आईपीएल 2017 – टी नटराजन 3 करोड़, मोहम्मद सिराज 2.6 करोड़ (T Natarajan KXIP and Mohammed Siraj SRH in IPL 2017)

T Natarajan KXIP and Mohammed Siraj SRH in IPL 2017

यह कहानी उन कहानियों में से हैं जो आपने कई दफा सुनी होंगी। रंक से राजा तक का सफर। एक दलित का उदय।

तेज गेंदबाज टी नटराजन और मोहम्मद सिराज ने अभी तक की अपनी ज़िन्दगी पददलित तरीके से बिताई हैं। लेकिन, आईपीएल 2017 के ऑक्शन खत्म होते ही इन दोनों खिलाड़ियों की किस्मत ने एक नयी दिशा ले ली, एक ऐसा मोड़ जिसने इन दोनों गेंदबाजों को अपनी निज़ी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी आमदनी दिला दी। 25 वर्षीय ,बाए हाथ के ,नटराजन ने भारतीय नवोदित खिलाड़ियों में सबसे ज्यादा 3 करोड़, अपनी बेस प्राइस 10 लाख से 30 गुना, अर्जीत किया। वहीं, 22 वर्षीय दाएं हाथ के तेज गेंदबाज, मोहम्मद सिराज ने आकर्षक 2.6 करोड़ अर्जित किये।

चिन्नामप्पाम्पात्ति, तमिल नाडु के दैनिक मजदूर थांगरासु और मांस विक्रेता शांता के घर जन्मे नटराजन पाँच भाइयों में सबसे बड़े हैं, और शुरुआत से ही क्रिकेट में लीन थे।

सिराज का क्रिकेट के प्रति प्रेम सांतवीं कक्षा से शुरू हुआ जब उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के दिन अन्तर स्कूल क्रिकेट टूर्नामेन्ट जीता। खाजा नगर , हैदराबाद में ऑटो चालक के घर जन्मे, सिराज ने कई दफा, ख़ुशी ख़ुशी, क्रिकेट की वज़ह से अपनी स्कूल की क्लास छोड़ दिया करते थे।

20 वर्ष की उम्र तक नटराजन को क्रिकेट में कोई दिलचस्पी नहीं थीं और मोहम्मद सिराज का भी कुछ ऐसा ही हाल था। “टेनिस गेंदों से बल्लेबाजों की ओर तेजी से गेंद फेकना” क्रिकेट की परिभाषा कुछ ऐसी थी इन दोनों के लिए। नटराजन का इस खेल के प्रति प्रेम उनके पड़ोसी, जयप्रकाश अन्ना- चिन्नप्पाम्पत्ति क्रिकेट क्लब के चालक, को देखकर बढ़ा। उनके सटीक यॉर्कर की तारीफ़ पहली दफा उसी क्लब में हुई थीं।

“मुझे याद हैं कि मैंने सुपर ओवर में अपने टीम को जिताया था. मैनें तीन गेंदें डाली और उनमें से दो यॉर्कर थी- दोनों पे विकेट। मैंने बहुत सारी प्रतियोगिता अपने यॉर्कर से ही जीती हैं।”

जयप्रकाश चाहते थे की नटराजन अपनी यह काबिलियत क्रिकेट की गेंद से भी दिखाए। उन्होंने अपने क्लब के उभरते हुए साथियों को चेन्नई जाकर प्रतियोगी लीग्स में खेलने का उपदेश दिया। अपनी छमता की वाह्वाही पाने से पहले नटराजन के लिए क्रिकेट गेंद से पकड़ बनाना बहुत ही कठिन था। ” शुरुआत में मुझे गेंद पर पकड़ बनाने में एवम नियंत्रण रखने में काफ़ी मुश्किलें होती थी, लेकिन मैं वक़्त के साथ परिस्थितियों के अनूकूल हो गया।”

