गुंडप्पा विश्वनाथ – भारत – रिकॉर्ड

Gundappa-Viswanath-Records

पूरा नाम – गुंडप्पा विश्वनाथ रंगनाथ

जन्म – 12 फरवरी, 1949, भद्रावती, मैसूर

प्रमुख टीमें – भारत, कर्नाटक, मैसूर

बल्लेबाजी की शैली – राइट-हैंड बैट

गेंदबाजी की शैली – लेग-ब्रेक

टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण (कैप 124) – 15 नवंबर 1969 में बनाम ऑस्ट्रेलिया
अंतिम टेस्ट – 30 जनवरी 1983 बनाम पाकिस्तान

वनडे कैरियर की शुरुआत (कॅप 10) – 3 अप्रैल 1974 बनाम इंग्लैंड
अंतिम वनडे – 2 जून 1982 बनाम इंग्लैंड

Batting and fielding averages
Mat Runs HS Ave SR 100 50 6s Ct
Tests 91 6080 222 41.93 14 35 6 63
ODIs 25 439 75 19.95 52.89 0 2 3
First-class 308 17970 247 40.93 44 89 227
List A 59 1463 108* 27.09 1 9 13
Bowling averages
Mat Wkts BBI BBM Ave Econ SR 4w 5w
Tests 91 1 1/11 1/11 46 3.94 70 0 0
ODIs 25
First-class 308 15 2/21 48.6 3.81 76.4 0
List A 59 4 4/13 4/13 12.25 5.88 12.5 1 0




गुंडप्पा विश्वनाथ बल्ले के साथ एक सच्चे कलाकार थे – उनके शॉट्स, ख़ासतौर पर मज़बूत कलाई से खेले जाने वाला लेट कट दैविक था. विश्वनाथ तेज़ गेंदबाज़ और स्पिन्नर दोनों के खिलाफ निपुण थे. तेज़ गेंदबाज़ों को वे बॅक-फुट पर खेलते तो स्पिन्नरों के खिलाफ चहलकदमी करके आगे बढ़ते. और उन्होने हमेशा ज़रूरत के समय पर बड़ा योगदान दिया. हालाँकि आँकड़ों से भले ही ऐसा ना लगे लेकिन 70 के दशक की भारतीय टीम में विश्वनाथ उतने ही महत्वपूर्ण थे जितने की सुनील गावस्कर. 1969-70 में अपने पदार्पण मैच में शतक से लेकर उन्होने हमेशा दबाव की स्थिति में किसी भी अन्य भारतीय बल्लेबाज़ से ज़्यादा बेहतर प्रदर्शन किया.

सुनील गावस्कर – भारत – रिकॉर्ड

सबसे यादगार पारी उन्होने 1974-75 में मद्रास में खेली जब उनके अविजित 97 रनों की बदौलत भारत ने एंडी रॉबर्ट्स जैसे ख़तरनाक गेंदबाज़ों का सामना करते हुए मैच जीता. विश्वनाथ ने हमेशा उन पिचों पर ज़्यादा बेहतर प्रदर्शन किया जिन पर अन्य बल्लेबाज़ विफल रहते थे, जैसे की मद्रास की उछाल भारी पिच पर वेस्ट इंडीज़ के सामने भारत के 255 रनों में से 124 विश्वनाथ के थे, जिसके दम पर भारत ने मैच जीता. न्यूज़ीलैंड के क्राइस्ट-चर्च की तेज़ पिच पर 1975-76 में 83 और 79 रन बनाए.



विश्वनाथ ने हमेशा खेल सच्ची भावना से खेला और उनके लिए ऐसे किसी भी शतक का महत्व नही था जो टीम को जिता ना पाया हो. अपने अंतरराष्ट्रीय जीवन में उन्होने केवल एक बार अंपाइयर के निर्णय के विपरीत कुछ किया और वो भी इंग्लैंड के बॉब टेलर को 1979-80 के गोल्डन जुबली मैच में वापस बुलाना था क्योंकि वे आउट नही थे पर अंपाइयर ने उन्हे आउट दे दिया था. इसके फलस्वरूप भारत मैच हार गया, और कप्तानी भी विश्वनाथ ही कर रहे थे, लेकिन उनके लिए ज़्यादा ज़रूरी खेल को सही भावना से खेलना था.

