क्लाइव लॉयड – वेस्टइंडीज़ – रिकॉर्ड

Clive Lloyd Records

पूरा नाम – क्लाइव ह्यूबर्ट लॉयड

जन्म – 31 अगस्त, 1944, क्वींसटाउन, जॉर्जटाउन, डेमेररा, ब्रिटिश गयाना

प्रमुख टीमें – वेस्टइंडीज, ब्रिटिश गयाना, गयाना, लंकाशायर

उपनाम – बिग सी, ह्यूबर्ट

बल्लेबाजी शैली – बाएं हाथ के बल्लेबाज़

गेंदबाजी शैली – दाएं हाथ के मध्यम

अन्य – रेफरी

ऊँचाई – 6 फुट 4 इंच

टेस्ट पदार्पण (कैप 125) – 13 दिसंबर 1966 बनाम भारत
अंतिम टेस्ट – 30 दिसंबर 1984 बनाम ऑस्ट्रेलिया

एकदिवसीय पदार्पण (कैप 9) – 5 सितंबर 1973 बनाम इंग्लैंड
अंतिम एकदिवसीय – 6 मार्च 1985 बनाम पाकिस्तान

बल्लेबाजी और क्षेत्ररक्षण का औसत													 	मॅच 	पारी	नाबाद	रन	सर्वाधिक स्कोर	औसत	गेंद खेलीं	स्ट्राइक रेट	शतक	अर्धशतक	छ्क्के	कॅच	स्टमपिंग टेस्ट	110	175	14	7515	242*	46.67			19	39	70	90	0 एकदिवसीय	87	69	19	1977	102	39.54	2434	81.22	1	11		39	0 प्रथम श्रेणी	490	730	96	31232	242*	49.26			79	172		377	0 लिस्ट ए	375	343	72	10915	134*	40.27			12	69		146	0
Clive-Lloyd-Batting-and-Fielding-Records-in-Hindi
गेंदबाज़ी औसत													 	मॅच 	पारी	गेंदें	रन	विकेट	बेस्ट/पारी	बेस्ट/मॅच	औसत	रन प्रति ओवर	स्ट्राइक रेट	4 विकेट	5 विकेट	10 विकेट टेस्ट	110	45	1716	622	10	2/13	2/22	62.2	2.17	171.6	0	0	0 एकदिवसीय	87	10	358	210	8	2/4	2/4	26.25	3.51	44.7	0	0	0 प्रथम श्रेणी	490		9551	4104	114	4/48		36	2.57	83.7		0	0 लिस्ट ए	375		2938	1958	71	4/33	4/33	27.57	3.99	41.3	1	0	0
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सर क्लाइव लॉयड, बिना किसी शक के इस खेल में देखे गए, आज तक के सर्वश्रेष्ठ टेस्ट और एकदिवसीय कप्तान है | ऐसे कुछ ही क्रिकेटर है जिन्होंने एक पूरी पीढ़ी के कप्तानों को कुछ इस कदर प्रभावित किया हो, जैसा कि लॉयड ने किया | इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया की टीमों की कप्तानी करना इतना मुश्किल नहीं है | लॉयड ऐसी वेस्ट इंडीज टीम के कप्तान थे जिसमे अलग-अलग देशों जैसे कि गयाना, टीएनटी, बारबाडोस, इत्यादि, के खिलाड़ी शामिल थे, जो कि अपनी खुद की परेशानियाँ और सांस्कृतिक भिन्नताएं लेकर आये | इतिहास इस ओर इशारा करता है की कप्तान लॉयड के पास सर विव रिचर्ड्स, होल्डिंग, मार्शल, हाइनेस, ग्रीनिज और ऐसे कई सारे दिग्गजों के स्तर के खिलाड़ी थे | प्रतिभा और मिज़ाज़ साथ-साथ ही बढ़ते है और लॉयड के कारण, उनके नेतृत्व में टीम सबसे पेशेवर और शिष्ट टीमों में से थी |

31 अगस्त 1944 को गयाना के जार्जटाउन में जन्मे, लम्बे (6’5″) और पतले लॉयड ने अपना पदार्पण अपने मूल राज्य के लिए 19 वर्ष की कच्ची उम्र में किया | शीघ्र ही उन्होंने लंकाशायर लीग में 1967 में हैलिंग्डन का प्रतिनिधित्व किया | उनमे ऐसा कुछ था, जिसने हुनर पहचानने वालों का ध्यान आकर्षित किया, जब वारविकशायर और लंकाशायर दोनों ने उन्हें अपने पास रखने की कोशिश की | आखिर में, उन्होंने 1968 में लंकाशायर के लिए अपना पहला मैच खेला, जो की भारत के विरुद्ध मुंबई में वेस्ट इंडीज के लिए उनके पहले मैच के 2 साल बाद था | अपने पहले मैच में उन्होंने 82 और नाबाद 78 रनों की पारी ब्रेबोर्न स्टेडियम में खेली जो कि स्पिनरों की सहायता कर रहा था | सर गैरे सोबर्स के साथ बल्लेबाज़ी करते हुए वे टीम को जीत की ओर ले गए | घर जाकर, लॉयड ने अपना पहला शतक त्रिनिदाद में इंग्लैंड के विरुद्ध बनाया, जो कि उनकी टीम को हार से बचाने में कारगर साबित हुआ | अपनी टीम के लिए उन्होंने 18 शतक और बनाये और अपने टेस्ट करियर की समाप्ति 110 मैचों में 46.67 के औसत के साथ 7515 रन बनाकर की |