दूसरी तरफ़ सिराज के साथ ऐसी कोई दिक़्क़त नहीं हुई। “क्रिकेट गेंद मेरे लिए बिलकुल भी अलग नहीं था, मैं बस गेंद थाम कर तेज गेंद्बाजी करना चाहता था।” वह बोले। ” मैं स्वाभाविक रूप से एक इनस्विंग गेंदबाज हूँ। मैंने कभी अलग तरह (आउट स्विंग) की गेंद करने का प्रयास नहीं किया। मैं अपनी गेंदबाजी में ज्यादा प्रयोग नहीं करता और अपनी ताकतों पे ध्यान देता हूँ। मैं कोई भी ऐसा प्रयोग नहीं करना चाहता जिससे मेरी गति धीमी हो जाए।

2015 में अपनी छमता से आस पड़ोस में नाम करने के बाद भी उनके मित्र ने उन्हें दोष देते हुए कहा कि वह अपनी काबिलियत का पूरा इस्तेमाल नहीं करते। ” उसने मुझे अपने एक दोस्त के बारे में बताते हुए कहा कि वह चारमीनार सीसी में खेलता हैं और मुझे वहाँ गेंदबाजी करनी चाहिए” सिराज बोले। अपनी पसंदीदा चीज़ के लिए तैयार होकर, सिराज ने वहां बल्लेबाजों को अपनी गति और बाउंस से परेशान कर घुटने टेकने को मजबूर कर दिया। उनकी गेंदबाजी हैदरबाद के लोकल क्रिकेट विशषज्ञों की नज़र से बच नहीं पायी।

“मैं मैच दर मैच 5 विकेट चटकाते आ रहा था। आप उस इंसान को कैसे नज़रंदाज़ कैसे कर सकते हैं जो आपके अख़बार का रोज हिस्सा बनता हैं?” वह बोले। “उन्होंने फिर मुझे सीनियर ज़ोनल टीम में शामिल किया और बाद में मैं राज्य अंडर-23 का हिस्सा बन गया। फिर मैंने एक मैच में 5 विकेट लिया और मेरी ज़िंदगी बदल सी गयी।”

दूसरी तरफ़, नटराजन की सराहना उनके तमिल नाडु प्रीमियर लीग के प्रदर्शन के बाद से हुई। डिंडीगुल ड्रैगन्स की टीम से खेलते हुए , उन्होंने 7 मैचों में मात्र 7.5 रन प्रति ओवर की औसत से किफ़ायती गेंदबाजी करते हुए 10 विकेट चटकाए। टूटी पेट्रियटस, लीग की चैंपियन टीम, के खिलाफ सुपर ओवर में गेंदबाजी करते हुए यॉर्कर का सही इस्तेमाल कर उन्होंने 12 रन रोक दिए थे।

आईपीएल टीमों में बैठे विशेषज्ञों ने अगर उनकी काबिलियत को नजरअंदाज कर भी दिया होता तो उनके रणजी ट्रॉफी सीजन 2016-17 के प्रदर्शन को अनदेखा करना नामुमकिन था। के विघ्नेश और अस्विन क्रिस्ट के साथ नटराजन ने तमिल नाडु की गेंदबाजी का कमान पूरी ज़िम्मेदारी से संभाला, जिसके फलस्वरूप तमिल नाडु रणजी ट्रॉफी के फाइनल तक पहुँच पायी। 2014-15 के रणजी सीजन में पदार्पण करने के बाद, संदिग्ध एक्शन के कारण नटराजन को काफी मुश्किलें आयी थी। एक्शन को सही कर उन्होंने इस सीजन के 8 मैचों 24 विकेट लिए थे, जिसमे क्वार्टर फाइनल में कर्नाटक के ख़िलाफ़ 6 विकेट शामिल हैं।

