मंसूर अली खान पटौदी (नवाब पटौदी) – भारत – रिकॉर्ड

Mansur Ali Khan Pataudi (Nawab of Pataudi) Records in Hindi

पूरा नाम – मंसूर अली खान पटौदी (नवाब पटौदी)

जन्म – 5 जनवरी, 1941, भोपाल, मध्य प्रदेश

मृत्यु -22 सितंबर, 2011, सर गंगा राम अस्पताल, दिल्ली (70 वर्ष 260 दिन)

प्रमुख टीमें – भारत, दिल्ली, हैदराबाद (भारत), ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, ससेक्स

एम ए के पतौडी के रूप में भी जाना जाता है

बल्लेबाज़ी शैली – दाएं हाथ के बल्लेबाज़

गेंदबाजी शैली – दाएं हाथ के मध्यम

शिक्षा – विनचेस्टर

Batting and fielding averages
Mat Runs HS Ave 100 50 6s Ct St
Tests 46 2793 203* 34.91 6 16 19 27 0
First-class 310 15425 203* 33.67 33 75 208 0
List A 7 210 51 35 0 1 4 0
Bowling averages
Mat Wkts BBI BBM Ave Econ SR 4w 5w
Tests 46 1 1/10 1/10 88 4 132 0 0
First-class 310 10 1/0 77.6 3.9 119.2 0
List A 7

पटौदी के नवाब, भारत के महानतम कप्तानों में से एक है। उन्होंने कप्तान की भूमिका तब ग्रहण की, जब वे सिर्फ 21 साल के थे और उन्होंने 46 में से 40 कसौटियों में भारत का नेतृत्व किया था। यह किसी ऐसे व्यक्ति के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि थी, जिसने एक कार दुर्घटना में अपनी दाई आंख खो दी थी।

उनकी कप्तानी में, 1967 में भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ अपनी पहली विदेशी टेस्ट जीत हासिल की।



भारत ने सीरीज 3-1 से जीती और उन्हें हमेशा ऐसे शक्स के तौर पर याद किया जाएगा जिसने टेस्ट मैचों में अपनी पहली श्रृंखला जीत के लिए भारत का नेतृत्व किया।

पटौदी उस वर्ष के विस्डेन क्रिकेटर भी रहे थे।

विजय मर्चेंट – भारत – रिकॉर्ड

पटौदी के समय में, भारत ने अपने हारे हुए के टैग को छोड़ा और धीरे-धीरे अपनी रूढ़िवादी मानसिकता से बाहर निकल गया। पटौदी का मानना ​​था कि भारत को अपनी ताकत से खेलने की जरूरत है और इस तरह से वे 4 फिरकी गेंदबाज़ो के साथ हमला करने पर विश्वास रख़ते थे ।

पटौदी ने 35 के औसत से 2793 रन बनाये और छह शतक बनाए जिनमें से सबसे बड़ा शतक 1964 में इंग्लैंड के ख़िलाफ नाबाद 203 रन था।

हालांकि उनका टेस्ट औसत सिर्फ 34 का था, वह एक निड़र और आक्रामक बल्लेबाज थे, अपने शॉट्स ख़ेलने में कभी हिचकिचाते नही थे। उनकी आक्रामक मानसिकता ने कप्तानी में उन्हे अलग किया और साथ ही उन्होंने उन 40 में से 9 टेस्ट में जीत दर्ज की जिनमे उन्हे कप्तान बनाया गया था।

1967-68 मे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न में एक आंख और एक पांव के साथ खेली गयी 75 रनों की पारी एक बेहतरीन पारी थी। उन्होने 1975 में वेस्टइंडीज़ के भारत दौरे के बाद क्रिकेट से सन्यास ले लिया।

विजय हज़ारे – भारत – रिकॉर्ड

अपनी सेवानिवृत्ति के बाद, वह 1993 और 1996 मे मैच रेफरी थे, जिसमें उन्होने दो टेस्ट और दस वनडे में काम किया। 1980 के दशक में वह “स्पोर्ट्सवर्ल्ड” , ” द नाऊ डिफंक्ट क्रिकेट पत्रिका ” मे संपादक और एक टेलीविज़न कमेंटेटर थे, लेकिन क्रिकेट प्रशासन में कभी भी सक्रिय भूमिका निभाने नहीं आए।



एंग्लो-भारतीय क्रिकेट में उनके परिवार के योगदान के लिए सम्मान के निशान के रूप में, 2007 और 2007 के बाद से भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज को पटौदी ट्रॉफी का नाम दिया गया।

