बिशन सिंह बेदी – भारत – रिकॉर्ड

Bishen Singh Bedi records in Hindi

पूरा नाम – बिशन सिंह बेदी

जन्म – 25 सितंबर 1946 अमृतसर, पंजाब

प्रमुख टीमें – भारत, दिल्ली, नॉर्थम्प्टनशायर, उत्तरी पंजाब

बल्लेबाज़ी शैली – दाएं हाथ के बल्लेबाज़

गेंदबाजी शैली – धीमी बाएं हाथ से रूढ़िवादी

अन्य – कोच

टेस्ट पदार्पण (कैप 113) – 31 दिसंबर 1966 बनाम वेस्ट इंडीज
अंतिम टेस्ट – 30 अगस्त 1979 बनाम इंग्लैंड

एकदिवसीय पदार्पण (कैप 2) – 13 जुलाई 1974 बनाम इंग्लैंड
अंतिम एकदिवसीय – 16 जून 1979 बनाम श्रीलंका

बल्लेबाजी और क्षेत्ररक्षण का औसत													 	मॅच 	पारी	नाबाद	रन	सर्वाधिक स्कोर	औसत	गेंद खेलीं	स्ट्राइक रेट	शतक	अर्धशतक	छ्क्के	कॅच	स्टमपिंग टेस्ट	67	101	28	656	50*	8.98			0	1	3	26	0 एकदिवसीय	10	7	2	31	13	6.2	70	44.28	0	0	0	4	0 प्रथम श्रेणी	370	426	111	3584	61	11.37			0	7		172	0 लिस्ट ए	72	45	13	218	24*	6.81			0	0		21	0
Bishen-Singh-Bedi-Batting-and-Fielding-records-in-Hindi
गेंदबाज़ी औसत													 	मॅच 	पारी	गेंदें	रन	विकेट	बेस्ट/पारी	बेस्ट/मॅच	औसत	रन प्रति ओवर	स्ट्राइक रेट	4 विकेट	5 विकेट	10 विकेट टेस्ट	67	118	21364	7637	266	7/98	10/194	28.71	2.14	80.3	13	14	1 एकदिवसीय	10	10	590	340	7	2/44	2/44	48.57	3.45	84.2	0	0	0 प्रथम श्रेणी	370		90354	33843	1560	7/5		21.69	2.24	57.9		106	20 लिस्ट ए	72		3686	2087	71	5/30	5/30	29.39	3.39	51.9	1	1	0
Bishen-Singh-Bedi-Bowling-records-in-Hindi

बिशन सिंह बेदी का जन्म उस समय हुआ था जब भारत ने अंग्रेज़ों के विरुद्ध अहिंसा आंदोलन छेड़ा हुआ था | वही अहिंसा का विश्वास उनकी गेंदबाज़ी को भी शायद प्रभावित कर गया | बल्लेबाज़ों को छकाने के लिए फ्लाइट और चतुराई के अपने प्राकृतिक उपहारों का उपयोग वे उस समय करते थे जब तेज़ गेंदबाज़ी और भयानक बाउंसरों को तवज्जो मिलती थी | अमृतसर पंजाब में 25 सितम्बर 1945 को जन्मे बिशन ने अपनी राजकीय टीम,उत्तरी पंजाब के लिए 15 वर्ष की उम्र से ही खेलना शुरू कर दिया था | अपने घरेलु राज्य के लिए खेलते हुए अपने हुनर में बढ़ोतरी कर वे राजधानी दिल्ली पहुंचे और 1981 में अपने संन्यास लेने तक इसी टीम का प्रतिनिधित्व किया |

अपना राष्ट्रीय पदार्पण उन्होंने 21 वर्ष की उम्र में वेस्ट इंडीज के विरुद्ध कोलकाता में किया और अगले 12 सालों में, जिनमें वे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट का हिस्सा थे, भारत की स्पिन चौकड़ी के एक हिस्से के रूप में जाने जाने लगे | इंग्लैंड के काउंटी क्लब नॉर्थैम्पटनशायर के लिए भी उन्होंने काफी क्रिकेट खेली | आज तक, सभी भारतीय गेंदबाज़ों में उनके नाम सर्वाधिक प्रथम-श्रेणी विकेट है, एक अद्भुत आंकड़ा जो कि 370 प्रथम-श्रेणी मैचों में 1560 तक पहुंच गया था |

स्पिन गेंदबाज़ी के निरीक्षक और विशेषज्ञ हमेशा ही बेदी की गेंदबाज़ी का वर्णन खूबसूरत शब्दों में करते है : एक धीमा और नपा-तुला रन उप, हलकी उंगलिया, कलाइयां और फ्लाइट का एक बड़ा टुकड़ा | जिन लोगों ने उन्हें गेंदबाज़ी करते हुए देखा है वे तो यहां तक मानते है कि बेदी के पास गेंद के गर्त में सूक्ष्म बदलाव लाने की काबिलियत थी और तो और कुछ गेंदें हवा में कुछ पलों के लिए रुक जाया करती थी | एक बल्लेबाज़ के लिए इतना कुछ समझ पाना अस्मभव होता था | बेदी को बेदाग नियंत्रण और महान लय में गेंदबाज़ी करने के लिए जाना जाता था, और कप्तान के लिए वे एक महत्वपूर्ण संपत्ति जैसे थे जिसका कप्तान दिन-प्रतिदिन इस्तेमाल करते थे | बेदी और उनकी इस चौकड़ी की प्रतिभा कुछ ऐसी थी कि भारत अपने लाइन-उप में केवल एक तेज़ गेंदबाज़ का चुनाव करता था, और गावस्कर और वेंगसरकर जैसे पार्ट-टाइम गेंदबाज़ गेंद की चमक हटाने में मदद करते थे , जिसके बाद स्पिनरों की बारी आती थी |

