चयनकर्ताओं ने दिया अनुभव को तवज्जो

Selectors pick experience for Champions Trophy

तीनों मुद्दों पर भारत को चर्चा करना था – पहला उद्घाटन स्लॉट, दूसरा मध्य क्रम में ताकत और तीसरा स्पिनर और तीनों के लिए, चयनकर्ताओं ने अभी तक तर्कसंगत फैसले किए हैं ।

मनप्रीत गोनी, कर्न शर्मा, जसप्रित बूमरा, हार्दिक पंड्या, अक्सर पटेल, संजू सैमसन, कुछ सफलता की कहानियां, कुछ नहीं । इन सब ने अपने आईपीएल प्रदर्शन के अधार पर भारत के लिए खेला है। कईयों ने आईपीएल प्रदर्शन के आधार पर वापसी की है । कुछ विकसित हुए, कुछ नहीं । हालांकि, चैंपियंस ट्रॉफी के लिए यह चयन, 2013 के बाद पहली बार है कि आईपीएल के तुरंत बाद एक बड़े एकदिवसीय टूर्नामेंट का आयोजन किया जा रहा है, स्पष्ट संकेत है कि ट्वेंटी 20 प्रदर्शन चयनकर्ताओं को प्रभावित नहीं कर रहा है। एमएसके प्रसाद ने चयनकर्ताओं की ओर से स्पष्ट संदेश दिया कि आईपीएल की तुलना में घरेलू क्रिकेट का अधिक महत्व है, खासकर उन प्रारूपों के लिए जिनमें 20 ओवर से ज्यादा समय लगता है।

हरभजन सिंह, गौतम गंभीर, ऋषभ पंत, कुलदीप यादव, रॉबिन उथप्पा, जयदेव उनाडकट, सुरेश रैना, यजवेंद्र चहल और दिनेश कार्तिक जैसे खिलाड़ियों में से कुछ खिलाड़ी खुद के लिए दबाव बना रहे थे, विशेष रूप से जब प्रत्येक दिन चयन में देरी हो रही थी । उनमें से कोई भी टीम में नहीं है , जबकि केदार जाधव और महेंद्र सिंह धोनी , जिन्होंने आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है, ने इंग्लैंड के खिलाफ भारत की आखिरी एकदिवसीय सीरीज़ में उनके प्रदर्शन के कारण एकदिवसीय में अपनी जगह बनाए रखी।

एक बड़े टूर्नामेंट के लिए, जिसको बनने में दो साल लगे, टीम आमतौर पर और बड़े पैमाने पर उम्मीद के मुताबिक लगती है। तीन मुद्दों पर भारत को जवाब देना था – उद्घाटन स्लॉट, मध्य क्रम में ताकत और स्पिनर। उद्घाटन स्लॉट रोहित शर्मा और शिखर धवन की जोड़ी को गया; अनुभवी विकेटकीपिंग को मध्य क्रम में महत्व दिया है और आर अश्विन को आईपीएल न खेलने के बावजूद एकदिवसीय टीम में शामिल किया ।

यह एक ऐसा दुर्लभ मामला था जहां भारत ने बैक-अप खिलाड़ियों को भी रखा । एक घायल खिलाड़ी के लिए एक प्रतिस्थापन की आवश्यकता होती है, और उन्होंने इनको तैयार रखा । इन पांच खिलाड़ियों में से चार – पंत, कुलदीप, शार्दुल ठाकुर और कार्तिक के पास क्रिकेट का एक ठोस सीजन है, और सिर्फ आईपीएल ही नहीं है । केवल रैना, जो लचीलेपन और अष्टपैलु क्षमताओं के वादे के साथ आते हैं, इस सूची में ऐसे हैं जिन्हें ज्यादातर आईपीएल से फायदा मिला है।

