वीवो ने बड़ी बोली के बाद 2022 तक आईपीएल का अधिकार बनाए रखा

Vivo retains IPL rights till 2022

चीनी मोबाइल हैंडसेट निर्माता वीवो ने अगले पांच सत्रों (2018-2022) के लिए इंडियन प्रीमियर लीग के शीर्षक प्रायोजन अधिकारों को 2199 करोड़ रूपये (लगभग यूएस $ 341 मिलियन) की जिताऊ बोली के साथ बनाए रखा है| 2012 में हस्ताक्षर किए पांच साल के अनुबंध में 454% की बढ़ोतरी देखने को मिली है|

वीवो ने पहली बार पेप्सिको इंडिया से दो संस्करणों के लिए अक्टूबर 2015 में शीर्षक प्रायोजन जीता था, जिन्होंने अपने पांच साल के अनुबंध को दो साल पहले ही समाप्त कर दिया था, जो 396 करोड़ रूपए का था। बीसीसीआई के सीईओ राहुल जोहरी के अनुसार, वीवो की पिछली व्यवस्था में उन्हें प्रति वर्ष 100 करोड़ रुपये से “ज़रा कम” देना पड़ा।

शीर्षक अधिकारों के इस चक्र के आधार मूल्य को पिछले साल जितना वीवो ने भुगतान किया गया था, उससे 15% अधिक निर्धारित किया गया था और कंपनी एक अन्य स्मार्टफोन निर्माता ओप्पो की 1430 करोड़ रूपए की एकमात्र अन्य बोली से आगे रही। संयोग से, ओप्पो ने मार्च में भारतीय टीम के प्रायोजन अधिकारों के लिए वीवो को पीछे छोड़ दिया था, उस समय भी दो ही कंपनियां एकमात्र बोलीदाता थीं।

आईपीएल के अध्यक्ष राजीव शुक्ला और बीसीसीआई के कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी के साथ दोनों पार्टियों की मौजूदगी में मुंबई में बोली लगाई गई थी। “जब कोई मौजूदा प्रायोजक [अनुबंध] को नवीनीकृत करता है और इस तरह की बोली लगाता है, तो यह इस संपत्ति [आईपीएल] के मूल्य की एक वास्तविक गवाही है,” जोहरी ने ईएसपीएनक्रिकइन्फो को बताया। “दो चीजें हैं: सबसे पहले, आईपीएल के रूप में बेहतरीन विश्व स्तरीय संपत्तियों में से एक की स्थापना [स्थापित की गई है]। यह अद्वितीय है। अगर आप इस साल के आईपीएल के आंकड़े देख रहे हैं, तो वे सबसे ज्यादा थे। यह एक संपत्ति है, जिसमे साल दर साल बढ़ोत्तरी जारी है, और यही हम देख रहे हैं।

“दूसरे, वीवो, जो पिछले दो सालों से पहले ही एक प्रायोजक था, इतनी बड़ी बोली लगाते हैं, तो वाकई पता चलता है कि वे इस प्रतिबद्धता के मूल्य के बारे में पूरी तरह जानते हैं।”

दो अन्य कंपनियों – ज़ियोमी और इंटेक्स – ने निविदा दस्तावेज उठाया था लेकिन बोली नहीं लगाई थी। जब रुचि रखने वाली चार में से तीन पार्टियों के चीनी ब्रांड हैंडसेट निर्माता होने की प्रवृत्ति के बारे में पूछा गया, तो जोहरी ने कहा कि ओप्पो और वीवो की क्रिकेट प्रायोजन में पर्याप्त पहुँच थी।

उन्होंने कहा, “आपको यह समझना होगा कि ये दोनों कंपनियाँ क्रिकेट प्रायोजन में पहले से शामिल हैं।” “ओप्पो आईसीसी के प्रायोजकों में से एक है, इसलिए उनके पास क्रिकेट की पहुँच है और, वीवो एक मौजूदा आईपीएल प्रायोजक है, इसलिए वे क्रिकेट में अपने निवेश को जारी रख रहे हैं, जिससे कि क्रिकेट, विशेषकर भारतीय क्रिकेट के महत्व को दर्शाया जा सके। ऐसा नहीं है कि वे पहली बार ऐसा कर रहे हैं, वे इसके मूल्य को समझते हैं।”
मौजूदा प्रायोजकों के साथ कार्य करना जिनके पास क्रिकेट की पहुँच है, जोहारी महसूस करते हैं, भारतीय बोर्ड के लिए एक सकारात्मक पहलू है। उन्होंने कहा, “बीसीसीआई एक क्रिकेट प्रतिष्ठान है और ऐसे लोग वहाँ हैं, जिनके पास क्रिकेट की पहुँच है।” “और, आप देखते हैं, इन प्रायोजनों की टिकट कीमत इतनी ऊंची है कि आपके पास हमेशा मुट्ठी भर लोग होंगे। 100 लोग इस तरह के काम में शामिल नहीं होंगे, इसलिए वास्तव में गंभीर लोग [आगे आए हैं]।”

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