन पारी ने उनके सारे गुणों का प्रदर्शन किया – धीरज, तकनीक, लम्बी बल्लेबाज़ी करने की उनकी क्षमता और उनकी क्लास | इसी विरोधी के विरुद्ध एक ‘रैंक टर्नर’ पिच पर मुंबई में बनाये गए उनके 190 रनों ने उन्हें एक अलग ही स्तर पर पहुंचा दिया |



किसी भी बल्लेबाज़ के लिए सबसे कड़ा इम्तिहान, खासकर कि यदि वो बल्लेबाज़ ब्रिटिश हो, तब आता है जब उनकी टीम ऑस्ट्रेलिया या भारत खेलने जाए | कंगारूओं से इसलिए क्योंकि इंग्लैंड की उनसे एक ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता (द एशेज) है, और भारत इसलिए क्योंकि इंग्लैंड को भारत के स्पिन गेंदबाज़ी के लिए मददगार पिचों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है | कुक ने न सिर्फ दोनों इम्तिहानों को विशिष्टता से पास किया, बल्कि दोनों महाद्वीपों पर चौकाने वाले आंकड़े भी खड़े किये |

केविन पीटरसन – इंग्लैंड – रिकॉर्ड

उनके पहले टेस्ट मैच से ही ये साफ़ हो गया था कि कुक वो खिलाड़ी थे जो कुछ बड़ा कर दिखाएंगे | उन्होंने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत भारत के विरुद्ध 2006 में एक शतक के साथ की, और आगे चलकर पाकिस्तान, वेस्ट इंडीज और बांग्लादेश के विरुद्ध भी अपने पहले मैचों में सैंकड़े जमाये, टेस्ट क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर के बाद वे 5000 रन बनाने वाले दूसरे सबसे युवा खिलाड़ी भी बने | 2008 में उनकी फॉर्म में गिरावट आयी, लेकिन अगले सीज़न तक वे उबर गए और विश्व क्रिकेट के मंच पर तेज़ी से चढ़ाई करने लगे | बल्ले से उनकी निरंतरता के कारण एंड्रू स्ट्रॉस के संन्यास लेने के बाद उनका कप्तान बनना तय ही था, और इस ज़िम्मेदारी के उनके कन्धों पर आने के बाद उनके खेल ने नई ऊचाइयों को छूना शुरू किया | कप्तान के रूप में अपने पहले सात टेस्ट मैचों में उन्होंने 6 शतक लगाए, एक आंकड़ा जो इस कारण से भी बहुत अद्भुत है कि 7 में से 6 टेस्ट भारतीय उप-महाद्वीप पर खेले गए थे |

कुक के अंदर परिस्थितियों और हालातों के हिसाब से खुद को बिना वक़्त ज़ाया किये ढाल लेने की एक अद्भुत क्षमता है |कट और पुल दोनों ही इनके पसंदीदा शॉट है, और इस कारण से वे शॉर्ट पिच गेंदबाज़ी को भी आसानी से खेल पाते है | इस बात से ऑस्ट्रेलिया में उनकी सफलता का भी एक कारण ज़ाहिर हो जाता है – ऑस्ट्रेलिया में उन्होंने 10 मैचों में 1042 रन बनाये है, जिसमें 4 शतक शामिल है और उनका औसत भी 65 के ऊपर रहा है | जहाँ तगड़े बैक-फुट के खेल ने उन्हें ऑस्ट्रेलिया के उछाल भरे पिचों पर रन बनाने में सहायता की है, वहीं फ्रंट-फुट पर आकर अपने कद का इस्तेमाल करने के कारण उन्होंने स्पिन गेंदबाज़ी को मददगार एशियाई पिचों पर भी सफलता का स्वाद चखा – उप-महाद्वीप पर 56.31 के औसत से 18 मैचों में उनके नाम 1802 रन है – जो कि किसी भी ब्रिटिश खिलाड़ी के लिए स्पिन करती पिचों पर अविश्वसनीय आंकड़े है | ऊंचे क्रम पर उनकी बेहतरीन बल्लेबाज़ी की बदौलत ही 2011 में इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया से एशेज जीती थी | भारत में पहले तीन टेस्ट मैचों में उन्होंने तीन शतक लगाए थे और 2012 में इंग्लैंड के भारत में टेस्ट श्रृंखला जीतने में उनका बड़ा योगदान था | दोनों ही मौकों पर उन्होंने सर्वाधिक रन बनाये थे और मैन ऑफ़ द सीरीज बने थे – एक खबर जो खुद ही सब बयान करती है |



एलिस्टेयर कुक का एक गुण, जो कि उनकी बाकी खूबियों के सामने अनदेखा निकल जाता है – वो था क्रिकेट के विभिन्न प्रारूपों में खुद को ढालना | तकनीकी रूप से सही बल्लेबाज़ होने के कारण उनपर यह ठप्पा लग गया था कि वे केवल खेल के लम्बे प्रारूपों में कमाल दिखा सकते है | लेकिन 2011 के विश्व कप के बाद उन्हें कप्तानी दी जाने के बाद उन्होंने अपने सभी आलोचकों को गलत साबित कर दिया | उनके 5 एकदिवसीय शतकों में से 4 कप्तान के रूप में आये थे, और कप्तान के तौर पर उनका औसत (47) किसी भी आम खिलाड़ी के औसत (40) से अधिक है |