नटराजन की तरह सिराज ने भी 2015-16 में अपना पहला मैच खेला था। अपने पहले पुरे सीजन के 9 मैचों में 18.92 की औसत से 41 विकेट चटकाए और वह विकेट तालिका में तीसरे स्थान पर थे। इस प्रदर्शन के बदौलत उन्हें ईरानी ट्रॉफी में रेस्ट ऑफ़ इंडिया के लिए चुना गया , जहाँ उन्होंने अपने बाउंसर्स से गुजरात के बल्लेबाजों को भौचक्का कर दिया था।

पिछले हफ्ते ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलने वाली इंडिया ए टीम में सिराज का चयन हुआ था, हालांकि वो आखरी XI का हिस्सा नहीं बन पाए। लेकिन पिछले तीन दिनों में आईपीएल ऑक्शन ने उन्हें वो सारी खुशियां दे दी हैं, जिसका उन्होंने अनुमान भी नहीं किया होगा।

ऑक्शन से एक दिन पहले , सिराज ने बताया कि किस तरह वो रणजी ट्रॉफी की पारिश्रमिक का इंतज़ार कर रहे थे ताकि वह अपने पिताजी को ऑटो रिक्शा चलाने से रोक सके। “अगर वह एक क्रिकेटर की नहीं सुने , तो किसकी सुनेंगे?” मुस्कराहट के साथ बोले। एक दशक पहले, अपने इंजीनियर भाई के इंतकाल के बाद, उन्होंने अपने माँ बाप का सहारा बनने में कोई कसर नहीं छोड़ी हैं।

” मेरे बड़े भाई की मृत्यु ने मेरे माता पिता को सबसे ज्यादा दुःख में डाल दिया था।” वह बोले। ” आख़िरकार मेरे भईया उनके पहले संतान थे। अब उन्हें मेरे क्रिकेट से काफी खुशी मिलती हैं। मैं उन्हें कभी निराष नहीं करना चाहता और उनके आशीर्वाद से, आईपीएल के बाद एक दिन भारत के लिए भी खेलूँगा।

नटराजन को भी यह उम्मीद थी की आईपीएल में चयन के बाद उनके परिवार की आर्थिक स्तिथि बेहतर हो जाएगी। “रोम्बा रोम्बा संधोषम इरुकके (मैं अब बहुत ही खुश हूँ)। मैंने कभी भी ऑक्शन में इतने ज्यादा पैसे की उम्मीद नहीं की थी। मेरा परिवार इस वजह से बहुत खुश हैं। मैं अभी चिन्नप्पाम्पत्ति जा रहा हूँ ,जहाँ मेरे परिवार वाले और मेरे दोस्त इस खुशी के पल को बाँटने का इंतज़ार कर रहे हैं।”

सिराज के लिए ख़ुशी का माहौल तो हर वक़्त लगा ही रहता हैं। ” हमारे मौहल्ले में तो मेला ही चलता रहता हैं” उन्होंने कहा। ” मैं अपने आस पास के लोगों के लिए एक उदाहरण बनना चाहता हूँ, ताकि लोग मेहनत और जज़्बे से आगे बढ़ पाए।”

सिराज, जो एक छोटे से घर में रहने के आदि हैं, घरेलु सीजन में बड़े बड़े होटल में ठहर कर वह खुद को अचंभित पाते हैं। ” मैं पहली दफ़ा इतने आलिशान होटल में ठहरा था। वहां की सुख सुविधा देखकर ….. मेरे पास कोई शब्द ही नहीं हैं।”

“हालांकि, अच्छी ऑक्शन के बाद नटराजन अपने कन्धों पर आने वाली ज़िम्मेदारी को बखूबी जानते हैं। ” इसके साथ काफी दबाव भी हैं और मुझे अपनी काबिलियत किंग्स XI पंजाब में दिखानी होगी।”

आशा के अनुकूल सिराज और नटराजन से एक बेहतरीन आईपीएल की उम्मीद हैं, लेकिन इस मंच ने कईं ईमारतों को बनने से पहले बिखरते देखा हैं- ऑक्शन में बड़े रकम के दबाव में आकर या रंगारंग पार्टियों के माहौल में बहकर।

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