70 के दशक में लॉयड वेस्ट इंडीज के मध्य क्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे | उनकी बल्लेबाज़ी शैली में पैरों का कम-से-कम इस्तेमाल होता था, और एक भारी बल्ले के साथ, वे एक लम्बा फॉलो थ्रू लेकर बल उत्पन्न करते थे जो कि उनके विरोधियों के लिए भयावह होता था | उन्हें गेंदबाज़ी आक्रमणों को तहस-नहस करने के लिए जाना जाता था, खासतौर पर काउंटी स्तर पर, जहां ग्लॅमॉर्गन के विरुद्ध बिलकुल 2 घंटों में सबसे तेज़ दोहरा शतक लगाने का कीर्तिमान उनके नाम दर्ज था | लंकाशायर के लिए 47 के औसत से 1600 रन बनाने के कारण उन्हें 1971 में विसडेन क्रिकेटर घोषित किया गया था |

1974-75 के भारतीय दौरे पर उन्हें कप्तानी थमाई गयी | इस अतिरिक्त भार का उनपर कोई प्रभाव नहीं पड़ा और पहले ही टेस्ट में उन्होंने 85 गेंदों में 100 रन जड़ दिए, मुंबई में पांचवे टेस्ट में उन्होंने अपना करियर सर्वश्रेष्ठ 242 का स्कोर बनाया | इस शक्तिशाली प्रदर्शन की सहायता से, वेस्ट इंडीज श्रृंखला जीतने में सफल रहा | उनका अगला कार्यभार, ऑस्ट्रेलियाई दौरा, हालाँकि, उतना सफल नहीं रहा जब लिली और थॉमसन ने घरेलु टीम को 5-1 से जीत दिलाई | बल्लेबाज़ के रूप में लॉयड की जगह कभी संदेह में नहीं आयी क्योंकि वे लगातार रन बना रहे थे |

कंगारूओं के हाथों मिली इस शाही पराजय के बाद लॉयड ने अपनी कप्तानी में एक बदलाव किया | उन्होंने यह रणनीति बनायी जो कि विरोधियों को डराने का काम करती थी, जिसमे वे लम्बे तेज़ गेंदबाज़ों का इस्तेमाल करते थे जो कि गेंद को फर्राटे से डाल सकते थे | ऐसे पैंतरे ने न खेल पाने वाले तेज़ गेंदबाज़ों की एक पूरी पीड़ी को जन्म दिया, जो कि 90 के दशक तक वेस्ट इंडीज के रैंकिंग्स में वर्चस्व को बरकरार रखने में सहायक थे | ऐसे पैंतरे के कई सारे खोट भी थे: धीमी ओवर गति और विरोधी कप्तानों द्वारा धमकाने के आरोप भी काफी सामान्य थे | लेकिन जाहिर तौर पर टेस्ट क्रिकेट में एक चलन की शुरुआत तो हो ही गयी | लॉयड ने वेस्ट इंडीज को लगातार 75 और 79 के विश्व कप में जीत दिलाई; 1975 विश्व कप के फाइनल मैच में शतक भी लगाया | 83 के विश्वकप में भी वे जीत के प्रबल दावेदार थे, जब तक कि कपिल देव की टोली ने उन्हें रोक नहीं दिया |
1986 में 20 साल के एक फलदायी अंतर्राष्ट्रीय करियर के बाद, लॉयड ने गयाना और वेस्ट इंडीज की टीमों में एक सक्रीय रूचि दिखाई | इ एक मंझे हुए कमेंटेटर भी थे, लेकिन उनके अभाव का सही उपयोग आई.सी.सी. ने तब किया जब डरबन में खेले गए भारत-दक्षिण अफ्रीका टेस्ट मैच के लिए उन्हें मैच रेफ़री बनाया गया | यह लॉयड के लिए एक नई शुरुआत थी, जहां पहले खिलाड़ी उन्हें क्रिकेट के महात्मा के रूप में देखते थे |1996 के बदनाम विश्व कप सेमीफइनल को भी उन्होंने ऑफिशिएट किया और कोलकाता की भीड़ के भड़कने और आपे से बाहर होने के कारण श्री लंका को विजेता घोषित कर दिया | हालाँकि, वेस्ट इंडीज क्रिकेट के ढलान पर जाने के कारण वे टीम के मैनेजर बन गए | हालाँकि, उन्हें यह प्रशासनिक पद पसंद नहीं था, कर्तव्यबोध ने उन्हें प्रगतिशील रखा, लेकिन तीन सालों के बाद, उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया और आई.सी.सी. मैच रेफ़री के रूप में अपना कार्य पुनःप्रारम्भ कर दिया | हाल ही में 2008 में, उन्हें आई.सी.सी. क्रिकेट समिति का अध्यक्ष बनाया गया, जब सुनील गावस्कर ने पद से इस्तीफा दे दिया |

विशिष्ट तथ्य:
1) अपनी शुरूआती किशोरावस्था में स्कूल में हुई एक लड़ाई में उनकी आँखों को क्षति पहुंची थी | तभी से वे चश्मा लगाते हैं |

2) वे एक उपयोगी दाये हाथ के मध्यम तेज़ गेंदबाज़ थे और उनके नाम 114 प्रथम श्रेणी विकेट भी दर्ज हैं |

3) खेल के लिए उनके परिश्रम, जिसने बहुतों को प्रेरित किया है, के कारण उन्हें ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड द्वारा नाइट की उपाधि दी जा चुकी है |

4) वेस्ट इंडीज के मशहूर स्पिनर लांस गिब्स उनके कजिन(भाई) हैं |

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