क्यूँ छोड़ी धोनी ने कप्तानी?

Why did Dhoni give up captaincy

महेंद्र सिंह धोनी ने खुलासा किया है की कप्तानी में विभाजन होना एक प्रमुख कारण था जिसके तहत उन्होंने सीमित ओवेरो में भारत की कप्तानी छोड़ने का फ़ैसला लिया. भारत की एकदिवसीय और टी२० कप्तानी छोड़ने के बाद अपनी पहली प्रेस कान्फरेन्स करते हुए धोनी ने कहा की उन्होने विराट कोहली के परिपक्व होने का इंतज़ार किया और टेस्ट क्रिकेट में उनके स्थिर होने तक के लिए धोनी ने सीमित ओवेरो की कप्तानी अपने पास रखी.

“जब मैने टेस्ट कप्तानी छोड़ी थी तब से ही मुझे पता था की हमारे यहाँ क्रिकेट के विभिन्न प्रारूपों के लिए अलग अलग कप्तान नहीं रखे जाते. मैं केवल सही समय का इंतज़ार कर रहा था. मैं चाहता था की विराट पहले टेस्ट क्रिकेट में खुद को आश्वस्त और नियंत्रण में महसूस करें. मेरे कप्तानी छोड़ने के फ़ैसले में कुछ भी सही या ग़लत नहीं है, केवल सही समय पर यह करना था. मुझे विश्वास है की जिस तरह विराट ने टेस्ट टीम की कप्तानी शानदार तरीके से करी है, वैसे ही सीमित ओवेरो में टीम को संभालने में उन्हे कोई दिक्कत नही होगी.” – धोनी ने पुणे में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, जहाँ इंग्लैंड के खिलाफ पहला मॅच रविवार को खेला जाना है.

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“और ख़ास तौर पर विराट, जो चॅंपियन्स ट्रोफी में इंग्लैंड में कप्तानी करेंगे, और चॅंपियन्स ट्रोफी जीतने की कोशिश करेंगे. मुझे लगा यह बिल्कुल सही समय है आगे बढ़ने का. अगर मैं चॅंपियन्स ट्रोफी तक कप्तानी के लिए रुक भी जाता तो ज़्यादा कुछ नहीं बदलता.” – धोनी

Dhoni to play a virtual vice captain to Virat as wicket keeper
Dhoni to play a virtual vice captain to Virat as wicket keeper

2014 के दिसंबर में कोहली ने भारत की टेस्ट कप्तानी संभाली थी, जब धोनी ने ऑस्ट्रेलिया के दौरे के बीच में ही टेस्ट क्रिकेट से सन्यास ले लिया था.धोनी ने सफाई देते हुए कहा की टेस्ट से सन्यास सीरीज़ के बीच में लेने का कारण था वृद्धिमान सहा को एक बड़े स्तर पर मुश्किल परिस्थितियों में मौका देना, जो की काफ़ी समय से टीम के साथ तैयारी कर रहे थे.

“बहुत लोगों ने मुझसे सवाल किए थे की मैने सीरीज़ के बीच में ही सन्यास क्यूँ ले लिया, लेकिन आपको बड़ी पिक्चर को देखना पड़ता है, टीम के लिए क्या ज़्यादा बेहतर होता. अपने मैचों की संख्या में एक का और इज़ाफ़ा करने से मुझे कोई फ़र्क नही पड़ता. लेकिन सहा को एक बड़ा मैच में ऑस्ट्रेलिया में खिलाना और उसमे अगर वो अच्छा प्रदर्शन करें, तो उनके आत्मविश्वास में वृद्दी होगी, और आगे चल कर वे ही टीम के साथ विदेशी दौरो पे जाएँगे. और कुछ ऐसा ही अनुभव मैं विराट को भी करना चाहता था.” – धोनी ने कहा.

