रमन लाम्बा – भारत – रिकॉर्ड

Raman Lamba Records in HIndi

पूरा नाम – रमन लांबा

जन्म – 2 जनवरी, 1960, मेरठ, उत्तर प्रदेश

मृत्यु – 22 फरवरी, 1998 ढाका, बांग्लादेश (आयु 38 वर्ष 51 दिन)

प्रमुख टीमें – भारत, आयरलैंड, दिल्ली

बल्लेबाज़ी शैली – दाएं हाथ के बल्लेबाज़

गेंदबाजी शैली – दाएं हाथ के मध्यम

टेस्ट पदार्पण – 17 जनवरी 1987 बनाम श्रीलंका
अंतिम टेस्ट – 25 नवंबर 1987 बनाम वेस्टइंडीज

एकदिवसीय पदार्पण – 7 अक्टूबर 1986 बनाम ऑस्ट्रेलिया
अंतिम एकदिवसीय – 22 दिसंबर 1989 बनाम पाकिस्तान

Batting and fielding averages
Mat Runs HS Ave SR 100 50 6s Ct
Tests 4 102 53 20.4 0 1 0 5
ODIs 32 783 102 27 67.15 1 6 10
First-class 121 8776 320 53.84 31 27 60
List A 82 2543 127 36.85 7 13 21
Bowling averages
Mat Wkts BBI BBM Ave Econ SR 4w 5w
Tests 4
ODIs 32 1 1/9 1/9 20 6.31 19 0 0
First-class 121 6 2/9 70.5 3.11 136 0
List A 82 4 2/45 2/45 46 3.74 73.7 0 0

रमन लाम्बा का जन्म 2 जनवरी 1960 को हुआ था, उन्हें अपने धमाकेदार स्ट्रोक-प्ले के लिए जाना जाता था और घरेलु सर्किट में वे एक रन-बनाने की मशीन थे | उनकी ज़िन्दगी का अंत निष्ठुरता से उस समय हो गया था जब मेहराब होसैन का पुल शॉट उनके सर पर जा लगा था | उसके बाद वे कोमा में चले गए थे और 20 फरवरी, 1998 में उनका निधन हो गया था |



यदि हम उनके करियर पर नज़र डाले, तो लाम्बा ने अपना पहला प्रथम-श्रेणी मैच 1978-79 में खेला था | प्रथम-श्रेणी क्रिकेट के अपने शुरूआती दिनों में वे निरंतर रूप से अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते थे और उनके अधिकतर ऊँचे स्कोर कमज़ोर विरोधियों के विरुद्ध आये थे | इसलिए, 1986 के इंग्लैंड दौरे के लिए उनके चुनाव ने सभी को आश्चर्य में डाल दिया था | उस समय, लाम्बा का आक्ररामक खेल कई लोगों के मायनों में टेस्ट क्रिकेट के लायक नहीं था | जैसी आशा थी, उन्होंने इंग्लैंड में एक भी टेस्ट नहीं खेला |

मनोज प्रभाकर – भारत – रिकॉर्ड

वो लाम्बा द्वारा अपने एकदिवसीय पदार्पण पर जयपुर में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध लगाया शानदार अर्धशतक था जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया था | बल्ले से अभी और पारियाँ आनी बाकी थी, जैसा कि उन्होंने दिल्ली में 74 मिनट में 74 रनों की पारी खेल दिखाया | उस मैच में, उन्होंने विरोधी गेंदबाज़ों की मैदान के हर कोने पर धुनाई की | उन्होंने श्रृंखला का अंत राजकोट में एक शतक के साथ किया | उस श्रृंखला के एक मैच में लाम्बा द्वारा क्रैग मैकडरमॉट की गेंद को पॉइंट के ऊपर से छक्के के लिए मारना अभी भी प्रशंसकों और विशेषज्ञों को याद है | हालाँकि, लाम्बा ने जल्द ही अपनी फॉर्म खो दी और अपने आपको एकदिवसीय टीम से बाहर पाया |