वह साल 2007 से सनी गावस्कर और रवि शास्त्री के साथ आईपीएल की शासन परिषद का भी हिस्सा थे, लेकिन उन्होंने परिवर्तन किए जाने से निराश होने के बाद अक्टूबर 2010 से साथ रहने से इनकार कर दिया।

बिशन सिंह बेदी – भारत – रिकॉर्ड

पटौदी शासन परिषद के एकमात्र ऐसे सदस्य थे जिन्होंने स्वीकार किया था कि लीग के कार्य के तरीके गलत थे और वास्तव में उन्होंने इस साल के शुरूआती दिनों में बकाए का भुगतान न करने के लिए बीसीसीआई पर मुकदमा चलाया था।

1967 में पद्म श्री से सम्मानित होने से पहले पटौदी को 1964 मे अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

एक सितारा सिर्फ मैदान पर ही नही बल्की मैदान के बाहर भी सितारा होता है, पटौदी ने 1969 में उस वक्त की हिंदी सिनेमा की चमकती हुई रानी शर्मिला टॅगोर से शादी की और इस चमचमाती जोड़ी के तीन बच्चे थे– सैफ अली खान, सोहा अली खान और सबा अली खान।



वे तब विवादों में आ गए जब 2005 में लुप्तप्राय ब्लैकबैक का शिकार करने के लिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

दिल्ली के एक अस्पताल में 70 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। वह अंतःस्राही फेफ़ड़ों की बीमारी से पीड़ित थे।

अजित वाडेकर – भारत – रिकॉर्ड

प्रारंभिक जीवन

मंसूर अली खान, इफ्तिखार अली खान के बेटे थे, जो कि स्वयं एक प्रसिद्ध क्रिकेटर थे। वह भोपाल में पैदा हुए और अलीगढ़ में मिंटो सर्किल में शिक्षित हुए। फिर वह देहरादून (उत्तराखंड) में वेल्हम बॉयज स्कूल में पढ़े, हर्टफोर्डशायर में लॉकर्स पार्क प्रैप स्कूल (जहाँ उन्हें फ्रैंक वूली द्वारा प्रशिक्षित किया गया था) और विंचेस्टर कॉलेज भी गए। उन्होंने बैलिओल कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में अरबी और फ्रेंच बोलना भी सीखा।

1952 में मंसूर के ग्यारहवें जन्मदिन पर दिल्ली में पोलो खेलते समय उनके पिता की मृत्यु हो गई, जिसके बाद मंसूर नौवें नवाब बने। यद्यपि 1947 में ब्रिटिश राज के अंत के बाद पटौदी की रियासत को भारत में मिला दिया गया था, लेकिन जब तक 1971 में संविधान के 26 वें संशोधन के माध्यम से भारत सरकार ने इस परंपरा को समाप्त नहीं किया था, तब तक वह नवाब के पद पर बने रहे थे।

व्यक्तिगत जीवन

27 दिसंबर 1968 को मंसूर ने भारतीय फिल्म अभिनेत्री शर्मिला टैगोर से शादी की। उनके तीन बच्चे हैं: सैफ अली खान (जन्म 1970), जो कि बॉलीवुड अभिनेता हैं, सबा अली खान (जन्म 1976), जो कि एक आभूषण डिजाइनर हैं, और सोहा अली खान (जन्म 1978), जो कि एक बॉलीवुड अभिनेत्री और टीवी व्यक्तित्व हैं।

मंसूर अली खान पटौदी फ़्रीमेसंस के सदस्य भी थे।

मौत

पटौदी को 15 अगस्त 2011 को नई दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह एक गंभीर फेफड़ों की बीमारी से ग्रस्त थे, जिसमें फेफड़ों के संक्रमण की वजह से उनके शरीर में ऑक्सीजन का आदान-प्रदान मुश्किल से हो पा रहा था। एक महीने से अधिक समय तक अस्पताल में रहने के बाद 22 सितंबर, 2011 को उनकी मृत्यु हो गयी। उनके शरीर को 23 सितंबर, 2011 को दिल्ली के पास ही स्थित पटौदी में दफनाया गया था। उनके अंतिम संस्कार में फिल्म अभिनेताओं, निर्देशकों और निर्माताओं, और क्रिकेट से जुड़े लोगों ने शिरकत की थी।

पुरस्कार और मान्यताएँ

1964 में अर्जुन पुरस्कार

1967 में पद्म श्री पुरस्कार

क्रिकेट के प्रति उनके उत्कृष्ट योगदान के सम्मान में, 6 फरवरी 2013 को बीसीसीआई ने मंसूर अली खान पटौदी मेमोरियल लेक्चर की शुरुआत की। इसके तहत 20 फरवरी, 2013 को सुनील गावस्कर ने उद्घाटन व्याख्यान दिया था।

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