एंड्रयू फ़्लिंटॉफ़ – इंग्लैंड – रिकॉर्ड

Andrew Flintoff Records in Hindi

पूरा नाम – एंड्रयू फ्लिंटॉफ

जन्म – 6 दिसंबर, 1977, प्रेस्टन, लंकाशायर

प्रमुख टीमें – इंग्लैंड, ब्रिस्बेन हीट, चेन्नई सुपर किंग्स, आईसीसी विश्व इलेवन, लंकाशायर

उपनाम – फ्रेडी

भूमिका – ऑलराउंडर

बल्लेबाज़ी शैली – दाएं हाथ के बल्लेबाज़

गेंदबाजी शैली – दाएं हाथ के तेज-मध्यम

ऊँचाई – 6 फुट 4 इंच

शिक्षा – रिबल्टन हॉल हाई स्कूल

टेस्ट पदार्पण (कैप 591) – 23 जुलाई 1998 बनाम दक्षिण अफ्रीका
अंतिम टेस्ट – 20 अगस्त 2009 बनाम ऑस्ट्रेलिया

एकदिवसीय पदार्पण (कैप 154) – 7 अप्रैल 1999 बनाम पाकिस्तान
अंतिम एकदिवसीय – 3 अप्रैल 2009 बनाम वेस्टइंडीज

Batting and fielding averages
Mat Runs HS Ave SR 100 50 4s 6s Ct
Tests 79 3845 167 31.77 62.04 5 26 513 82 52
ODIs 141 3394 123 32.01 88.82 3 18 308 93 47
T20Is 7 76 31 12.66 126.66 0 0 7 2 5
First-class 183 9027 167 33.8 15 53 185
List A 282 6641 143 29.78 6 34 106
T20s 39 683 93 22.76 142.88 0 3 63 31 19
Bowling averages
Mat Wkts BBI BBM Ave Econ SR 4w 5w 10
Tests 79 226 5/58 8/156 32.78 2.97 66.1 11 3 0
ODIs 141 169 5/19 5/19 24.38 4.39 33.2 6 2 0
T20Is 7 5 2/23 2/23 32.2 6.44 30 0 0 0
First-class 183 350 5/24 31.59 2.91 65.1 4 0
List A 282 289 5/19 5/19 22.61 4.16 32.5 10 2 0
T20s 39 39 4/12 4/12 21.2 7.55 16.8 1 0 0

ग्रेट ब्रिटेन में, 6 दिसंबर, 1977 को जन्मे, एंड्रयू फ्लिंटॉफ को इस पीढ़ी के इयान बॉथम के रूप में देखा गया था। बॉथम और फ्लिंटॉफ के बीच सामानताये ज़रूर हैं – 1981 में बॉथम ने अकेले इंग्लैंड में एशेज को जीता और फ्लिंटॉफ ने 24 साल बाद बिलकुल यही किया। वे दोनों मैदान में उग्र और मैदान के बाहर विवादास्पद थे।

फ़्लिंटॉफ़, औसत पर, बल्ले से 31 और गेंद से 32 रन बनाते है मगर यह उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं आखिर वे इंग्लैंड में उपदेवता माने जाते है। कठिनाइयों में भी इंग्लैंड को प्रोत्साहित करने की उनकी क्षमता उनको औरों से अलग करती है। उन्होंने अपने व्यवसाय में क्रिकेट पहली बार 1998 में खेला, दक्षिण अफ्रीका के साथ। उनकी शुरुआत बहुत सफल नहीं थी। लीड्स में, उन्होंने अपना पहला रन बनाया, क्रिकेट दुनिया में प्रवेश कर पाँच साल बाद और वो भी पांचवी पारी में। अपने पहले मैच के बाद उन्हें निकाल दिया गया और उन्हें वापस टीम में शामिल होने के लिए एक साल इंतज़ार करना पड़ा था।

केविन पीटरसन – इंग्लैंड – रिकॉर्ड

फ्लिंटॉफ ने कार्यक्षम साबित किया ज़बरदस्त 135 रन के साथ नेटवेस्ट ट्राफी क्वार्टर फाइनल में। तथापि संचालन ने फ्लिंटॉफ की तंदरुस्ती व वज़न के प्रति निराशा व्यक्त की। फ्रेड्डी, जिस नाम से वह सामान्य रूप में जाने जाते है, का पुनरागमन हुआ दक्षिण अफ्रीका के दौरे में। उन्होने, दोनों बल्ले और गेंद से बहुत परिश्रम किया जिसके बावजूद वे 19 पारियों में केवल 259 रन और 13 विकेट ले पाए। 2001, भारत के दौरे पर, उन्हें अत्यंत कष्ट सहना पड़ा जिसके कारन वे बस 8 रन बना पाए। इस तरह की असफलता के बाद वे अपने आपको संभाल नहीं पाए और ड्रेसिंग रूम में उनकी आँखों से आँसू आ गए। इस घटना के कारण वे मुंबई में हो रहे अंतिम मैच को इतने उमंग में खेले कि उन्होंने आखिरी ओवर में 11 रन का बचाव किया, साथ ही साथ जवागल श्रीनाथ और अनिल कुंबले को आउट कर दिया। जीतने की खुशी में फ़्लिंटॉफ़ ने अपनी शर्ट उतार दी।