चयनकर्ता चेयरमैन एमएसके प्रसाद ने कहा, “यह [आईपीएल] एक बहुत आकर्षक प्रतियोगिता है,” यह पूछे जाने पर कि आईपीएल के प्रदर्शन को नजरअंदाज करना कितना मुश्किल था – ” इस बारे में कोई दो राय नहीं हैं कि वास्तव में आईपीएल आज की दुनिया में सबसे अच्छा टूर्नामेंट है। आईपीएल दुनिया में हमारा प्रमुख टूर्नामेंट और सर्वश्रेष्ठ टूर्नामेंट है। लेकिन जब हम 50 ओवर के टूर्नामेंट के लिए विचार करते हैं, तो हमें दूसरे पहलुओं पर ध्यान देना होता है। [राहुल] त्रिपाठी ,तुलसी थम्पी और संजू जो आकार ले रहें हैं उससे हम बहुत खुश हैं। यह एक शानदार मंच है, यहां से हम उन्हें अपने रडार के नीचे लाएंगे और उन्हें तैयार करेंगे।

“हम आईपीएल का सम्मान करते हैं, लेकिन जब लंबे प्रारूपों और परिस्थितियों की बात आती है , तो हम अंग्रेजी परिस्थितियों में खेल रहे हैं … हमने पिछले साल के प्रदर्शन को भी देखा है। चैंपियंस ट्रॉफी एक बड़ा टूर्नामेंट है और यहां अनुभव का महत्व है । ”

एकदिवसीय मैचों से ट्वेंटी -20 बहुत अलग है,परिणामस्वरूप, भारत ने काफी हद तक अनुमान लगाया है – असंभव और सुरक्षित, टीम बनाई । जो चार साल पहले की तरह नई है और चैंपियंस ट्रॉफी जीत दिला सकेगी जिससे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के पैर जम जाएंगे ।

दो पहलू, जिसके कारण भारत दुनिया के पीछे है वो मध्यम क्रम की कमजोरी और रिस्ट स्पिनर की कमी है। ऐसे समय में जहां फिंगर स्पिनर सीमित-ओवरों के क्रिकेट में संघर्ष कर रहे हैं भारत, बांग्लादेश और न्यूजीलैंड केवल ऐसी टीम हैं जिनके पास रिस्ट स्पिनर नहीं हैं । तीनों में,बांग्लादेश के पास फिर भी सब्बीर रहमान हैं।

भारत ने अश्विन को चुना है, जिन्होंने 2016 के शुरू होने के बाद से केवल पांच एकदिवसीय मैच खेले है और तीन में गेंदबाजी नहीं की है । अश्विन अनुभव लाए हैं, और प्रसाद के मुताबिक उन्हें हमेशा चुना जाना था। कुलदीप को स्पिनर के लिए नहीं अतिरिक्त बल्लेबाज के लिए खोना पड़ा।

प्रसाद ने धोनी को दुनिया का सबसे अच्छा विकेटकीपर को बोलकर सारे संदेह को मार डाला। उन्हें एक बल्लेबाज़ मान लेना कठोर है। स्टंप के पीछे उन्होंने बहुत कम खराब दिन देखे हैं, और कप्तान के रूप में उनकी निविष्टियाँ बहुत ही अमूल्य है, और राइजिंग पुणे सुपरजायंट के स्टीवन स्मिथ ने भी यह स्वीकार किया है । लेकिन मध्य क्रम में ताकत महत्वपूर्ण होगी क्योंकि इंग्लैंड की पिच पिछले कुछ वर्षों जैसी अभी भी सीधी है।

अपनी आखिरी वनडे सीरीज़ में, युवराज सिंह और धोनी ने भारत को संकट से बचाने के लिए एक बेहतरीन काम किया था, लेकिन वहां वे जल्दी बल्लेबाजी करने आए और अपनासमय लेकर पारी को आगे बढाने में सक्षम हो गए। यह हो सकता है कि उन्हें 30 वें ओवर के बाद बल्लेबाजी करने का मौका मिले और उन्हें हर गेंद पर मारना पड़े।

भारत डेशर और रिस्ट स्पिनर का चयन करने में बोल्ड हो सकता था – ज़रूरी नहीं है की आईपीएल से ही किसी को चुना जाता – लेकिन एक बड़े टूर्नामेंट में अनुभव के साथ जाना एक आउट-एंड-आउट गलती नहीं है।

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