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धोनी ने कहा की विकट कीपर होने के नाते वो वैसे भी कोहली के लिए एक वास्तविक उपकप्तान की भूमिका अदा करते रहेंगे. स्टंप के पीछे खड़े होने से धोनी खेल के किसी भी पड़ाव में नये कप्तान कोहली को आसानी से सलाह दे सकेंगे.

“मुझे लगता है की विकट कीपर वैसे भी हमेशा ही एक उपकप्तान की भूमिका में होता है चाहे उसे वो उपाधि मिली हो या नही. फील्ड लगाने की ज़िम्मेदारी अक्सर उपकप्तान या विकट कीपर को वैसे भी दी ही जाती है. इस स्थिति में मुझे इस बात का ध्यान रखना होगा की कप्तान किस तरह की फील्ड चाहते हैं, और उसे आसानी से लगवाने में मेरा सहयोग होगा.” – धोनी

“मैने विराट से पहले भी यह चर्चा की हुई है की उन्हे कैसे अपने फ़ील्डर लगाने होते हैं. मुझे सतर्कता से देखना होगा की उन्हें थर्ड मैंन ज़्यादा सीधा या बाहर चाहिए क्यूंकी अलग अलग कप्तानों की अपनी अपनी पसंद होती है. अपनी कप्तानी में मैं थर्ड मैंन को तोड़ा करीब रखना पसंद करता था जिससे की बल्लेबाज़ों को फील्ड के दाहिने तरफ से शॉट मार के रन निकालने में मुश्किल हो. इन सब बातों के लिए मुझे ध्यान रखना पड़ेगा पर मुझे नही लगता की ये ज़्यादा बड़ा बदलाव होगा.”

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“समय समय पर विराट को जीतने भी सुझावों की ज़रूरत पड़ेगी उसके लिए मैं हमेशा वहाँ रहूँगा. क्षेत्ररक्षण पर मुझे पैनी नज़र रखनी पड़ेगी क्यूंकी अगर उन्होने किसी नीति के तहत कोई फील्ड सजाई है और मैं उसे छेड़ दूं तो समस्या हो जाएगी, लेकिन ये मेरे लिए ज़्यादा मुश्किल नही होगा. शुरू के कुछ मैचों में ज़्यादा ध्यान रखना पड़ेगा, जिससे की मैं उनकी सोच को समझ सकूँगा.” – धोनी ने कहा.

Dhoni groomed youngsters like Rohit Sharma, Ravindra Jadeja and Suresh Raina
Dhoni groomed youngsters like Rohit Sharma, Ravindra Jadeja and Suresh Raina

अपने कप्तानी के तरीकों में अंतर-दृष्टि प्रदान करते हुए धोनी ने बताया की उनका मुख्य कार्य सभी खिलाड़ियों से उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन करवाना होता था और इस बात के ध्यान रखना की किसी भी खिलाड़ी पर अनुचित दबाव ना डाला जाए. उन्होने विनम्रता और आक्रामक दोनो प्रकार का रुख़ अपनाया अलग अलग खिलाड़ियों से निपटने के लिए, मैच जीतने वाले खिलाड़ियों की पहचान की और सुनिश्चित किया की उन्हें एक निष्पक्ष और लंबा अवसर मिले खुद को साबित करके के लिए. धोनी ने किसी का नाम तो नही लिया, लेकिन शायद उनका इशारा रोहित शर्मा और रवीन्द्र जडेजा जैसे खिलाड़ियों की तरफ था जिन्होने अपने शुरुआती करियर में बहुत संघर्ष किया और धोनी के विश्वास के चलता आज भारतीय क्रिकेट में दो बड़े नाम बन गए हैं.

