इंडियन प्रीमियर लीग से संबंधित विवाद

इंडियन प्रीमियर लीग से संबंधित विवाद

आई पी एल के कारण बी सी सी आई की विभिन्न देशों के क्रिकेट बोर्डों से अनबन हो चुकी है। इसकी मुख्य वजह है कि संबंधित देश के खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों के लिए वापस अपनी राष्ट्रीय टीम में लौटना होता है भले ही उस समय आई पी एल चल रहा हो।

इंग्लैंड एन्ड वेल्स क्रिकेट बोर्ड के साथ विवाद

आई पी एल का पहला संस्करण काउंटी चैंपियनशिप से और इंग्लैंड के न्यूज़ीलैंड दौरे से टकराया। ई सी बी और काउंटी क्रिकेट क्लब ने खिलाड़ियों को लेकर बी सी सी आई को चेताया। ई सी बी ने साफ कहा कि वह आई पी एल में अपने खिलाड़ियों को खेलने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं देगा जो कि आई पी एल में खेलने के लिए ज़रूरी प्रक्रिया थी।

इसके परिणामस्वरूप ई सी बी ने आई पी एल की तरह अपनी टी 20 लीग शुरू करने का निर्णय लिया जिसका नाम टी 20 इंग्लिश प्रीमियर लीग रखा। इस टूर्नामेंट में कुल 21 टीमों को 7-7 टीमों के 3 समूहों में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया।

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मीडिया विवाद

आई पी एल के आरंभ में समिति ने इसे उत्तरी अमेरिका की लीगों की तरह प्रसारित करने का निर्देश दिया। इसके अंतर्गत समिति ने निर्देश दिया कि आई पी एल मैचों की तस्वीरों को cricket.com(लाइव करेंट मीडिया के स्वामित्व वाली वेबसाइट) से खरीदे बिना कोई भी प्रदर्शित नहीं कर सकता और न ही मैदान से मैच का सीधा प्रसारण दिखा सकता है। इसके अलावा मीडिया एजेंसियों को मैच के दौरान ली गई सभी तस्वीरों को आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करना था। इसको लेकर विश्व भर की प्रिंट मीडिया ने विरोध किया और आई पी एल का बहिष्कार करने की बात कही।

क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया के साथ विवाद

आई पी एल के नियम के अनुसार पिछले संस्करण की विजेता टीम फाइनल मैच की जगह निर्धारित करती है। पूर्व विजेता डेक्कन चार्जर्स ने ब्रबॉर्न स्टेडियम मुम्बई को चुना लेकिन पवेलियन के उपयोग के नियम को देखते हुए वहां कोई आई पी एल मैच आयोजित नहीं हो सकता था। मैच के दिनों में पवेलियन पर क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया के सदस्यों का एकाधिकार था जब कि आई पी एल समिति को पवेलियन का अधिकार अपने प्रायोजकों को देना था। इसके लिए समिति ने सदस्यों को स्टेडियम में मुफ्त सीटें दीं लेकिन क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया ने यह प्रस्ताव अस्वीकार करते हुए कहा कि सदस्यों को पवेलियन से बाहर नहीं किया जा सकता।

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ललित मोदी का निलंबन

25 अप्रैल 2010 को बी सी सी आई ने आई पी एल चेयरमैन ललित मोदी को स्वयं को लाभ पहुँचाने के लिए अवैध तरीकों के प्रयोग के आरोप में निलंबित कर दिया। बी सी सी आई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला और बोर्ड सचिव एन श्रीनिवासन ने इस निलंबन का नोटिस जारी किया।

बड़ोदा क्रिकेट एसोसिएशन के प्रमुख चिरायु अमीन को बी सी सी आई ने आई पी एल का अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया। बी सी सी आई के अनुसार आई पी एल और बी सी सी आई कार्यालय से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब थे।

ल्यूक पोमर्सबैच पर छेड़खानी का आरोप

2012 संस्करण के मध्य में अमेरिकी मॉडल जोहल हमीद ने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाड़ी ल्यूक पोमर्सबैच पर छेड़खानी का आरोप लगाया। हालांकि काफी विवाद के बाद उन्होंने यह आरोप वापस ले लिया।

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2012 स्पॉट फिक्सिंग

14 मई 2012 को न्यूज़ चैनल इंडिया टी वी ने स्टिंग ऑपरेशन के ज़रिए 5 खिलाड़ियों पर स्पॉट फिक्सिंग का आरोप लगाया। आई पी एल अध्यक्ष राजीव शुक्ला ने इन 5 अनकैप्ड खिलाड़ियों को तत्काल निलंबित किया। ये 5 खिलाड़ी टी पी सुधींद्र(डेक्कन चार्जर्स), मोहनीश मिश्रा(पुणे वारियर्स), अमित यादव, शलभ श्रीवास्तव(किंग्स इलेवन पंजाब) और अभिनव बाली थे।

स्टिंग ऑपरेशन में पुणे वारियर्स के मोहनीश मिश्रा ने कहा कि फ्रेंचाइजी उन्हें भुगतान के रूप में काला धन देती है।

2013 स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी-

16 मई 2013 को दिल्ली पुलिस ने 3 खिलाड़ियों को स्पॉट फिक्सिंग मामले में गिरफ्तार किया। ये 3 खिलाड़ी श्रीसंथ, अंकित चवन और अजीत चंदीला थे। बी सी सी आई ने तीनों खिलाड़ियों को कार्यवाही पूरी होने तक निलंबित कर दिया।

24 मई 2013 को मुम्बई क्राइम ब्रांच ने चेन्नई सुपरकिंग्स के आला अधिकारी और बी सी सी आई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन को अवैध सट्टेबाजी के आरोप में गिरफ्तार किया।

पुणे वारियर्स का निष्कासन-

21 मई 2013 को आई पी एल फ्रेंचाइजी पुणे वारियर्स इंडिया ने आई पी एल से अपने निष्कासन की घोषणा की। 2013 में पुणे वारियर्स फ्रेंचाइजी शुल्क देने में असमर्थ रही। स्पॉट फिक्सिंग मामले से जूझ रही इस फ्रेंचाइजी के स्वामित्व वाली कंपनी सहारा ग्रुप की बैंक गारंटी ज़ब्त होने के बाद पुणे वारियर्स इंडिया ने लीग से हटने का फैसला लिया।

Source: Controversies involving the Indian Premier League

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IPL Controversies in Hindi | CricketinHindi.com
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