क्या आईपीएल 2018 टीमों के राजस्व में बढ़ोतरी को सुनिश्चित करेगा?

Will IPL 2018 Ensure Steep Hike In Team Revenues

दस सीजन पूरे करने के बाद इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) ने खुद को दुनिया भर में सबसे रोमांचक और लोकप्रिय स्पोर्ट्स लीग के रूप में स्थापित किया है। आईपीएल विभिन्न ब्रांड्स को आक्रामक रूप से उनके उत्पादों का विज्ञापन करने का अवसर भी प्रदान करता है। यह देश में नए उत्पादों को लॉन्च करने के लिए सबसे पसंदीदा साधनों में से एक है और मौजूदा उद्योगों के ब्रांड रिकॉर्ड को भी मजबूत करता है। आईपीएल की यह उत्साहजनक सफलता टीम के मालिकों के लिए अच्छी खबर है जो लीग के समग्र मूल्य से लाभ उठा सकते हैं।

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अगर हम गौर से देखें, तो आईपीएल के पास एक मजबूत राजस्व वितरण मॉडल है जहां बीसीसीआई वितरकों से राजस्व एकत्रित करता है और इसे टीमों के साथ साझा करता है। इस साल प्रसारण राजस्व में आई ऊँची छलांग के बाद आईपीएल टीमें इस वृद्धि के लाभ को अच्छे से उठाने की कोशिश करेंगी। इस साल आईपीएल के प्रायोजक वीवो ने पांच साल के सौदे के लिए 2,200 करोड़ रुपये का भुगतान किया, जबकि स्टार इंडिया ने खेल के मीडिया अधिकारों के लिए 16,347.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इस तरह अब आईपीएल दुनिया की सबसे अमीर स्पोर्ट्स लीग में से एक बन गयी है।

आईपीएल टीमों के राजस्व पर प्रभाव

आईपीएल के कुल राजस्व वृद्धि के प्रभाव के बारे में यदि बात की जाए, तो यह तय है कि टीमों को बड़ा लाभ होगा। अपने दसवें वर्ष में आईपीएल 34,000 करोड़ रुपए मूल्य का हो चुका है। पिछले साल से अब तक इसके कुल कारोबार में 26% की बढ़ोतरी हुई है और लीग का मूल्य 27,000 करोड़ से बढ़कर 34,000 करोड़ रुपए हो गया है।

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यह अच्छी तरह से ज्ञात है कि सभी आईपीएल टीमों के लिए विभिन्न प्रायोजक ही आय का वास्तविक स्रोत हैं। टीमों के हर पहलू के लिए प्रायोजक हैं, जैसे मुख्य प्रायोजक, जर्सी प्रायोजक और यहां तक ​​जर्सी की आस्तीन के लिए भी एक प्रायोजक है। 2018-2022 तक आईपीएल का कुल विज्ञापन राजस्व 10,000 करोड़ रुपये का है, जो 2017 में आईपीएल के राजस्व से काफी अधिक है, जो कि 1,300 करोड़ रुपये था। विज्ञापन राजस्व में यह वृद्धि मुख्य रूप से नए विज्ञापन दरों की वजह से देखने को मिली है, जिसके आगे और बढ़ने के आसार हैं। मीडिया एजेंसी प्रमुखों के अनुसार 2017 में 10 सेकेंड के एक विज्ञापन का दर 6-7 लाख रुपये था और अब इसके 15-17 लाख रुपये हो जाने के आसार हैं।

अगर हम टीमों के राजस्व पर गौर करें, तो किंग्स इलेवन पंजाब ने 2016 में स्पॉन्सरशिप राजस्व से 26.5 करोड़ रुपये कमाए। यह राशि 2017 में बढ़कर 30 करोड़ रुपये हो गयी और रिपोर्टों के मुताबिक अगले सीज़न में इस राशि के और अधिक होने की उम्मीद है। पिछले साल प्रायोजकों से मुंबई इंडियंस ने 70 करोड़ रुपये कमाए थे। 2017 में स्पॉन्सरशिप राजस्व में उन्होंने 10-12% की बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा था और चूँकि आईपीएल अब पहले से कहीं ज्यादा नकद समृद्ध हो गया है, तो अब यह उम्मीद है कि अगले साल यह वृद्धि 30% के आस पास की हो सकती है।

