आईपीएल में विराट कोहली और युवराज सिंह जैसे सितारे तो विफल रहे, लेकिन 2018 में चीज़ें कुछ अलग होंगी

IPL stars Kohli Yuvraj to comeback in 2018

यह राइजिंग पुणे की ओर से एक महान प्रदर्शन था क्योंकि वे इंडियन प्रीमियर लीग के फाइनल में अनुभवी चैंपियन मुंबई इंडियंस से भिड़े थे, जो आईपीएल में 10 साल पूरे कर चुके हैं। यात्रा से थकि हुई आठ टीमें देश की लंबाई और चौड़ाई को तय कर रही थीं और आखिरी हफ्ता काफी रोमांचक था। हालांकि कुछ लोगों ने कोलकाता नाइट राइडर्स और सनराइजर्स हैदराबाद के फाइनल में पहुँचने की भी उम्मीद की थी।

निश्चित रूप से हैदराबाद के प्रशंसकों को निराशा हाथ लगी होगी क्योंकि दक्षिण की टीमों में से न तो हैदराबाद और ना ही रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर फाइनल में जगह बना पाई। हालांकि, यह उनकी भावना को कमजोर नहीं करता क्योंकि टूर्नामेंट काफी रोमांचक था। रोहित शर्मा बनाम स्टीव स्मिथ की कप्तानी और एमएस धोनी की प्रतिभा देखने लायक थी क्योंकि वह अब भी पुणे के लिए मैच जीता सकते हैं। यह एक ऐसा टूर्नामेंट था जिसमें उत्साह और रोमांच की कोई कमी नहीं थी।

ट्वेंटी 20 क्रिकेट न सिर्फ दर्शकों को त्वरित रोमांच उपलब्ध करा रहा है, बल्कि दुनिया भर में क्रिकेट प्रशंसकों के लिए पहली पसंद बनता जा रहा है। यह प्रारूप दुनिया भर में खेला जाने लगा है। आईपीएल के अगले संस्करण के शुरू होने तक बहुत सारी चीजें हैं जो बदलने जा रही हैं।

स्टीव स्मिथ की अगुवाई वाली पुणे टीम के प्रशंसक दुखी हैं क्योंकि टीम फाइनल के बाद भंग हो गई है और आगे नहीं खेल पायेगी। अब यह देखने वाली बात है कि आईपीएल की गतिशीलता कैसे काम करती है। दो साल पहले जब पुणे और गुजरात लायंस चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के दो साल के निलंबन से बनी रिक्तियों की वजह से आये थे, तो यह स्पष्ट था कि वे यहां सिर्फ दो साल के लिए ही हैं।

कोच्चि टस्कर्स जो कि आईपीएल की एक पूर्व टीम है, ने हाल ही में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के खिलाफ मध्यस्थता का मामला जीत लिया और यह स्पष्ट कर दिया कि उन्हें मुआवजे में कोई दिलचस्पी नहीं है लेकिन आईपीएल में वापसी करना उनका मुख्य लक्ष्य है। दिलचस्प समय आगे है। यह देखने लायक होगा कि आईपीएल में चीजें कैसे आगे बढ़ती हैं।

आईपीएल के प्रारूप को घर पर जितनी सफलता मिली है, उस हिसाब से इस टूर्नामेंट के विस्तार के लिए कदम उठाये जाने जायज़ हैं। अगर देखा जाए तो इतनी यात्रा के बावजूद आईपीएल सफल रहा है और भले ही टीमों को होटल में सूटकेस खोलने का भी मौका ना मिले पर उन्हें कोई दिक्कत नहीं हैं। लेकिन किसी को भी इस कड़ी मेहनत से कोई परेशानी नहीं है क्योंकि बड़े से बड़े और छोटे से छोटे नाम वाले खिलाड़ियों को भी इस टूर्नामेंट में भारी रकम दी जाती है।

एक तरफ, आपके पास कई ऐसे सुपरस्टार हैं जो आईपीएल से अपना जीवनयापन करते हैं। पर स्पेक्ट्रम के दूसरे छोर पर आपके पास जहीर खान जैसे खिलाड़ी भी हैं जो पूरे साल क्रिकेट नहीं खेलते हैं और फिर आईपीएल में एक मैच में चार ओवरों की गेंदबाजी करने के लिए तैयार हो जाते हैं।

यह सुनिश्चित है कि 2018 में चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स की वापसी दिलचस्प होगी। दो साल का ब्रेक होने के बावजूद उनका प्रशंसकों का आधार कम नहीं हुआ है। आप धोनी को अपनी मूल आईपीएल टीम में देख सकते हैं और ऐसे कई खिलाड़ी हैं जो राजस्थान की टीम में भी स्थान ले सकते हैं।

अगले साल से दस टीमों वाला आईपीएल खेला जायेगा, यह महज कागजों पर नहीं है बल्कि यह सोच यथार्थवादी भी है। बीसीसीआई पूरी कोशिश कर रहा है कि यह संभव हो सके। हर कोई 100 प्रतिशत प्रयास करता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मैच बेहतरीन तरीके से आयोजित किए जाएं।

इस वर्ष के मैचों के आयोजन में कुछ राज्य संघों ने “व्यवहार” कैसे किया, यह थोड़ा चिंताजनक जरूर रहा। लेकिन कानपुर को छोड़कर, जहां “सट्टेबाजी” और सट्टेबाजों की गिरफ्तारी की खबरें थी, इस साल का आईपीएल एक अच्छी घटना रही है।

2018 में आईपीएल में टीमों की संख्या को बढ़ाने की एक मजबूत संभावना है। जिस तरह से शेयर बाजारों में भारत की वापसी हुई है और अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में है, आईपीएल के इंतजार में कई प्रायोजक कतार में खड़े हैं।

टीमों की बनावट में आये परिवर्तन को देखना दिलचस्प होगा। चाहे सभी खिलाड़ियों को टीम में रखा जाए या फिर अगले आईपीएल के लिए ताजा नीलामियां हों या टीमों को छह पुराने खिलाड़ी रखने की इजाजत मिलती है, इस समय कुछ भी स्पष्ट नहीं है। जैसे क्लब फ़ुटबॉल लगातार यूरोप में विकसित हो रहा है, आईपीएल भी उसी तरह खिलाड़ियों के प्रवास के साथ 2018 में एक नया रूप ले सकता है।

कोई यह सोच सकता है कि आईपीएल सिर्फ सुपरस्टार खिलाड़ियों का टूर्नामेंट है। लेकिन जिस तरह से विराट कोहली और युवराज सिंह और क्रिस गेल और ग्लेन मैक्सवेल जैसे बड़े नाम इस आईपीएल में फ्लॉप रहे हैं और आईपीएल में भारत से अपेक्षाकृत अनजान युवा खिलाड़ी स्पॉटलाइट चुरा ले जाने में कामयाब हुए हैं, उस तरह से आगे के सालों में टूर्नामेंट में क्या होता है यह देखना दिलचस्प होगा। अगले साल से एक शहर-आधारित फ्रैंचाइज़ी प्रणाली पर इंग्लैंड भी एक ट्वेंटी -20 टूर्नामेंट का आयोजन करने के लिए तैयार है और इसमें 20 टीमों के शामिल होने का उल्लेख है।

भारत में भले ही प्रायोजक और कॉरपोरेट घराने ओलंपिक खेल को फन्ड करने के लिए अनिच्छुक हो सकते हैं, लेकिन आईपीएल में बड़े पैमाने पर पैसा खर्च करने के लिए काफी लोग तैयार हैं। यह आधुनिक क्लब क्रिकेट की ताकत को दर्शाता है।

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