अब्दुल क़ादिर – पाकिस्तान – रिकॉर्ड

Abdul Qadir Records

पूरा नाम – अब्दुल कादिर खान

जन्म – 15 सितंबर 1955 लाहौर, पंजाब

प्रमुख टीमें – पाकिस्तान, हबीब बैंक लिमिटेड, लाहौर, पंजाब

बल्लेबाज़ी शैली – दाएं हाथ के बल्लेबाज़

गेंदबाज़ी शैली – लेगब्रेक गुगली

टेस्ट पदार्पण (कैप 78) – दिसंबर 1977 बनाम इंग्लैंड
अंतिम टेस्ट – दिसंबर 1990 बनाम वेस्टइंडीज

एकदिवसीय पदार्पण (कैप 43) – 11 जून 1983 बनाम वेस्टइंडीज
अंतिम एकदिवसीय – 2 नवंबर 1993 बनाम श्रीलंका

बल्लेबाजी और क्षेत्ररक्षण का औसत													 	मॅच 	पारी	नाबाद	रन	सर्वाधिक स्कोर	औसत	गेंद खेलीं	स्ट्राइक रेट	शतक	अर्धशतक	छ्क्के	कॅच	स्टमपिंग टेस्ट	67	77	11	1029	61	15.59			0	3	16	15	0 एकदिवसीय	104	68	26	641	41*	15.26	849	75.5	0	0	17	21	0 प्रथम श्रेणी	209	247	43	3740	112	18.33			2	8		83	0 लिस्ट ए	147	91	29	869	41*	14.01			0	0		29	0
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गेंदबाज़ी औसत													 	मॅच 	पारी	गेंदें	रन	विकेट	बेस्ट/पारी	बेस्ट/मॅच	औसत	रन प्रति ओवर	स्ट्राइक रेट	4 विकेट	5 विकेट	10 विकेट टेस्ट	67	111	17126	7742	236	9/56	13/101	32.8	2.71	72.5	12	15	5 एकदिवसीय	104	100	5100	3454	132	5/44	5/44	26.16	4.06	38.6	4	2	0 प्रथम श्रेणी	209		49036	22314	960	9/49		23.24	2.73	51		75	21 लिस्ट ए	147		7014	4666	202	5/31	5/31	23.09	3.99	34.7	7	3	0
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अब्दुल कादिर के योगदान के बिना क्रिकेट काफ़ी खराब रहता। 70 के दशक के दौरान लेग स्पिन गेंदबाजी की कला ख़त्म-सी हो रही थी और ऐसा प्रतीत होने लगा कि आने वाले समय में कोई अन्य लेग स्पिनर कभी नहीं होगा। कादिर ने एक पुनर्जागरण का काम किया जिसकी वजह से लेग स्पिन को एक अभिलाषित कला का रूप मिला। उनका रहस्य यह था कि वह एक ओवर में छह अलग-अलग गेंदे डालते थे। फ्लिपर और टॉप-स्पिनर कादिर की दो अलग-अलग किस्म की गुगली थीं जिसकी वजह से बहुत से लोग चकराए हुए रहते थे।

उन्होंने 1978 में हैदराबाद में इंग्लैंड के खिलाफ अपने खेल जीवन की शुरुआत की। दूसरी पारी में, उनकी 6/44 की गेंदबाज़ी के चलते लगा कि पाकिस्तान मुक़ाबला जीत लेगा। हालांकि, इंग्लैंड किसी तरह ड्रॉ कराने में सफल रहा| इस श्रृंखला के बाद कादिर के लिए हालात थोड़ा नीचे चले गए| 1982 में वापसी के दौरे पर, चोट से वह परेशान रहे और जो भी मुक़ाबले उन्होंने खेले उनमें अप्रभावी साबित हुए|

