श्रीनिवास वेंकटराघवन – भारत – रिकॉर्ड

Srinivas Venkataraghavan Records in Hindi

पूरा नाम – श्रीनिवासराघवन वेंकटराघवन

जन्म – 21 अप्रैल, 1945, मद्रास (अब चेन्नई)

प्रमुख टीमें – भारत, डर्बीशायर, मद्रास, तमिलनाडु

उपनाम – वेंकट

बल्लेबाजी शैली – दाएं हाथ के बल्लेबाज़

गेंदबाजी शैली – दाएं हाथ के ऑफब्रेक

अन्य – अंपायर, रेफरी

टेस्ट पदार्पण (कैप 110) – 27 फरवरी 1965 बनाम न्यूजीलैंड
अंतिम टेस्ट – 24 सितंबर 1983 बनाम पाकिस्तान

एकदिवसीय पदार्पण (कैप 9) – 13 जुलाई 1974 बनाम इंग्लैंड
अंतिम एकदिवसीय – 7 अप्रैल 1983 बनाम वेस्टइंडीज

बल्लेबाजी और क्षेत्ररक्षण का औसत
मॅच रन सर्वाधिक स्कोर औसत स्ट्राइक रेट शतक अर्धशतक चौके छ्क्के कॅच
टेस्ट 57 748 64 11.68 0 2 3 44
एकदिवसीय 15 54 26* 10.8 42.85 0 0 3 0 4
प्रथम श्रेणी 341 6617 137 17.73 1 24 316
लिस्ट ए 71 346 26* 11.16 0 0 29
गेंदबाज़ी औसत
मॅच विकेट बेस्ट/पारी बेस्ट/मॅच औसत रन प्रति ओवर स्ट्राइक रेट 4 विकेट 5 विकेट 10 विकेट
टेस्ट 57 156 8/72 12/152 36.11 2.27 95.3 7 3 1
एकदिवसीय 15 5 2/34 2/34 108.4 3.74 173.6 0 0 0
प्रथम श्रेणी 341 1390 9/93 24.14 2.41 60.1 85 21
लिस्ट ए 71 64 4/31 4/31 35.34 3.4 62.2 1 0 0



मैकेनिकल इंजीनियर, लेकिन क्रिकेट के प्रति जूनून जिसने अपनी गेंदबाजी से अच्छे -अच्छे बल्लेबाजो के पसीने छुड़ा दिए। हम बात कर रहे हैं श्रीनिवास वेंकटराघवन की। उस समय भारतीय टीम में चन्द्रा, बेदी और प्रसन्ना जैसे दिग्गज स्पिन गेंदबाज मौजूद थे। वेंकटराघवन के लिए टीम में जगह बनाना मुश्किल था। पर किसे पता था कि ये खिलाड़ी टीम में वापस घर जाने के लिए नही आया है, ये भारतीय टीम को नयी बुलंदियों पर पहुंचाने आया था। वेंकटराघवन, एक ऐसा गेंदबाज जो अपनी स्पिन और सधी हुई गेंदबाजी से बल्लेबाजो को मुसीबत में डाल देता था। वेंकटराघवन वेंकट नाम से मशहूर थे। वेंकट इस बात को बखूबी जानते थे कि टीम में बने रहने के लिए उनका मुकाबला प्रसन्ना जैसे गेंदबाज से है। वेंकट की खास बात ये थी की वो ऑफ स्पिनर तो अच्छे थे ही साथ ही अच्छे निचले क्रम के बल्लेबाज भी थे। सिली पॉइंट और शार्ट लेग पर अच्छा क्षेत्ररक्षण भी कर लेते थे। इन्ही खूबियों की वजह से वेंकट लंबे समय तक भारतीय टीम का हिस्सा रहें।

बिशन सिंह बेदी – भारत – रिकॉर्ड

वेंकट के करियर की शुरुआत धमाकेदार रही। 1965 में वेंकट ने न्यूजीलैंड के खिलाफ अपनी पहली टेस्ट सीरीज में 3 टेस्ट मैचों में 21 विकेट ले कर सनसनी फैला दी और लोगों को बता दिया की वो क्रिकेट जगत में लंबी पारी खेलने आएं हैं। इसी सीरीज के दौरान कोटला टेस्ट में अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी करते हुए 72 रन देकर 8 विकेट झटके। वेंकट इस बात को अच्छी तरह समझते थे कि टीम में स्थाई तौर पर बने रहने के लिए उनको प्रसन्ना, बेदी और चंद्रा जैसे दिग्गज गेंदबाजो के सामने अच्छा प्रदर्शन करना पड़ेगा। 1971 में वेस्टइंडीज से मिली ऐतिहासिक जीत में वेंकट टीम इंडिया का हिस्सा थे।उस समय विश्व क्रिकेट में वेस्टइंडीज की बादशाहत कायम थी। इसके बाद भी कामयाबी का ये सिलसिला चलता रहा। इंग्लैंड दौरे पर 95 रन देकर 5 विकेट ले कर वेंकट ने भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई।



भागवत चंद्रशेखर – भारत – रिकौर्ड़

वेंकट का नाम भारत के समझदार कप्तानों में शुमार होता है। उन्होंने 1975 और 1979 के विश्वकप में भारतीय टीम का नेतृत्व किया और इसके बाद इंग्लैंड दौरे पर भी टीम के कप्तान रहे। 1980 में वेंकट का करियर ग्राफ धीरे धीरे नीचे आने लगा जिसकी वजह से वो टीम से बाहर हो गए। लेकिन कभी न हार मानने वाली जिद की वजह से 1983 विश्वकप में वापसी कर सबको चौंका दिया। 1985 में उन्होंने क्रिकेट से सन्यास ले लिया।

अजित वाडेकर – भारत – रिकॉर्ड

सन्यास के बाद भी वेंकट क्रिकेट से किसी न किसी तरह जुड़े रहे। प्रबंधक के रूप में वो टीम से जुड़े रहे। इसके बाद नई पारी की शुरुआत करते हुए उन्होंने अंपायरिंग की दुनिया में कदम रखा। अंपायरिंग की दुनिया में भी उन्होंने बहुत शोहरत कमाई। उनका नाम विश्व के प्रतिष्ठित अंपायरों में शुमार होता था। अपने अंपायरिंग करियर में वेंकट ने 73 टेस्ट और 52 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में अंपायरिंग की। दुनिया के उच्च स्तर के अंपायरों में से एक वेंकट को आईसीसी इलीट पैनल के लिए मनोनीत भी किया गया। अपने अंपायरिंग करियर में उन्होंने 6 एशेज, 1996, 1999 और 2003 विश्वकप में अंपायरिंग की।1996 और 1999 विश्वकप में उन्होंने सेमीफाइनल में अंपायरिंग की जबकि 1999 विश्वकप में ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच खेले गए फाइनल में तीसरे अंपायर के रूप में जिम्मेदारी निभाई। 2003 में वेंकट को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। मार्च 2004 में उन्होंने अंपायरिंग से भी सन्यास ले लिया।

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