सैयद किरमानी – भारत – रिकॉर्ड

Syed Kirmani Records in Hindi

पूरा नाम – सैयद मुजाबा हुसैन किरमानी

जन्म – 29 दिसंबर, 1949, मद्रास (अब चेन्नई)

प्रमुख टीमें – भारत, कर्नाटक, मैसूर, रेलवे

बल्लेबाज़ी शैली – दाएं हाथ के बल्लेबाज़

गेंदबाजी शैली – दाएं हाथ के ऑफब्रेक

क्षेत्ररक्षण की स्थिति – विकेटकीपर

टेस्ट पदार्पण – 24 जनवरी 1976 बनाम न्यूजीलैंड
अंतिम टेस्ट – 2 जनवरी 1986 बनाम ऑस्ट्रेलिया

एकदिवसीय पदार्पण – 21 फरवरी 1976 बनाम न्यूजीलैंड
अंतिम एकदिवसीय – 12 जनवरी 1986 बनाम ऑस्ट्रेलिया

बल्लेबाजी और क्षेत्ररक्षण का औसत													 	मॅच 	पारी	नाबाद	रन	सर्वाधिक स्कोर	औसत	गेंद खेलीं	स्ट्राइक रेट	शतक	अर्धशतक	छ्क्के	कॅच	स्टमपिंग टेस्ट	88	124	22	2759	102	27.04			2	12	3	160	38 एकदिवसीय	49	31	13	373	48*	20.72	616	60.55	0	0		27	9 प्रथम श्रेणी	275	383	64	9620	161	30.15			13	38		367	112 लिस्ट ए	84	58	23	881	64	25.17			0	3		59	15
Syed-Kirmani-Batting-and-Wicketkeeping-records-in-Hindi
गेंदबाज़ी औसत													 	मॅच 	पारी	गेंदें	रन	विकेट	बेस्ट/पारी	बेस्ट/मॅच	औसत	रन प्रति ओवर	स्ट्राइक रेट	4 विकेट	5 विकेट	10 विकेट टेस्ट	88	3	19	13	1	1/9	1/9	13	4.1	19	0	0	0 एकदिवसीय	49	-	-	-	-	-	-	-	-	-	-	-	- प्रथम श्रेणी	275		175	126	1	1/9		126	4.32	175		0	0 लिस्ट ए	84	-	-	-	-	-	-	-	-	-	-	-	-
Syed-Kirmani-Bowling-records-in-Hindi

लोकप्रिय रूप से ‘किरी’ के रूप में जाने जाने वाले सैयद किरमानी को आम तौर पर भारत के लिए खेलने वाले सर्वश्रेष्ठ विकेटकिपरों में से एक के रूप में जाना जाता है। दिग्गज फारुख इंजीनियर के बाद आये किरमानी ने विकेट के पीछे अपनी चपलता से सबका ध्यान आकर्षित किया। किरमानी को आदर्श रूप से स्पिन चौकड़ी और कपिल देव की अगुआई वाली भारतीय गेंदबाज़ी ब्रिगेड के बीच संतुलन बनाने का श्रेय दिया जा सकता है। किरमानी दोनों पीढ़ियों के दौरान कुशलता से विकेटकीपिंग कर सकते थे।

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इंजीनियर के स्थानाप्पन के रूप में शुरुआत करने वाले किरमानी ने न्यूजीलैंड के खिलाफ अपना पहला प्रदर्शन किया और दूसरे ही टेस्ट में एक पारी में विकेट के पीछे छह शिकार के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। हालांकि उनके फॉर्म में काफी गिरावट आई और इंग्लैंड में आयोजित 1979 विश्व कप में किरमानी को टीम से बाहर भी रखा गया। हालांकि किरमानी को प्रदर्शन की वजह से बाहर रखा गया था, लेकिन अफवाह यह थी कि केरी पैकर ने विश्व सीरीज़ क्रिकेट के लिए उनसे और गावस्कर से संपर्क किया था।

उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय टीम में वापसी की और बल्ले और दस्ताने दोनों के साथ अच्छा प्रदर्शन भी किया। इसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ एक शानदार श्रृंखला में उन्होंने एक सीरीज में विकेट के पीछे सबसे अधिक शिकार करने के नरेन ताम्हाने के भारतीय रिकॉर्ड की बराबरी की। श्रृंखला में किरमानी ने 17 कैच और 2 स्टंप किये थे। उन्होंने 1981-82 में इंग्लैंड के खिलाफ अपना अच्छा प्रदर्शन जारी रखा। 3 टेस्ट मैचों की श्रृंखला में आगंतुकों ने 1964 रन बनाए और किरमानी ने एक भी बाइ रन नहीं दिया।

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किरमानी की बल्लेबाजी अभी तक प्रभावशाली थी। उन्होंने 1983 में चेन्नई में वेस्टइंडीज के खिलाफ रिकॉर्ड 9 वें विकेट की साझेदारी में सुनील गावस्कर के साथ भागीदारी की। 1983 के विश्व कप में कपिल देव के साथ आठवें विकेट के लिए उनके 126 रनों की साझेदारी के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाता है, जिसने भारत को जीत दिलाई।

किरमानी का फॉर्म उम्र के साथ गिरने लगा और सदानंद विश्वनाथ, किरण मोरे और चंद्रकांत पंडित जैसे युवाओं ने उनकी जगह ले ली। 1985-86 में वर्ल्ड सिरीज कप के दौरान एक पैर की चोट ने उनके शानदार करियर को खत्म कर दिया।

1982 में किरमानी को भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

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