1982 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ श्रृंखला में, कादिर ने फॉर्म में वापसी करते हुए फैसलाबाद में 11 विकेट लिए, जिसके कारण ऑस्ट्रेलिया को पारी से हार का सामना करना पड़ा। पूरी श्रृंखला के दौरान, कादिर ने आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को अपने बदलावों से परेशान किया जिस कारण उन्होंने तीन मैचों में 22 विकेट लिए। पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया का 3-0 से सफ़ाया किया और कादिर ने एक मजबूत पक्ष के रूप में खुद को स्थापित किया। इमरान खान ने अपनी कप्तानी के दौरान कादिर को शानदार गेंदबाज बनाया और वह हमेशा उनसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करा सके।

उनकी गेंदबाजी ने 80 के दशक की पराक्रमी वेस्ट इंडियन टीम को भी खासा परेशान किया। वेस्टइंडीज यदि अपने प्रभुत्व की अवधि के दौरान भी पाकिस्तान से पार नहीं पाया तो उसका श्रेय कुछ हद तक कादिर की लेग स्पिन को जाता है| उनका सबसे यादगार प्रदर्शन फैसलाबाद में आया, जब उन्होंने दूसरी पारी में वेस्टइंडीज के शीर्ष क्रम को ध्वस्त कर दिया। उनके 6/16 के प्रदर्शन ने वेस्टइंडीज को सिर्फ 53 रनों पर समेट दिया। उन्होंने पूरे पूरी श्रृंखला में वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों को परेशान किए रखा जिसके कारण उन्होंने और इमरान खान ने संयुक्त रूप से सर्वाधिक 18 विकेट लिए।

इंग्लैंड को कादिर के की लेग-ब्रेक का कोई अंदाजा ही नहीं था। अपने करियर में उन्होंने पांच बार मैच में दस विकेट लिए, जिनमे से चार इंग्लैंड के खिलाफ आए, जबकि 15 बार पारी में पांच विकेट लिए जिनमें से आठ, उनके खिलाफ थे। 1987 के सत्र के दौरान कादिर के लिए दो क्षण यादगार रहे। ओवल में इंग्लैंड के खिलाफ, पाकिस्तान ने 708 रन बनाए। कादिर ने 7/96 के साथ पहली पारी में इंग्लैंड की बल्लेबाजी की को सस्ते में ही समेट दिया। हालांकि, दूसरी पारी में इंग्लैंड किसी तरह झुरारू जुझारू प्रदर्शन के बल पर मैच ड्रा करने में कामयाब रहा । नवंबर में खेले गए वापसी दौरे में, कादिर के लिए गर्व का क्षण तब आया, जब लाहौर में अपनी घरेलु जनता के सामने उन्होंने 9/56 की शानदार गेंदबाज़ी की, जिस कारण पाकिस्तान ने पारी से मैच जीता। ये आंकड़े किसी भी पाकिस्तानी गेंदबाज के लिए अभी भी सर्वश्रेष्ठ हैं और इसने इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाज ग्राहम गूच को उन्हें ‘विश्व का सर्वश्रेष्ठ लेग स्पिनर’ कहने के लिए प्रेरित किया।

कादिर अंदर से एक जुझारू खिलाड़ी थे। वह निचले कम में एक उपयोगी बल्लेबाज भी थे। उन्होंने एक बार कर्टनी वॉल्श को आखिरी ओवर में 13 रन के लिए धो दिया था जिससे पाकिस्तान ने 1987 में लाहौर में हुए विश्व कप मुक़ाबले में एक विकेट से जीत दर्ज की थी। मुश्ताक अहमद के उद्भव के साथ, कादिर ने 1993 में क्रिकेट से सन्यास ले लिया। उन्होंने लाहौर में एक निजी क्रिकेट अकादमी का निर्माण कराया और मुश्ताक और दानिश कनेरिया को सराहनीय परामर्श दिए। वह 2008 में पीसीबी के लिए मुख्य चयनकर्ता रहे, लेकिन छह महीने बाद ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

मजेदार तथ्य: अब्दुल कादिर को उनकी विशिष्ट गेंदबाजी शैली के कारण नृत्य करने वाले गेंदबाज के रूप में जाना जाता है।

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