सर गॅरी सोबर्स – वेस्टइंडीज़ – रिकॉर्ड

Sir Garry Sobers Records

पूरा नाम – गारफ़ील्ड सेंट औबुरन सोबर्स

जन्म – 28 जुलाई, 1936, चेल्सी रोड, बे लैंड, सेंट माइकल, बारबाडोस

प्रमुख टीमें – वेस्टइंडीज, बारबाडोस, नॉटिंघमशायर, दक्षिण ऑस्ट्रेलिया

गैरी सोबर्स के रूप में भी जाना जाता है

भूमिका – ऑलराउंडर

बल्लेबाजी शैली – बाएं हाथ के बल्लेबाज़

गेंदबाज़ी शैली – बाएं हाथ के तेज-मध्यम, धीमी बाएं हाथ से ओर्थोडॉक्स, धीमी बाएं हाथ से चाइना-मॅन

ऊँचाई – 5 फीट 11 इंच

टेस्ट पदार्पण (कैप 84) – 30 मार्च 1954 बनाम इंग्लैंड
अंतिम टेस्ट – 5 अप्रैल 1974 बनाम इंग्लैंड

केवल एकदिवसीय (कैप 11) – 5 सितंबर 1973 बनाम इंग्लैंड

Batting and fielding averages
Mat Runs HS Ave SR 100 50 4s 6s Ct
Tests 93 8032 365* 57.78 26 30 109
ODIs 1 0 0 0 0 0 0 0 0 1
First-class 383 28314 365* 54.87 86 121 407
List A 95 2721 116* 38.32 1 18 41
Bowling averages
Mat Wkts BBI BBM Ave Econ SR 4w 5w 10
Tests 93 235 6/73 8/80 34.03 2.22 91.9 8 6 0
ODIs 1 1 1/31 1/31 31 2.95 63 0 0 0
First-class 383 1043 9/49 27.74 2.45 67.8 36 1
List A 95 109 5/43 5/43 21.95 3.27 40.2 4 1 0

सर विव रिचर्ड्स – वेस्टइंडीज़ – रिकॉर्ड

क्रिकेट एक शानदार मेहमान है, जिसे कई सारी किंवदंतियों की संगति का आनंद उठाने का गौरव प्राप्त हैं | एक बहुमुखी प्रतिभावान व्यक्तित्व गैरी सोबर्स, जिन्हें डोनाल्ड ब्रॅडमन द्वारा ‘एक में पांच क्रिकेटर’ के रूप में वर्णित किया गया था, शब्द के सबसे सही प्रारूप में किंवदंती थे | विकेट-कीपिंग को छोड़कर, ऐसा कुछ नहीं था जिसे क्रिकेट के मैदान पर अंजाम देने में वे असमर्थ हो | उनके बाद रिचर्ड हेडली, इमरान खान, कपिल देव, और सबसे नए जैक्स कालिस क्रिकेट मंच पर आये, लेकिन सोबर्स को जगत भर में हर-समय के सर्वश्रेष्ठ ऑल-राउंडर का शीर्षक प्राप्त है |



सोबर्स एक प्रतिभावान गेंदबाज़ थे, और एक चतुर गेंदबाज़ – जो कि बाए हाथ से परम्परावादी फिरकी और बाए हाथ से स्विंग गेंबाज़ी भी कर लेते थे | साथ-ही-साथ वे बाए हाथ से कलाई स्पिन भी करा लेते थे | वे एक कुशल और फुर्तीले क्षेत्ररक्षक भी थे | कोई ये माने या न माने, गैरी सोबर्स कई क्षेत्ररक्षण स्थलों पर बराबर रूप से चुस्तता दिखते थे | और-तो-और, वे एक आक्रामक कप्तान भी थे |

एक सामान्य रूप से बड़े वेस्ट इंडियन परिवार के पांचवे बच्चे, सोबर्स ने खुद को अपने भाइयों के साथ बीच क्रिकेट में झोक दिया | स्कूल क्रिकेट और बारबाडोस क्रिकेट लीग में अपने हरफनमौला प्रदर्शन से लोगों को प्रभावित करने के बाद, सोबर्स ने खुद को 17 वर्ष की आयु में अंतर्राष्ट्रीय अखाड़े में उतार दिया, अपने जीवन के उस समय में वे खिलाडी बन गए, जिस समय उनके सहपाठी बस्ता बाँध स्कूल जाने की तयारी कर रहे थे |

सर डॉन ब्रॅडमन – ऑस्ट्रेलिया – रिकॉर्ड

सोबर्स ने अपना टेस्ट पदार्पण इंग्लैंड के विरुद्ध जमैका में मुख्य रूप से एक गेंदबाज़ के तौर पर किया |अपने शुरूआती दिनों में, गेंदबाज़ी उनकी ताकत थी और बल्लेबाज़ी में वे काम चला लेते थे | जैसे-जैसे उनके गौरवशाली करियर में बढ़ोतरी हुई, किरदार उलटे हो गए, जो कि सोबर्स की अनुकूलक प्रतिभा की निशानी था |

