विजय मर्चेंट – भारत – रिकॉर्ड

Vijay Merchant Records in Hindi

पूरा नाम – विजयसिंह माधवजी मर्चेंट

जन्म – 12 अक्टूबर, 1911, बॉम्बे (अब मुंबई), महाराष्ट्र

मृत्यु – 27 अक्टूबर, 1987 बंबई (अब मुंबई), महाराष्ट्र (76 साल 15 दिन आयु)

प्रमुख टीमें – भारत, हिंदू, मुम्बई

बल्लेबाज़ी शैली – दाएं हाथ के बल्लेबाज़

गेंदबाजी शैली – दाएं हाथ के मध्यम

टेस्ट कैरियर की शुरूआत – 15 दिसंबर, 1933 बनाम इंग्लैंड
अंतिम टेस्ट – 2 नवंबर 1951 बनाम इंग्लैंड

Batting and fielding averages
Mat Runs HS Ave 100 50 6s Ct
Tests 10 859 154 47.72 3 3 0 7
First-class 150 13470 359* 71.64 45 52 115

 

Bowling averages
Mat Wkts BBI BBM Ave Econ SR 4w 5w 10
Tests 10 0 4.44 0 0 0
First-class 150 65 5/73 32.12 2.46 78.2 1 0

जिस व्यक्ति का प्रथम श्रेणी में बल्लेबाजी औसत डॉन ब्रैडमैन के बाद दूसरे स्थान पर है, उन्हें, यानि विजय मर्चेंट को, भारत के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक माना जाता है। उन्होंने अपने करियर के दौरान 150 प्रथम श्रेणी मैचों में करीब 13,470 रन बनाए। आश्चर्यजनक रूप से उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 45 शतक और 52 अर्धशतक लगाए हैं और 71.64 के विशाल औसत से रन बनाए हैं।

उनका टेस्ट करियर लगभग 18 साल तक का रहा, लेकिन वह भारत के लिए केवल 10 टेस्ट मैचों में ही शामिल थे। उन्हें 1932 में इंग्लैंड के खिलाफ भारत के पहले टेस्ट में अपना पदार्पण करना था लेकिन भारतीय नेताओं के साथ एकजुटता दिखाने के लिए उन्होनें मैच से बहार रहने का फैसला लिया जिन्हें भारत की सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान जेल में रखा गया था। मर्चेंट ने अंततः 1933-34 में इंग्लैंड के खिलाफ अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने एक मध्यक्रम बल्लेबाज के रूप में अपना टेस्ट करियर शुरू किया, लेकिन जल्द ही उन्होंने ओपनर की भूमिका निभानी शुरू कर दी और अपने करियर के अंत तक उस स्थिति में ही खेले।

विजय हज़ारे – भारत – रिकॉर्ड

1936 में इंग्लैंड के दौरे पर वह श्रृंखला के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज थे। उन्होंने 51.32 की औसत से 1745 रन बनाये और उन्हें विस्डेन क्रिकेटर ऑफ द इयर के रूप में चुना गया क्योंकि उनका फॉर्म उस वर्ष काफी शानदार रहा था। मर्चेंट के फुटवर्क, उनके सुंदर ड्राइव और उनकी ठोस तकनीक ने सभी को उनकी बल्लेबाज़ी का कायल बना दिया था। इंग्लैंड के मशहूर खिलाड़ी सीबी फ़्राई ने कहा, “हम उन्हें सफ़ेद रंग देना चाहते हैं और उन्हें सलामी बल्लेबाज के रूप में ऑस्ट्रेलिया ले जाना चाहते हैं।”

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को रोकना पड़ा था लेकिन मर्चेंट भारतीय घरेलू क्रिकेट में रनों का ढेर लगाने में व्यस्त थे। उन सत्रों में उनका औसत 114, 123, 233, 288.33 और 117 का रहा था। मर्चेंट खराब गेंदबाज भी नहीं थे। उन्होंने 32.12 की औसत से अपने प्रथम श्रेणी करियर के दौरान 65 विकेट भी लिए।

एकनाथ सोलकर – भारत – रिकॉर्ड

युद्ध के बाद भारत ने एक बार फिर इंग्लैंड का दौरा किया और ओवल में हुए अंतिम टेस्ट में मर्चेंट ने शानदार 128 रन बनाए और डेनिस कॉम्प्टन, जो एक आर्सेनल फुटबॉलर भी थे, ने उन्हें रन आउट कर दिया। मर्चेंट को 1947-48 में ऑस्ट्रेलिया के पहले दौरे पर भारतीय पक्ष का कप्तान भी माना जा रहा था, लेकिन उनके स्वास्थ्य में गिरावट आई और उन्हें बाहर बैठना पड़ा। वह अगले साल भारत के वेस्टइंडीज दौरे पर भी नहीं जा सके।

वह 1951-52 में दिल्ली में इंग्लैंड के खिलाफ ठीक होने के बाद केवल एक और टेस्ट मैच में ही खेल सके थे। उनकी वापसी पर उन्होंने 154 के अपने उच्चतम टेस्ट स्कोर का रिकॉर्ड बनाते हुए एक उत्तम दर्जे की पारी खेली। कप्तान विजय हजारे के साथ उन्होंने तीसरे विकेट के लिए 211 रनों की साझेदारी की। मैदान पर डाइविंग करते समय उनके कंधे पर चोट लगने के बाद उनका करियर समय से पहले ही खत्म हो गया। टेस्ट क्रिकेट में 3 शतकों के साथ उन्होंने 47.72 के औसत से 859 रन बनाए।

सुनील गावस्कर – भारत – रिकॉर्ड

मर्चेंट का एक अविश्वसनीय रणजी कैरियर भी रहा था। मुंबई की तरफ से खेलते हुए 47 रणजी पारियों में उन्होंने 98.75 के शानदार औसत से 3639 रन बनाए। उन 47 पारियों में से 16 बार उन्होंने एक सौ या एक सौ से अधिक का स्कोर बनाया।

प्रसिद्ध अंग्रेजी कमेंटेटर और लेखक, जॉन अरलॉट, मर्चेंट के एक बड़े प्रशंसक थे। उन्होंने लिखा, “उन्हें छह बुरी गेंदें फेंकें और वह उन सब को बाउंड्री पार पहुँचा देंगे। लेकिन आप अगर उन्हें छह अच्छी गेंदें फेंकें तो वह सबको रोकने का प्रयास करेंगे। जब वह आपके साथ बात करते हैं तो वह आपको चेहरे में देखते हैं। उनकी ईमानदारी अचूक है; वह सत्य बोलते हैं, लेकिन बिल्कुल शांत तरीके से। ”

बाद में वह भारत के चयनकर्ताओं के अध्यक्ष बने। विशेषकर पटौदी के नवाब को हटाकर अजीत वाडेकर को भारत का कप्तान बनाने के लिए उन्हें जाना जाता था।

उनका 27 अक्टूबर 1987 को निधन हो गया। वह 76 साल के थे।

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