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यह जानना महत्वपूर्ण है कि 2014-15 में केकेआर ने राजस्व में 30% की वृद्धि और 54%की समग्र वृद्धि दर्ज की थी। उस वक़्त लीग की कीमत आज के मुकाबले काफी कम थी।

25-30% की राजस्व वृद्धि

जीएमआर की स्वामित्व वाली दिल्ली डेयरडेविल्स पहले से ही स्पॉन्सरशिप राजस्व में 20% की बढ़ोतरी का अनुमान लगा रही है। उद्योग के अनुमान के मुताबिक दिल्ली डेयरडेविल्स और किंग्स इलेवन पंजाब जैसी टीमों के मामले में जर्सी के अगले भाग के प्रायोजन के लिए 10 करोड़ रुपये से 12 करोड़ रुपये तक की सीमा होती है, जब कि पीठ पर विज्ञापन की कीमत 5-6 करोड़ रुपये है। केकेआर और मुंबई इंडियंस जैसी टीमों के लिए जर्सी को प्रायोजित करने की लागत 8 करोड़ से 22 करोड़ के बीच होती है और जर्सी के पीठ के प्रायोजन की कीमत करीब 10-12 करोड़ रुपये तक होती है। इसमें कम से कम 20-25% तक की वृद्धि की उम्मीद है क्योंकि आईपीएल विकास के नए चरण में प्रवेश कर रही है और स्टार इंडिया ने बड़ी कीमत चुका कर वितरण अधिकारों को हासिल किया है।

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आईपीएल के राजस्व में बढ़ोतरी से आईपीएल टीमों को क्या लाभ होगा, इस बारे में बोलते हुए ब्रैंड्स ऑफ डिजायर के सीईओ और चीफ ब्रैंड स्ट्रैटेजिस्ट सौरभ उबोघेजा कहते हैं, “आईपीएल टीमों की आय के प्रमुख स्रोतों में मीडिया अधिकार और प्रायोजन अधिकार शामिल हैं। बीसीसीआई के लिए संयुक्त रूप से इन दोनों अधिकारों की हाल ही में बिक्री का अर्थ है कि इस साल काम से कम 3,600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय तो होगी ही। आईपीएल टीमों के साथ बीसीसीआई हर साल कम से कम इस राशि का 30% हिस्सा तो जरूर बांटेगी। आईपीएल टीमें आने वाले सीज़न में कम से कम अपनी आय के दोगुना हो जाने की उम्मीद कर सकती हैं। इसका मतलब यह है कि सभी टीमों के लिए आने वाला सीजन लाभदायक होने जा रहा है।”

औसतन टीमों की प्रायोजन से आमदनी 30-40 करोड़ रुपये के बीच होती है और टिकट बिक्री से आय लगभग 25-35 करोड़ रुपये के बीच होती है। फ्रैंचाइजी के लिए सेंट्रल पूल राजस्व 75-90 करोड़ रुपये के बीच है। कुछ अनुमानों के मुताबिक 2018 से पूरे राजस्व में फ्रैंचाइजी सदस्य 20-25% की वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, ये सभी भविष्यवाणियां बीसीसीआई-आईपीएल की आगामी बैठक पर भी निर्भर करती हैं, जो एक सप्ताह के समय में हो रही है। अगर नई शर्तों की घोषणा नहीं की जाती है, तो टीमों को निश्चित रूप से आईपीएल 2018 से अपेक्षाकृत और अधिक उम्मीद करनी चाहिए।

Source: Will IPL 2018 Ensure Steep Hike In Team Revenues?

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