नारी कांट्रेक्टर – भारत – रिकॉर्ड

Nari Contractor Records in Hindi

पूरा नाम – नरीमन जमशेदजी कांट्रेक्टर

जन्म – 7 मार्च, 1934, गोधरा, गुजरात

प्रमुख टीमें – भारत, गुजरात, रेलवे

बल्लेबाजी शैली – बाएं हाथ के बल्लेबाज

गेंदबाजी शैली – दाएं हाथ के मध्यम

टेस्ट पदार्पण – 2 दिसंबर 1955 बनाम न्यूजीलैंड
अंतिम टेस्ट – 7 मार्च 1962 बनाम वेस्टइंडीज

बल्लेबाजी और क्षेत्ररक्षण का औसत
मॅच रन सर्वाधिक स्कोर औसत शतक अर्धशतक छ्क्के कॅच स्टमपिंग
टेस्ट 35 403 43 14.39 0 0 1 10 0
प्रथम श्रेणी 112 1502 97* 18.31 0 2 53 0
गेंदबाज़ी औसत
मॅच विकेट बेस्ट/पारी बेस्ट/मॅच औसत रन प्रति ओवर स्ट्राइक रेट 4 विकेट 5 विकेट
टेस्ट 35 102 5/76 8/118 35.09 2.56 81.9 8 3
प्रथम श्रेणी 112 330 6/30 32.14 2.66 72.2 15

नारी कांट्रेक्टर एक बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज थे जिन्होंने भारत के लिए 31 मैच खेले थे और जिनका अंतरराष्ट्रीय करियर चार्ली ग्रिफित की एक खतरनाक शार्ट गेंद की वजह से ख़त्म हो गया था |

1952/53 में कांट्रेक्टर का प्रथम श्रेणी करियर अनियोजित तरह से शुरू हुआ, जब उनको गुजरात के कप्तान (जिन्होंने मैच से पहले सुबह में अपने आप को चोटिल कर लिया था) की जगह टीम में शामिल किया गया | कांट्रेक्टर ने मौके का भरपूर फायदा उठाया और अपने पहले की मैच के दोनों पारियो में शतक बनाया | वो ऐसा करने वाले आर्थर मोरिस के बाद दूसरे खिलाड़ी बने |

1958/59 में दिल्ली में कांट्रेक्टर ने वेस्ट इंडीज के खिलाफ 92 रनो की महत्वपूर्ण पारी खेली | 1959 में दूसरे टेस्ट में ब्रायन स्टैथम ने कांट्रेक्टर की दो पसलियों को तोड़ दिया था, लेकिन चोटिल होने के बाद भी कांट्रेक्टर बल्लेबाजी करते रहे और 81 रनो की पारी खेली, जिसकी मदद से भारत ने 168 रन बनाये |

1959/60 में जब ऑस्ट्रेलिया ने भारत का दौरा किया तब कांट्रेक्टर ने शृंखला में 438 रन बनाये थे, जिसमे उनका बॉम्बे में लगाया गया एकमात्र शतक शामिल था | कानपूर टेस्ट की दूसरी पारी में उनकी 74 रनो की पारी भारत की ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध पहली टेस्ट जीत में सहायक बनी | उनको वह पारी हालाँकि काफी नाटकीय ढंग से ख़त्म हुई जब एलन डेविडसन की गेंद पर खेला गया उनका पुल शॉट शार्ट लेग पर खड़े नील हार्वे की टांगो में फंस गया था |

1960-61 में पाकिस्तान के खिलाफ कांट्रेक्टर को कप्तान बना दिया गया | कांट्रेक्टर भारतीय टीम के सबसे युवा (26 वर्ष) कप्तान थे | उन्होंने 1961/62 में इंग्लैंड के खिलाफ भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई | उनको उस सत्र में वेस्ट इंडीज दौरे पर गयी टीम का भी कप्तान बना दिया गया था|

बारबाडोस के खिलाफ मैच में चार्ली ग्रिफित भारतीय बल्लेबाजों डराने के लिए शार्ट गेंदों का इस्तेमाल कर रहे थे | चार्ली के दूसरे ओवर की चौथी गेंद पर कांट्रेक्टर का ध्यान भंग हो गया क्योकि किसी ने पवेलियन की खिड़की खोल दी थी | इस वजह से कांट्रेक्टर गेंद को तब तक नहीं देख पायें जब तक गेंद उनके काफी नजदीक नहीं आ गयी | वो उस गेंद की राह से हट नहीं पायें और गेंद उनके सर पर जा लगी |

कांट्रेक्टर तुरंत मैदान पर गिर गए, उनको जल्दी से अस्पताल ले जाया गया | कांट्रेक्टर की जिंदगी खतरे में थी और उनको बचाने के लिये कई सर्जरी की आवश्यकता थी | उनको रक्त – आधान की जरुरत थी, और कांट्रेक्टर के लिए खून देने वाले पहले व्यक्ति वेस्ट इंडीज के कप्तान फ्रैंक व्हायर थे |

कांट्रेक्टर उस घटना के बाद बच गए, लेकिन चोट के बाद उनका अंतरराष्ट्रीय करियर ख़त्म हो गया | उन्होंने प्रथम श्रेणी मैच खेल कर वापसी करने की कोशिश की, लेकिन फिर कभी उनको भारतीय टीम में शामिल नहीं किया गया |

कांट्रेक्टर ने प्रथम श्रेणी मैचों में 39.86 की औसत से 22 शतकों के साथ 8611 रन बनाये | क्रिकेट में उनके योगदान के लिए उनको सी.के.नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी दिया गया | अभी कांट्रेक्टर मुंबई में रहते है |

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