बेन स्टोक्स – इंग्लैंड – रिकॉर्ड

उन्होंने अपनी निपुण बल्लेबाजी का प्रदर्शन न्यूज़ीलैंड के दौरे में किया जब उन्होंने 137 रन की पारी खेली और अपना पहला टेस्ट शतक जमाया। 2003 की गर्मी में, दक्षिण अफ्रीका के साथ खेले मैच में फ्लिंटॉफ की सर्वोत्तम बल्लेबाजी देखने को मिली, जब उन्होंने आक्रामक 423 रन बनाये। उन्होंने अपनी गेंदबाज़ी को सुधारा और अपनी टीम के गेंदबाजो में प्रमुख बने, हालाँकि वे ज़्यादा विकेट नहीं लेते थे। फ्रेड्डी ने एक ही पारी में 5 से ज़्यादा विकेट 2004 के वेस्टइंडीज दौरे में लिया। उनका योगदान 5/58 रहा जो इंग्लैंड के गर्वित जीत का प्रतीक था।

2004 के गर्मी का मौसम, दोनों इंग्लैंड और फ्लिंटॉफ के लिए सुनहरे साबित हुए। एक तरफ फ्लिंटॉफ ने 603 रन बनाये और 24 विकेट लिए तो दूसरी तरफ इंग्लैंड ने दोनों वेस्ट इंडीज और न्यूज़ीलैंड को बेरहमी से हराया। 2005 में फ्लिंटॉफ ने जैसा खेल खेला वो उत्तमता से कुछ कम नही था, और उन्हें बॉथम के दर्जे तक पहुँचाने वाला था। उन्होंने केवल रन बनाकर विकेट नहीं लिए बल्कि अपनी टीम को निष्कलंक रूप में खेलने के लिए प्रोत्साहित भी किया। उनके निष्पादन को देखकर दुनिया दंग रह गयी क्योंकि इंग्लैंड ने उस टीम को हराया जिनको दुनिया क्रिकेट का चैंपियन मानती थी और एशेज को 19 सालों बाद इंग्लैंड लौटाया। लॉर्ड्स में विफल होने के बाद फ़्लिंटॉफ़ ने बर्मिंघम में 68 और 73 रनों की पारी खेल कर अपनी अहमियत का अहसास कराया. रनों से ज़्यादा, उन रनों की गति और समय का प्रभाव था जिससे इंग्लैंड को सफलता मिली.

आंड्र्यू स्ट्रौस – इंग्लैंड – रिकॉर्ड

भारत के 2006 के दौरे के लिए फ़्लिंटॉफ़ को इंग्लैंड टीम का कप्तान घोषित किया गया और उनकी कप्तानी की सराहना भी हुई जब उन्होंने श्रंखला 1-1 की बराबरी पर समाप्त की. हालाँकि उनकी ये सफलता ज़्यादा नहीं चल पाई और उनके नेतृत्व में एशेज के लिए ऑस्ट्रेलिया गई इंग्लैंड टीम 5-0 के शर्मनाक अंतर से हार गई. एकदिवसीय श्रंखला में उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करते हुए फाइनल मुकाबले में मेज़बान ऑस्ट्रेलिया पर जीत दर्ज की.

2007 विश्व कप के दौरान फ्लिंटॉफ विवाद में फसे थे। वे शराब के नशे में थे और उनको एक डूबती नाव से बचाना पड़ा। यह घटना ‘फ्रेडलो घटना’ के नाम से प्रचलित है। उन्हें उप-कप्तानी से निकाला गया, और उनकी भूमिका भी बहुत छोटी रही क्योंकि इंग्लैंड बहुत जल्दी विश्व कप से बहार हो गया. फ़्लिंटॉफ़ का क्रिकेट करियर चोटों से ग्रस्त रहा और 2009 की एशेज के लिए उन्होंने अपनी सारी ऊर्जा एकत्र की लेकिन ये आखिरी मौका था जब इंग्लैंड के लिए उन्हें टेस्ट क्रिकेट में देखा गया. सितम्बर 2010 में फ्लिंटॉफ ने क्रिकेट की सारी शैली से निवृत्त होने के फैसले को घोषित किया। 2012 में उन्होंने पुनः बॉक्सिंग में प्रवेश किया और अमेरिका के रिचर्ड डॉसन को हराया।

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