2019 विश्व कप के मद्देनज़र श्रीलंका एकदिवसीय श्रृंखला से मिले सबक

Lessons from SL series before World Cup 2019

टेस्ट श्रृंखला में 3-0 से जीत के बाद कोलंबो में श्रीलंका पर 6 विकेट की जीत से भारत ने श्रीलंका का 5-0 से सूपड़ा साफ कर दिया। टेस्ट श्रृंखला के समान इस श्रृंखला में भी भारतीय टीम का जलवा रहा। श्रीलंका भारतीय टीम को टक्कर देने में नाकाम रही।

भारतीय कप्तान विराट कोहली ने इस श्रृंखला को उत्तम श्रृंखला का नाम दिया और उनका कहना सही भी है। श्रृंखला का परिणाम शानदार रहा किन्तु उससे भी शानदार रहा भारत के श्रंखला जीतने का तरीका। प्रतियोगिता के स्तर से इतर टीम अपना सर्वश्रेष्ठ देने को प्रतिबद्ध थी। भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन ने श्रीलंका को जीत का मौका तक नहीं दिया।

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श्रृंखला को 2019 विश्व कप की तैयारी के पहले कदम के रूप में भी देखा जा रहा था। वरिष्ठ खिलाड़ियों उमेश यादव, रविचंद्रन अश्विन, रवींद्र जडेजा और मोहम्मद शमी को आराम दिया गया वहीं सुरेश रैना और युवराज सिंह जगह बनाने में असफल रहे। दूसरी तरफ के एल राहुल, मनीष पाण्डेय, अक्षर पटेल, युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव और शर्दुल ठाकुर को मौका दिया गया।

टीम प्रबंधन की निगाहें आई सी सी की आगामी प्रतियोगिता पर टिकी हैं और इस विश्वव्यापी प्रतियोगिता के लिये मुख्य टीम तैयार की जा रही है। भारत की इस प्रभावी जीत से कुछ सबक सीखने को मिले हैं-

श्रृंखला जीत में बेंच के खिलाड़ियों का योगदान

वेस्ट इंडीज दौरे पर युवाओं को मौका न देने के कारण टीम प्रबंधन की आलोचना हुई थी किन्तु श्रीलंका में ऐसा नहीं हुआ। राहुल, पाण्डेय, अक्षर, चहल, कुलदीप और ठाकुर सभी के प्रदर्शन की परीक्षा ली गयी।

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वरिष्ठ खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में युवाओं ने ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई। भारत के शीर्ष स्पिनर रवींद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन अपने टेस्ट प्रदर्शन को एकदिवसीय मुकाबलों में नहीं दर्शा सके हैं जिसका खामियाज़ा भारत को चैंपियंस ट्रॉफी में भुगतना पड़ा।

इस दौरे पर अक्षर, चहल और कुलदीप ने अपने नियंत्रण और विकेट लेने की क्षमता से प्रभावित किया। सपाट पिचों पर जहाँ उंगली से गेंद घुमाने वाले स्पिनर जैसे अश्विन और जडेजा सफल नहीं होते, वहाँ कलाई से गेंद घुमाने वाले स्पिनर जैसे चहल और कुलदीप उपयोगी साबित होंगे।

चोट के चलते चैंपियंस ट्रॉफी में भाग न ले सके मनीष पाण्डेय टीम में लौटे और अपनी दो पारियों से प्रभावित किया। राहुल एकदिवसीय मुकाबलों में अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सके किन्तु कप्तान उन पर काफ़ी भरोसा जताते हैं। टीम प्रबंधन भारत का मध्य क्रम तय करने की प्रक्रिया में है और युवराज तथा रैना की गैरमौजूदगी में पांडेय और राहुल, केदार जाधव के साथ मिल कर इस कमी को पूरा कर सकते हैं।

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जसप्रीत बुमराह निःसंदेह तेज़ गेंदबाज़ी क्रम के अगुवा हैं