दिलीप वेंगसरकर – भारत – रिकॉर्ड

विश्वनाथ ने 1983 में टेस्ट क्रिकेट से सन्यास लिया और 1999-2004 तक आईसीसी के मैच रेफ़री पद पर नियुक्त रहे. विश्वनाथ भारतीय राष्ट्रीय चयन समिति के चेयरमैन भी रहे और भारतीय क्रिकेट टीम के मॅनेजर पद पर भी नियुक्त रहे. विश्वनाथ राष्ट्रीय क्रिकेट अकॅडमी में कोचिंग से भी जुड़े रहे हैं. उनकी शादी सुनील गावस्कर की बहन कविता से हुई. सुनील गावस्कर ने अपने पुत्र रोहन का मध्य नाम जय्विश्व, जयसिम्हा और विश्वनाथ के सम्मान में रखा.

गुंडप्पा विश्वनाथ को 2009 में बीसीसीआई ने कर्नल सी के नायडू लाइफ्टाइम अचीवमेंट खिताब से सम्मानित किया जो भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े खिताबों में शामिल है.

कप्तानी

विश्वनाथ ने 1979-80 में संक्षिप्त रूप से भारतीय कप्तान के रूप में भी कार्य किया था। जिन दो मैचों में उन्होंने कप्तानी की, उनमे से एक ड्रा रहा था, और दूसरे में टीम को हार का सामना करना पड़ा था। दूसरा टेस्ट इंग्लैंड के खिलाफ भारत का स्वर्ण जयंती टेस्ट था। अपने करियर के दौरान विश्वनाथ अपने निष्पक्ष खेल की वजह से काफी प्रसिद्ध थे, और इस मैच में भी इस बात को उन्होंने तब साबित कर दिया जब उन्होंने बॉब टेलर को क्रीज पर वापस बुला लिया, जबकि अंपायर ने उन्हें पहले ही आउट करार दे दिया था। टेलर ने वापस आने के बाद इंग्लैंड के लिए कुछ महत्वपूर्ण रन बनाये, जिससे उन्हें मैच जीतने में काफी सहायता मिली।

सेवानिवृत्ति के बाद

विश्वनाथ 1983 में टेस्ट क्रिकेट से सेवानिवृत्त हुए और बाद में 1999 से 2004 तक आईसीसी मैच रेफरी के रूप में भी काम किया। वह राष्ट्रीय चयन समिति के अध्यक्ष भी रहे और उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के मैनेजर के रूप में भी काम किया। वह एनसीए में क्रिकेट कोचिंग में भी शामिल हैं। उन्होंने सुनील गावस्कर की बहन कविता से शादी की है और वे अपने बेटे दैविक के साथ बेंगलुरु में रहते हैं। गावस्कर ने अपने बेटे रोहन जयविश्व गावस्कर का नाम रोहन कन्हाई (वेस्टइंडीज़ के पूर्व कप्तान) और जयसिंह और विश्वनाथ के नाम के सम्मान में रखा।

मान्यताएँ और पुरस्कार

विश्वनाथ को बीसीसीआई द्वारा सन 2009 में कर्नल सी के नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो भारतीय क्रिकेट में दिए जाने वाले सर्वोच्च पुरस्कारों में से एक है।

गुंडप्पा विश्वनाथ के भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर शतक:

Test Centuries outside of Indian Subcontinent
No. Score 4s 6s Against Venue Date Result
1 112 15 0 West Indies Queens Park Oval, Port of Spain, Trinidad and Tobago 7 April 1976 India won by 6 wickets
2 113 14 0 England Lord’s Cricket Ground 2 August 1979 Draw
3 114 11 0 Australia Melbourne Cricket Ground 7 February 1981 India won by 59 runs

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