उनकी बल्लेबाज़ी शिखर पर उस समय पहुंची जब उन्होंने घर में पाकिस्तान के खिलाफ अविजित रहते हुए 365 रनों की विराट पारी खेली, एक कीर्तिमान जो कि टेस्ट क्रिकेट के सर्वाधिक निजी स्कोर के रूप में 36 लम्बे वर्षों तक कायम रहा, जब तक कि ब्रायन लारा ने यह सम्मान 1994 में अपने नाम नहीं कर लिया | इस पारी से सोबर्स के ब्रैडमैन-जैसे दौर की शुरुआत हुई, जब सोबर्स ने अपनी अगली पांच श्रृंखलाओं में 500 से अधिक रन बनाये जिसमे कवर-ड्राइव और हुक शॉटों के साथ ही काफी सारे शॉटों की भरमार थी |



सोबर्स ने 1958-59 के भारतीय दौरे पर तीन शतक लगाए, सुभाष गुप्ते को भी उन्होंने वश में कर लिया, जैसे कोई रिंगमास्टर जानवरों को वश में करता है | गेंद से भी वे चूके नहीं, और गुगलियों और चाइनामैन के साथ भारतीय सतह का सही इस्तेमाल किया | और फिर, जॉन-स्नो की अगुवाई में अंग्रेज़ों के गेंदबाज़ी आक्रमण के विरुद्ध उन्होंने अपना खेल और भी ऊंचे स्तर का कर लिया | 101.28 के औसत से कैरिबियाई धरती पर उन्होंने 709 रन बनाये, जिसमे एक बेमिसाल 226 रनों की पारी जो कि फ्रैंक वोरेल के साथ 399रनों की साझेदारी में खेली गयी, भी शामिल थी, जब यह साझेदारी साढ़े 9 घंटों तक चली |

कंगारूओं की चुनौती पर भी गैरी उबरकर आये | परीकथाओं-से ब्रिस्बेन टेस्ट में उन्होंने 132 रन बनाये-जो कि पहला टाईड टेस्ट था- जिसके बाद उन्होंने एस.सी.जी. में 1961 में आक्रामक 168 रनों की पारी खेली | उनके सबसे बेहतरीन गेंदबाज़ी आंकड़े (6-73) भी ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध ही आये जब उन्होंने 1968-69 के ब्रिस्बेन टेस्ट में गेंदबाजी की शुरुआत की |

क्लाइव लॉयड – वेस्टइंडीज़ – रिकॉर्ड

गौरपूर्वक, उनकी फिटनेस की चरमसीमा उस ‘टाईड टेस्ट’ श्रृंखला में दिखाई दी जहां सोबर्स ने लगातार 22-8 गेंदों के ओवर डाले, जहां की उमस के कारण कई खिलाड़ी मैदान पर खड़े भी नहीं हो पा रहे थे |

सर फ्रैंक वोरेल के प्रस्थान के बाद सोबर्स पर टीम की अगुवाई करने का दायित्व आया | कप्तान के रूप में उन्हें काफी सफलता मिली, जहां उन्होंने वेस्ट इंडीज का 39 टेस्टों में नेतृत्व किया, जब तक कि क्लाइव लॉयड ने इस आंकड़े को 74 तक नहीं पहुंचा दिया |

अपने आप को हर परिस्थिति और सत्र में स्थापित करने के बाद, यह आश्चर्यजनक नहीं था सोबर्स की मांग कैरिबियाई प्रदेश के बाहर भी होने लगी | सोबर्स ने इंग्लैंड में रैडक्लिफ क्रिकेट क्लब और नॉर्टन क्रिकेट क्लब में अपने कार्यकाल के अलावा नॉटिंघमशायर का भी प्रतिनिधित्व किया | उन्होंने विशिष्टता से दक्षिण ऑस्ट्रेलिया का भी प्रतिनिधित्व किया, जहां उनके पास एक अनूठा आंकड़ा हैं, एक ही सीजन में 1000 रन और 50 विकेट, जो कि उन्होंने 1962-63 में हासिल किया था | उनकी बहु -आयामी प्रतिभा, जो कि उनके स्वर्णिम भार के बराबर मूल्यवान थी, ऑस्ट्रेलिया में दर्शकों को काफी आकर्षित करती थी |



हालाँकि, ये इंग्लिश काउंटी क्रिकेट में हुआ जहां सोबर्स ने दोषहीन छक्के मारे, और 1968 में ग्लैमॉर्गन के मैलकम नैश के विरुद्ध नॉटिंघमशायर की ओर से एक ओवर में 36 रन जड़ दिए, और अपनी भारी सीवी में यह भी जोड़ लिया |

उचित रूप से, इंग्लैंड के विरुद्ध उनके आखिरी टेस्ट के कुछ माय पश्चात उन्हें 1975 में नाईट की पदवी दी गयी | बारबाडोस के कैबिनेट द्वारा बारबाडोस के राष्ट्रीय हीरो घोषित होने के बाद, सर गारफील्ड सोबर्स को 2000 में पांच विसडेन क्रिकेटर्स ऑफ़ द सेंचुरी में से एक चुना गया |

दिलचस्प तथ्य:
1. जन्म के समय सोबर्स के हाथ में एक अतिरिक्त ऊँगली थी जिसे जन्म के समय ही हटा दिया गया था |
2. संन्यास के पश्चात, उन्होंने क्रिकेट के बारे में एक बाल उपन्यास लिखा, जिसका शीर्षक था, ‘बॉनवेन्चर एंड द फ्लैशिंग ब्लेड’ |

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Sir Garry Sobers Records | West Indies | CricketinHindi.com
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