सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रह्मण्यम स्वामी की आई पी एल प्रसारण अधिकार की ई-नीलामी याचिका खारिज की

SC rejects Swamy plea for e-auction of IPL media rights

बोर्ड ऑफ कण्ट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (बीसीसीआई) के पक्ष में, सुप्रीम कोर्ट ने आई पी एल के प्रसारण अधिकार की ई नीलामी प्रक्रिया को निरस्त कर दिया। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ई नीलामी ज़रूरी नहीं है और यह मीडिया के अधिकार प्रक्रिया के आड़े नहीं आयेगा। एम पी सुब्रह्मण्यम स्वामी ने अपनी याचिका में लोढ़ा समिति की सिफारिशों के मद्देनजर पारदर्शिता हेतु ई नीलामी प्रक्रिया की मांग की थी।

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किन्तु सुप्रीम कोर्ट ने ई नीलामी की आज्ञा नहीं दी और अब बी सी सी आई बंद निविदा प्रक्रिया के द्वारा नीलामी कराएगी क्योंकि उनका मानना है कि सर्वाधिक मूल्य के लिये यही प्रक्रिया सबसे बेहतर है। अधिकार को तीन भागों में बांटा गया है- भारतीय उपमहाद्वीप टीवी प्रसारण अधिकार, भारतीय उपमहाद्वीप डिजिटल अधिकार और शेष विश्व का मीडिया अधिकार।

निविदा आमंत्रण जमा करने की तिथि बदल कर 1 सितम्बर की गई थी। इंडियन प्रीमियर लीग के प्रसारण अधिकार की निविदा के खरीददारों में अन्य कंपनियों के साथ स्टार इंडिया, सोनी, ऐमज़ॉन और रिलायंस जैसे खरीददारों की मौजूदगी बी सी सी आई की इस टी 20 लीग को और अधिक लाभदायक बनायेगी।

बी सी सी आई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने क्रिकनेक्सट को बताया ” हमारा प्रयास है कि टी 20 लीग को हर साल नयी ऊंचाई पर लेकर जाएँ। इस आयोजन को बड़ा और बेहतर बनाते समय हम खेल को पहली प्राथमिकता देते हैं और नीलामी में लोगों की रूचि यह दर्शाती है कि यह ब्रांड कितना आगे जा चुका है। तारीख़ में बदलाव बैंक अवकाश को ध्यान में रखकर किया गया है ताकि नीलामी में भाग लेने वालों को कोई समस्या न हो।”

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स्वामी ने मई में लोढ़ा समिति से ई नीलामी शुरू करने की प्रार्थना की थी। उन्होंने लिखा “प्रधानमंत्री कहते हैं कि हमें डिजिटल दुनिया में कदम रखना चाहिए तब बी सी सी आई की नीलामी प्रक्रिया एक बंद कमरे के अंदर क्यों होती है? सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि जहाँ ई नीलामी संभव हो वहाँ उसे लागू किया जाये।”

जिन 18 कंपनियों ने अक्टूबर 2016 में आई पी एल प्रसारण अधिकार की निविदा खरीदी थी, वह सभी कंपनियां तथा दो नयी कंपनियां युप टीवी और डिस्कवरी नीलामी प्रक्रिया केे योग्य हैं। सभी अधिकार अगले पांच वर्ष 2018-2022 के लिये होंगे।

यह संज्ञान में आया है कि सभी कंपनियां जिन्होंने निविदा खरीदी है, बिना किसी अतिरिक्त खर्च के नीलामी प्रक्रिया के योग्य हैं क्योंकि लोढ़ा समिति के प्रतिबन्ध की वजह से नीलामी के सही समय पर न हो पानेे में उनका कोई दोष नहीं था।

लोढ़ा समिति ने प्रश्न किया था कि 2018 के प्रसारण अधिकार की नीलामी 2016 में करने के पीछे क्या तथ्य है।

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बी सी सी आई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया ” सभी कंपनियां जिन्होंने 2016 में निविदा खरीदने में रूचि दिखाई, नीलामी प्रक्रिया में सम्मिलित होने योग्य हैं। बी सी सी आई के प्रक्रिया आगे बढ़ाने की आज्ञा न मिलने में उनका कोई दोष नहीं था। उनसे निविदा खरीदी के लिए कोई अतिरिक्त खर्च नहीं लिया जायेगा। अब हमारे पास युप टीवी और डिस्कवरी कम्युनिकेशन्स सहित 20 कंपनियां हैं जो बोली लगाने के योग्य हैं।”

18 योग्य कंपनियां हैं- स्टार इंडिया, ऐमज़ॉन सेलर सर्विसेज़, फॉलोऑन इंटरेक्टिव मीडिया, ताज टीवी इंडिया, सोनी पिक्चर्स नेटवर्क, टाइम्स इंटरनेट, सुपेरस्पोर्ट इंटरनेशनल, रिलायंस जियो डिजिटल, गल्फ डी टी एच एफ़ ज़ेड एल एल सी, ग्रुप एम इंडिया, बी आई एन, इकोनेट मीडिया, स्काई यू के, ई इस पी एन डिजिटल मीडिया, बी टी जी लीगल सर्विसेज़, बी टी पी एल सी, ट्विटर, फेसबुक आई एन सी

Source: Supreme Court Dismisses Subramanian Swamy’s Plea for E-auction of IPL Media Rights

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