उपमहाद्वीपीय पिचों पर अक्सर तेज़ गेंदबाज़ सुर्खियां नहीं बटोर पाते किन्तु श्रीलंकाई बल्लेबाज़ों के लिये जसप्रीत बुमराह का सामना करना मुश्किल साबित हुआ। 23 वर्षीय इस खिलाड़ी को श्रृंखला में 15 विकेट लेने के लिये मैन ऑफ द सीरीज चुना गया। यह किसी भी द्विपक्षीय एकदिवसीय श्रृंखला में तेज़ गेंदबाज़ के द्वारा सबसे बेहतर प्रदर्शनों में से एक है।

गुजरात के इस क्रिकेटर ने 11.26 की औसत तथा 3.90 की किफायती इकोनॉमी के साथ गेंदबाज़ी की तथा प्रत्येक 17 गेंदों में 1 विकेट लिया। तीसरे एकदिवसीय मुकाबले में उन्होंने पहली बार पारी में 5 विकेट चटकाए। बुमराह जो कि अपनी धीमी गेंद और खतरनाक यॉर्कर के लिये जाने जाते हैं, अब अपनी गेंदबाज़ी में और भी विविधता ले आये हैं। उनकी गति और तेज़ हुई है तथा गेंद को सही जगह डाल रहे हैं।।

श्रृंखला जीत के बाद कोहली ने बुमराह की तारीफ की और पिछले 18 महीनों में खेल के छोटे प्रारूप में उनके प्रदर्शन की सराहना की। श्रृंखला में इस प्रभावी प्रदर्शन की बदौलत आई सी सी रैंकिंग में बुमराह ने 27 अंकों की छलांग मारी और चौथे स्थान पर पहुँच गए। अपने कैरियर में पहली बार वह टॉप 5 रैंकिंग में पहुँचने में सफल रहे।

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एम एस धोनी का कोई विकल्प नहीं

ऐसे समय में जब कि एम एस धोनी की टीम में जगह को लेकर सवाल उठाये जा रहे थे, उन्होंने अपने हरफनमौला खेल से खुद की उपयोगिता सिद्ध की। श्रृंखला में दो बार उन्होंने टीम को संकट से निकाला। चारों बार बल्लेबाज़ी करने के दौरान वह नाबाद रहे और एकदिवसीय मैचों में 100 स्टम्पिंग करने वाले पहले विकेट कीपर बने।

भले ही धोनी की फिनिशिंग क्षमता पहले जैसीे नहीं रही लेकिन दूसरे और तीसरे एकदिवसीय मैच में अपनी पारी से उन्होंने सिध्द कर दिया कि उनका अनुभव टीम के लिये कितना महत्वपूर्ण है। पालकेले एकदिवसीय मुकाबले में धोनी ने आठवें विकेट के लिये भुवनेश्वर कुमार के साथ 100 रनों की साझेदारी कर श्रीलंका को जीत से वंचित कर दिया। इसके अगले मैच में उन्होंने रोहित शर्मा के साथ पांचवे विकेट के लिये 157 रनों की साझेदारी कर लक्ष्य हासिल किया।

तनाव की स्थिति में कोहली धोनी पर ही भरोसा जताते हैं। उनके अनुभव और जानकारी ने उन्हें डी आर एस(डिसीज़न रिव्यु सिस्टम) का विशेषज्ञ बना दिया है। मैदान के अलावा ड्रेसिंग रूम में भी धोनी टीम पर गहरा प्रभाव डालते हैं और कई युवा खिलाड़ियों के लिये प्रेरणास्रोत हैं।

भारतीय टीम को अभी तक धोनी का विकल्प नहीं मिल सका है और इस कारण 36 वर्षीय इस खिलाड़ी को ऐसे समय में नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता।

Source: With An Eye On 2019 World Cup, Here Are The Lessons We Learnt From The Sri Lanka ODI Series

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