ब्रायन लारा – वेस्ट इंडीज़ – रिकॉर्ड

Brian Lara Records in Hindi

पूरा नाम – ब्रायन चार्ल्स लारा

जन्म – 2 मई, 1969, कांतारो, सांताक्रूज, त्रिनिदाद

प्रमुख टीमें – वेस्टइंडीज आईसीसी विश्व एकादश, मेरिलबोन क्रिकेट क्लब, मुंबई चैम्प्स, उत्तरी ट्रांसवाल, दक्षिणी चट्टानों, त्रिनिदाद और टोबैगो, वारविकशायर

बल्लेबाजी की शैली – बाएं हाथ के बल्लेबाज़

गेंदबाजी की शैली – लेग-ब्रेक गुगली

ऊंचाई – 5 फुट 8 इंच

शिक्षा – फातिमा कॉलेज, त्रिनिदाद

टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण (कैप 196) – 6 दिसंबर 1990 बनाम पाकिस्तान
अंतिम टेस्ट – 27 नवंबर 2006 बनाम पाकिस्तान

वनडे कैरियर की शुरुआत (कैप 59) – 9 नवंबर 1990 बनाम पाकिस्तान
अंतिम वनडे – 21 अप्रैल 2007 बनाम इंग्लैंड
वनडे शर्ट नंबर 9

Batting and fielding averages
Mat Runs HS Ave SR 100 50 4s 6s Ct
Tests 131 11953 400* 52.88 60.51 34 48 1559 88 164
ODIs 299 10405 169 40.48 79.51 19 63 120
First-class 261 22156 501* 51.88 65 88 320
List A 429 14602 169 39.67 27 86 177
T20s 3 99 65 33 115.11 0 1 11 1 0
Bowling averages
Mat Wkts BBI BBM Ave Econ SR 4w 5w 10
Tests 131 0 2.8 0 0 0
ODIs 299 4 2/5 2/5 15.25 7.46 12.2 0 0 0
First-class 261 4 1/1 104 4.85 128.5 0 0
List A 429 5 2/5 2/5 29.8 6.87 26 0 0 0
T20s 3

11 बच्चों में 10वें, ब्रायन लारा ने अपना खेल हावर्ड कोचिंग क्लीनिक में सीखा, जहाँ 6 वर्ष की आयु में उनका दाखिला हुआ था और जबकि स्कूल में वह त्रिनिदाद की जूनियर फुटबॉल एवं टेबल टेनिस टीम के लिए खेलते थे लेकिन वह क्रिकेट ही था जिसने वास्तव में उन्हें आकर्षित किया।14 वर्ष की आयु में, उन्होंने 126.16 की औसत के साथ 745 रन बनाए, जिससे वे त्रिनिदाद अंडर-16 टीम में चुने गये।एक साल बाद वे वेस्टइंडीज़ अंडर-19 टीम में थे। 1990 में, 20 साल की आयु में, लारा त्रिनिदाद एवं टोबेगो के सबसे कम उम्र के कप्तान बने और कप्तानी करते हुए उनको गेडेस ग्रांट शील्ड में विजय दिलाई। उस साल उन्होंने अपना टेस्ट पदार्पण किया, पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने 44 एवं 6 रन बनाए।

रिकी पोंटिंग – ऑस्ट्रेलिया – रिकॉर्ड

ब्रैडमैन के बाद से किसी ने भी इतनी जल्दी-जल्दी और इतनी तेज़ी से बड़े स्क़ोर नहीं बनाए जितने कि लारा ने अपने विभव में बनाए हैं। उनका खड़े होने का अंदाज़ भी रोमांचक था- बॅट हवा में उँचा उठा हुआ, पूरा भार झुके हुए अगले घुटने पर, आँखें नीचीं और बराबर। तब गिलोटिन नीचे गिरता था और गेंद को चमकते हुए सीमा पार भेज देता था। 1994 में दो महीनों के अंतराल में, लारा के 375 एवं 501 नाट आउट ने सर्वाधिक टेस्ट एवं प्रथम श्रेणी स्कोर के विश्‍व रिकार्ड को तोड़ दिया लेकिन अचानक मिली ख्याति ने उन्हें एक परेशान एवं विरोधात्मक आकृति में बदल दिया। एक बुझती हुई टीम के कप्तान के तौर पर एक कल्पनाचतुर लेकिन ज़्यादातर फलविहीन अवधि के दौरान, लारा ने अपनी प्रतिभा को दोहराते हुए 213, 8, 153नाट आउट और 100 की श्रंखला के साथ अकेले ही 1998-99 की मेहमान आस्ट्रेलियन टीम को चुनौती दी। कुछ समय के लिए, ज़्यादा वजन और हॅम्स्ट्रिंग की समस्याओं ने उनके कभी बिजली के समान फुर्तीले कदमों के उपयोग को बाधित किया और रनों का प्रवाह कभी-कभी बहने वाली धार बन गयी। लेकिन बाद में गॅरी सोबर्स ने उनकी समृद्धिशाली बॅकलिफ्ट में छोटा सा बदलाव करने का सुझाव दिया और 2001-02 में श्रीलंका के खिलाफ एक टेस्ट में 221 एवं 130 और कुल मिलाकर 688 रन- पूरी श्रंखला में वेस्टइंडीज़ द्वारा बनाए गये रनों का रिकार्ड 42%- के साथ लारा अपने चरम पर वापस लौटे और अगले वर्ष कप्तानी वापस पा ली।