    विराट कोहली – भारत – रिकॉर्ड

“सबसे ज़रूरी है की जिस खिलाड़ी की जितनी भी प्रतिभा हो वो उसका 100% टीम के लिए दे. अगर आप 90 से 110% के बीच देते हैं, तो आपने अच्छा काम किया है. आप एक 80% वाले खिलाड़ी से 150% नहीं निकाल सकते. ऐसे में आपको अपनी अपेक्षाएँ उचित रखी पड़ती हैं. अलग अलग तरीके होते हैं विभिन्न प्रकार के खिलाड़ियों को समझने के लिए. कुछ को प्यार से, तो कुछ को दाँत कर समझाना पड़ता है, कुछ के लिए आँखों का इशारा ही काफ़ी हो जाता है. कई बार आपको खिलाड़ियों को झूठा विश्वास भी दिलाना पड़ता है क्यूंकी उन परिस्थितियों में वो आवश्यक होता है.आपको चालाकी से ये भाँपना होता है की किस परिस्थिति मैं क्या करना ज़रूरी है.” – धोनी.

“अगर आपको अपनी टीम की क्षमता का सही अनुमान है तो आप टीम को उनकी पूरी क्षमता खेल में प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित आसानी से कर सकते हैं. आपको कभी कभी मुश्किलें आ सकती है, जैसे आप के 2-3 प्रमुख बल्लेबाज़ एक साथ खराब प्रदर्शन के दौर में हों तो प्रगती में रुकावट आ सकती है. लेकिन अक्सर आपको बड़ी तस्वीर देखनी पड़ती है की अगर आईसीसी का कोई टूर्नामेंट है जिसमे हर मैच नॉकाउट है तो कौन से वो खिलाड़ी हैं जो अपने दिन पर अकेले अपने दम पर मैच जीता सकते हैं. लेकिन निष्पक्षता के साथ आप हर किसी को कुछ सीमित अवसर ही दे सकते हैं. शायद 3-4 मैच उन्हे दिए जाए अगर उन्होने पहले काफ़ी अच्छा प्रदर्शन किया है. कुल मिलाकर ऐसे मैं आप ज़्यादा कुछ नही कर सकते, लेकिंग वो विश्वास रखान पड़ता है.” – धोनी ने कहा.

    महेंद्र सिंह धोनी – भारत – रिकॉर्ड

धोनी ने आगे जोड़ते हुए कहा की उन्हे अपने कार्यकाल या जीवन से कोई शिकायत नही है – “जो आपको मार नही सकता वो आपको और मज़बूत बना देता है” – और कहा की ऐसे कई अच्छे और बुरे मौके हैं जिन्हे याद कर उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. उपलब्धियों की सूची में एक वो दौर है जब भारतीय क्रिकेट के दिग्गज अनिल कुंबले, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, वी वी एस लक्ष्मण और वीरेंद्र सहवाग ने सन्यास लिया और टीम में नए खिलाड़ियों को उनका विशाल स्थान भरना था.

“जब मैने क्रिकेट खेलना शुरू किया था तब टीम में बहुत से सीनियर खिलाड़ी थे और जैसे जैसे हम आगे बढ़े वो समय भी आया जब उनको टीम से जाना था और हमें यह निश्चित करना था की संक्रमण आसान और सफल हो. इसकी केवल एक अच्छी बात यह है की जिन युवा खिलाड़ियों ने उस समय टीम में आगमन किया था, वो ही अब अच्छा प्रदर्शन करते आ रहें हैं.” – धोनी

“हमने उनमे निवेश किया और सही समय आने पर उन्होने अपने प्रदर्शन से आश्वस्त किया की यही वो खिलाड़ी हैं जो भारतीय क्रिकेट की गरिमा को आगे ले जाएँगे, ये वक्तिगत तौर पर मेरे लिए बहुत संतोष की बात है. कुल मिलाकर मुझे इस यात्रा में बहुत मज़ा आया और ऐसे बहुत से जीत के और संकट के पल हैं जिनसे मेरे चहरे पर मुस्कान आती है. मंज़िल से ज़्यादा सफ़र अहमियत रखता है.” – महेंद्र सिंह धोनी.

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