निश्चित रूप से, कुक के लिए 2013 एक कप्तान के रूप में बहुत सफल वर्ष रहा, जब उन्होंने अपने दल को घर पर 3-0 से एशेज जीत दिलाई और टीम को 2013 की चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल मुक़ाबले तक भी पहुंचाया |

हालाँकि, ब्रिस्बेन में खेले गए अगले एशेज के पहले मैच में कुक और उनकी टोली का हकीकत से सामना हुआ जब उनके चिर-प्रतिद्वंद्वियों ने उन्हें 381 रनों से मात दी | कुक आगे चलकर 100 टेस्ट मैच खेलने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने, और पर्थ के तीसरे एशेज टेस्ट में सचिन तेंदुलकर को मात दी | हालाँकि, टीम का पतन जारी रहा और उन्हें एशेज में कंगारूओं के हाथो 5-0 की शर्मनाक हार झेलनी पड़ी | एकदिवसीय मैचों में भी उनके हालात खस्ता ही रहे और वे केवल एक ही मैच जीत पाए | उनकी निष्क्रिय कप्तानी पर उठे सवालों और कप्तानी छोड़ने के लिए उन पर पड़ रहे दबाव के चलते कुक ने 2014 की शुरुआत का वेस्ट इंडीज दौरा छोड़ना मुनासिब समझा |

हाशिम अमला – दक्षिण अफ्रीका – रिकॉर्ड

एक खिलाड़ी के तौर पर ही, लेकिन घर के बाहर एक एशेज जीत दर्ज करने के बाद, कुक ने घर में 2013 की एशेज जीत का कारनामा 2015 में भी दोहराया | बल्लेबाज़ के रूप में उन्होंने कोई शतक तो नहीं लगाया, लेकिन उनका योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण रहा | इसके बाद उन्होंने पाकिस्तान के विरुद्ध 263 रनों की विशाल पारी खेली जिसकी मदद से इंग्लैंड पाकिस्तान को उनके नए किले, अबु धाबी, में भेद करने में लगभग कामयाब ही हो गया | यह मामूली सांत्वना ही थी कि आगे चलकर उनकी टीम अगले दो टेस्ट और श्रृंखला भी हार गयी |

कुक ने इस शिकस्त को पीछे छोड़ा और 2015-16 की शरद ऋतु में दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध 2-1 से अद्भुत जीत दर्ज की | इसका मतलब हुआ कि उन्होंने दक्षिण अफ्रीका को भी अपने विदेशी संग्रह में जोड़ लिया जिसमे भारत का नाम पहले ही शामिल था | 2016 उनके लिए एक कठिन वर्ष साबित हुआ – बल्ले से उनका प्रदर्शन ख़राब तो नहीं रहा, और उन्होंने 1270 रन भी बनाये जिसमे 2 टेस्ट शतक भी शामिल थे, लेकिन उनकी कप्तानी के कड़े इम्तिहान हुए | दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध सफलता के बाद उन्हें घर पर श्री लंका के विरुद्ध आसान जीत तो मिली थी, लेकिन उसके बाद सब उथल-पुथल हो गया |

घर पर पाकिस्तान के विरुद्ध इंग्लैंड श्रृंखला को 2-2 की बराबरी पर रोकने में कामयाब रहा लेकिन अभी और बुरा वक़्त आना बाकी था | पहली बार उन्हें बांग्लादेश के विरुद्ध एक टेस्ट मैच में शिकस्त मिली और उसके बाद भारत के हाथों 4-0 की करारी हार | कुक – ने बल्लेबाज़ के रूप में भारत में संघर्ष किया और रविंद्र जडेजा की बाए-हाथ की स्पिन ने उन्हें बहुत परेशान किया – वे पूरी श्रृंखला में 5 बार रविंद्र जडेजा के शिकार बने | श्रृंखला के अंत में कुक से कप्तानी छोड़ने की मांग की जाने लगी, और कुक के हाव-भाव से भी यह लगने लगा कि इंग्लैंड की अगुवाई करते-करते वे थक चुके है |

आंड्र्यू स्ट्रौस – इंग्लैंड – रिकॉर्ड

जैसी आशा थी, कुक ने इंग्लैंड की रिकॉर्ड 59 टेस्ट मैचों में कप्तानी करने के बाद 6 फरवरी 2017 को कप्तान के पद से इस्तीफ़ा दे दिया | उनके इस रिकॉर्ड में 2013 में घर पर और 2015 में बाहर एशेज जीत और साथ-ही-साथ भारत और दक्षिण अफ्रीका में श्रृंखला विजय शामिल थी | हालाँकि, कुक ने खेल के सबसे लम्बे प्रारूप में एक बल्लेबाज़ के तौर पर खेलते रहने की तत्परता दिखाई है |

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Alastair Cook Records | England | CricketinHindi.com
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