सचिन तेंदुलकर – भारत – रिकॉर्ड

यह कार्य दूसरी बार भी उतना ही कठिन साबित हुआ, एक ऐसी टीम की कप्तानी करना जहाँ वे दूर-दूर तक सबसे अच्छे खिलाड़ी थे और जहाँ अनुशासन एक लगातार चिंता का विषय था। वह टीम को दक्षिण अफ्रीका में दूसरी बार हार तक ले कर गये और उसके बाद इंगलैंड से भी कैरेबियन में हार गये। लेकिन तब, जब ऐसा लग रहा था कि सभी आशाओं ने वेस्टइंडीज़ क्रिकेट का साथ छोड़ दिया है, घरेलू श्रंखला में सूपड़ा साफ होने के ख़तरे का जवाब देते हुए इंगलैंड के खिलाफ एंटीगुआ में अंतिम टेस्ट मॅच में लारा ने आश्चर्यजनक 400 नाबाद रन बानाए। ऐसा करते ही, वह विश्‍व टेस्ट बॅटिंग रिकार्ड को फिर से अपने नाम करने वाले पहले खिलाड़ी बन गये, एक ऐसा कारनामा जिसने यह सुनिश्चित किया कि वह आधुनिक युग के सबसे करिश्माई क्रिकेटर के रूप में शेन वॉर्न के साथ खड़े होंगे।

सर विव रिचर्ड्स – वेस्टइंडीज़ – रिकॉर्ड

उसके बाद एक अति निम्न समय आया जब दौरे पर आई बांग्लादेश टीम ने एकदिवसीय श्रंखला एवं पहले टेस्ट में वेस्टइंडीज़ को ख़तरे में डाल दिया जिसने लारा को अपना इस्तीफ़ा देने की धमकी देने को प्रोत्साहित किया यदि उनके बल्लेबाज़ों ने अपने खेल को ऊंचा नहीं उठाया। उन्होंने अगले मॅच में जवाब दिया और लारा ने इंगलैंड में टीम की कप्तानी की, जहाँ हर एक टेस्ट में टीम हारी जो उन्होंने खेला। आश्चर्यजनक रूप से, उन्होंने फिर अपने आरोपों को जस्ती किया और एकदिवसीय टीम को आई०सी०सी० चैम्पियंस ट्राफ़ी में जीत दिलाकर वेस्टइंडीज़ के पुनरुत्थान की आशाओं को चिंगारी दे दी। लेकिन यह शिवनारायण चंद्रपाल की कप्तानी में था जब लारा ने अपना अगला महत्वपूर्ण क्षण अर्जित किया- नवंबर 2005 में एडिलेड में, जब वह एलन बॉर्डर के 11174 रनों की गणना को पीछे छोड़कर टेस्ट क्रिकेट के सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बन गये। फिर अप्रैल 2006 में, वेस्टइंडीज़ बोर्ड और प्लेयर्स यूनियन के बीच लंबे विवाद के बाद, उन्हें- तीसरी बार- वेस्टइंडीज़ के कप्तान के तौर पर बहाल किया गया। भारत के खिलाफ पाँच मैचों की घरेलू एकदिवसीय श्रंखला में लारा की कप्तानी की बहुत प्रशंसा हुई जिसमें मेहमानों को 4-1 से हराया लेकिन उसके बाद हुई टेस्ट श्रंखला में वह संघर्ष करते रहे। उनकी कप्तानी अनियमित थी- टुकड़ों में प्रेरणादायी और अनेक मौकों पर शंकास्पद थी- जबकि बाद में उन्होंने बताया कि टीम के चुनाव को लेकर बने रहने वाले गौण कारणों की वजह से उनके हाथ बँधे हुए थे।

सर डॉन ब्रॅडमन – ऑस्ट्रेलिया – रिकॉर्ड

पाकिस्तान में उन्होंने बल्ले से उदाहरण देते हुए नेतृत्व किया लेकिन परिणाम उनकी टीम के विरुद्ध जाते रहे और जब वेस्टइंडीज़ मैदान के अंदर और बाहर दोनों जगह संघर्ष कर रही थी, यह और ज़ाहिर होता गया कि लारा उनको और बड़ी चीज़ों के लिए प्रोत्साहित नहीं कर पा रहे हैं और वह तेज़ी से अपने अनेक साथी खिलाड़ियों के प्रतिकूल दिखाई देने लगे। विश्‍व कप ने उन्हें अपनी सरज़मीं पर और एक उँचाई के साथ विदाई लेने का मौका दिया लेकिन यह हो ना सका। उन्होंने अपनी क्षमता की झलकें दिखाईं लेकिन सात पारियों में एक अर्धशतक काफ़ी नहीं था और वेस्टइंडीज़ वर्ल्ड कप से बुरी तरह बाहर हो गयी।

प्रशासकों से कड़वे विवाद की अफवाहों के बीच उन्होंने, उनके 300 एकदिवसीय से एक कम पर, सन्यास ले लिया। यह उनके जैसी प्रतिभा के लिए सन्यास लेने का एक उदासीन, लेकिन शायद अपरिहार्य, तरीका था।

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