जिस पीढ़ी के लिए फ्लाइट कराने वाले आखिरी महान गेंदबाज़ शेन वार्न थे,उसे शायद बेदी की गेंदबाज़ी शैली समझने में कठिन लगे | इस पगड़ी वाले खब्बू स्पिनर के बारे में एक रोचक आंकड़ा है जिससे शायद उनके प्रभुत्व का ज्ञान लोगों को हो जाए: उनके सर्वश्रेष्ठ आंकड़े 10/194 ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध 1978/79 में आये, ऐसे विकेट पर जिसे तेज़ गेंदबाज़ों का स्वर्ग माना जाता था | 67 टेस्ट मैचों में बेदी के 266 विकेट 28.71 के कृपण औसत पर आये | ऑस्ट्रेलिया में 77/78 की श्रृंखला में बेदी ने 23.87 के औसत से 31विकेट चटकाए, जो कि अपने आप में एक उपलब्धि थी |

बेदी के करियर का एक और अध्याय भारतीय टीम की कप्तानी को शामिल करता है | 1976 में मंसूर अली खान पटौदी के बाद वे भारत के कप्तान बने | उनके कप्तानी के अधीन, भारत ने उस समय के चौथी पारी के सर्वाधिक लक्ष्य-406 रन- का पोर्ट ऑफ़ स्पेन में वेस्ट इंडीज के विरुद्ध सफलतापूर्वक पीछा किया |अगले टेस्ट में, जाहिर तौर पर, वेस्ट इंडीज ने 4 -धार वाला आक्रामक पेस आक्रमण लगाकर इसका जवाब दिया | इस दरवानी गेंदबाज़ी से उनके कुछ बल्लेबाज़ों के चोटिल होने पर उन्होंने 306 रनों पर पहली पारी घोषित कर दी | यह नाटक आगे भी चलता रहा जब वेस्ट इंडीज गेंदबाज़ों को तरस नहीं आया और वे लगातार बाउंसर पे बाउंसर डालते रहे | बेदी ने इस पैंतरे पर सवाल उठाये और केवल दो विकेट पर पारी घोषित कर दी जिस कारण घरेलु टीम को आसान जीत मिल गयी | यह एक पृथक वाक़या नहीं था |

जब एक एकदिवसीय मैच में भारत को पाकिस्तान के विरुद्ध जीतने के लिए 14 गेंदों पर 23 रनों की आवश्यकता थी, तब उन्होंने अपनी टीम को मैच से बाहर निकाल लिया जब सरफ़राज़ नवाज़ खतरनाक अनुपात में बाउंसर डालने लगे और ऐसा करने वाले विश्व भर में पहले कप्तान बन गए | एक और वाक़या इंग्लैंड टीम के 76/77 के दौरे से जुड़ा हुआ था जब बेदी ने मद्रास टेस्ट के दौरान जॉन लीवर पर वेसिलीन से अवैध रूप से गेंद पर पोलिश लगाने का आरोप लगाया | बेदी को बोलचाल में उनके आक्रामक रवैये के लिए जाना जाने लगा, जितना कि उन्हें अपनी कोमल स्पिन गेंदबाज़ी के लिए जाना जाता था |

बेदी को 1990 में भारतीय क्रिकेट टीम का पूर्णकालिक कोच नियुक्त किया गया | एक भयावह दौरे के बाद उन्होंने उत्तेजक टिपण्णी की और कहा कि भारतीय टीम समुद्र में डूबा दिए जाने के लायक है |

आज, बेदी क्रिकेट की आधुनिक प्रवृत्तियों के एक मुखर आलोचक है | टी20 क्रिकेट के वे प्रमुख आलोचकों में से है और प्रमुख भारतीय क्रिकेटरों जैसे कि सौरव गांगुली और हरभजन सिंह की उन्होंने काफी निंदा की है, सौरव गांगुली से झड़प उन्हें मुरली कार्तिक के साथ उनके व्यवहार को लेकर है | वे गेंदबाज़ों के लिए बनाये गए 15 डिग्री के नियम के खिलाफ होने वाले धर्मयोद्धाओं में से एक है, और उन्हें मुरलीथरन द्वारा नोटिस भी भेजा जा चुका है, जिन्हे वे एक ‘भाला फेंकने वाला’ मानते है | बात जो भी हो, बेदी की बात विश्व क्रिकेट में मुख्य तौर पर सुनी जाती है |

उद्धरण –

‘हमें ये बताइएं जॉन, कि आपने इस ऑस्ट्रेलियाई टीम को महान बनाया है या इस टीम ने आपको ?’-भूतपूर्व ऑस्ट्रेलिआई कोच जॉन बुचनान के बारे में चर्चा करते हुए

‘मुरली टेस्ट क्रिकेट में 1000 विकेट भी पूरे कर ले लेकिन मेरी आँखों में उन्हें फिर भी रन-आउट ही माना जायेगा | वो एक श्रीलंकाई लुटेरे है जो कि एक सपनों के कारीगर शेन वार्न के स्तर तक पहुंचना चाहते है’ श्रीलंकाई ऑफ स्पिनर मुरलीथरन की चर्चा करते हुए

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Bishen Singh Bedi Records | India | CricketinHindi.com
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