लाम्बा ने अपना पहला टेस्ट कानपुर में 1986-87 में खेला | दुर्भाग्यपूर्ण रूप से, टेस्ट क्रिकेट की अपनी पहली ही पारी में वे 24 रनों पर रन आउट हो गए | लेकिन उन्होंने धैर्य और संयम बनाये रखा और 1986 में नागपुर के मुश्किल विकेट पर एक अर्धशतक बनाया | लेकिन उस समय, भारत के पास एक शानदार बल्लेबाज़ी क्रम था, इसलिए उन्हें फिर से भटकना पड़ा | हालाँकि, इस समय के दौरान लाम्बा ने चयनकर्ताओं को – पाकिस्तान के विरुद्ध एक टूर मैच पर सैंकड़ा जड़कर – अपनी याद ज़रूर दिला दी |

रवि शास्त्री – भारत – रिकॉर्ड



उपमहाद्वीप पर 1987 में खेले गए विश्व कप के समय नज़र अंदाज़ किये जाने के बावजूद, घरेलु क्रिकेट में लाम्बा के शानदार प्रदर्शन पर ध्यान न दे पाना बहुत मुश्किल था | 1987-88 के प्रथम-श्रेणी सीज़न में उन्होंने 84.38 के औसत से 1097 रन बनाये थे | दिलीप ट्रॉफी में वे अपने जीवन की सबसे बेहतरीन फॉर्म में थे और अपनी मर्ज़ी से शतक लगा रहे थे | यदि ये भी बहुत नहीं था, तो अगले सीज़न में भी उन्होंने अपनी औसत 60 के ऊपर बरक़रार रखी |

इन सभी रनों की मदद से उन्होंने भारतीय टेस्ट टीम में वापसी की | बदकिस्मती से, वापसी करते ही उन्हें पराक्रमी वेस्ट इंडीज के विरुद्ध खेलना पड़ा | विंस्टन डेविस और पैट्रिक पैटर्सन की गति उनसे संभल न पायी और 1987 के अंत में खेले गए दिल्ली टेस्ट की दोनों पारियों में उन्होंने 1 और 0 रन बनाये | दूसरी पारी में तो पैटर्सन ने इतनी तेज़ गेंद डाली कि लाम्बा अपने बल्ले को वापस नीचे भी नहीं ला पाए जिसके पहले ही उनके स्टंप्स उखड़ गए |

संजय मांजरेकर – भारत – रिकॉर्ड

लाम्बा ने हालाँकि, हार नहीं मानी और घरेलु क्रिकेट में धमाका करते रहे | इन रनों का नतीजा उन्हें फिर मिला जब 1989 के नेहरू कप के लिए उन्हें चुना गया | लाम्बा ने इस टूर्नामेंट में ऊपरी क्रम पर लगातार बढ़िया प्रदर्शन किया | उन्हें 1989 में पाकिस्तान के दौरे के लिए भी चुना गया, लेकिन जिन मैचों में वे खेले उनपर कोई प्रभाव नहीं डाल पाए, और यह दौरा देश के लिए उनका आखिरी मैच बन गया | लाम्बा तब भी घरेलु क्रिकेट के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज़ों में बने रहे और जब भी बांग्लादेश में खेले, शानदार फॉर्म में रहे | लेकिन भारत के लिए खेलने के द्वार उनके लिए हमेशा के लिए बंद ही हो गए |

नवजोत सिध्धु – भारत – रिकॉर्ड

एक आदमी, जो कि खाता-पीता और जीता क्रिकेट हो, उसका अंत बहुत दुखद रहा | 1998 में ढाका प्रीमियर लीग में अबहानी क्रीड़ा चक्र की ओर से वे मोहम्मडन स्पोर्टिंग के विरुद्ध ढाका में मैच खेल रहे थे | ये माना जाता है कि खालिद मसूद, उनके कप्तान ने, उन्हें एक हेलमेट पहनकर शार्ट लेग पर फील्डिंग करने को कहा | लाम्बा ने हालाँकि हेलमेट नहीं पहना और अगली गेंद पर, मेहराब द्वारा हिट किये जाने पर मैदान पर गिर गए | जीवन समर्थन प्रणाली पर उन्हें कुछ दिन ज़िंदा रखा गया, जब तक कि उनकी पत्नी किम मिशेल क्रोथर्स वहाँ नहीं पहुंच गयी | 22 फरवरी 1998 को उनका निधन हो गया |

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