ऐसे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर जिन पर लगा थ्रोइंग का आरोप

List of International bowlers charged for throwing

क्रिकेट में गेंदबाज़ी के कुछ अनुशासित नियम हैं। यह नियम कोहनी से बांह के झुकाव पर आधारित है और अधिक झुकाव की स्थिति में अंपायर इस पर टिप्पणी कर सकता है। आई सी सी ने झुकाव की सीमा 15 डिग्री निर्धारित की है।

यदि अंपायर किसी गेंदबाज़ को इस नियम के विरुद्ध गेंदबाज़ी करते हुए पाता है तो वह उस गेंद को नो बॉल करार देता है और यह प्रक्रिया थ्रोइंग कही जाती है। सामान्य शब्दों में यह गेंदबाज़ का संदिग्ध अथवा अवैध गेंदबाज़ी एक्शन कहा जाता है जिसे क्रिकेट की भाषा में उस खिलाड़ी को चकर कहा जाता है। अवैध गेंदबाज़ी एक्शन से फेंकी गई गेंद भी अवैध मानी जाती है।

पिछले कुछ वर्षों में टेस्ट मैच और एकदिवसीय मैच में कई खिलाड़ियों के ऊपर ऐसे आरोप लग चुके हैं जिसके कारण कई विवाद भी उठे और कुछ खिलाड़ियों का कैरियर भी समाप्त हो गया। खिलाड़ी को अपना गेंदबाज़ी एक्शन सुधारने का एक मौका दिया जाता है लेकिन यदि दोबारा उन्हें दोषी पाया गया तो उनका अंतर्राष्ट्रीय कैरियर समाप्त हो जाता है।

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स्पिनरों में खास तौर पर ऑफ स्पिनरों में थ्रोइंग कई बार देखी गई है। जब वे दूसरा फेंकते हैं तो गेंद फेंकते समय सामान्यतः कोहनी, कलाई के सामने आ जाती है।

मैच के दौरान आधिकारिक रूप से इन क्रिकेटरों पर लगा थ्रोइंग का आरोप

एरनी जोन्स(ऑस्ट्रेलिया)- मेलबॉर्न में 1898 में

सी बी फ्राई(इंग्लैंड)- 1898 में इन पर तीन बार आरोप लगा और 1900 में अंपायर जिम फिलिप्स ने इन्हें दोषी पाया।

अर्थर मोल्ड(इंग्लैंड)- 1900 में अंपायर जिम फिलिप्स ने इन्हें दोषी पाया और 1901 में दोबारा आरोप लगा।

मधुसूदन रेगे(भारत)- 1951 में महाराष्ट्र के लिए एम सी सी के खिलाफ खेलते हुए यह आरोपी पाए गए। थ्रोइंग के दोषी ठहराए गए यह पहले भारतीय खिलाड़ी थे।

कुआन मैककार्थी(दक्षिण अफ्रीका)- 1952 में

डग इंसोल(इंग्लैंड)- 1952 में

टोनी लॉक(इंग्लैंड)- 1952 में और 1953-54 में

कीथ स्लॉटर(ऑस्ट्रेलिया)- 1957-58 और 1964-65 में

हेरोल्ड रॉड्स(इंग्लैंड)- 1960 और 1965 में

जॉफरी ग्रिफिन(दक्षिण अफ्रीका)- 1958-59 और 1960 में

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बच व्हाइट(इंग्लैंड)- 1960 और 1965 में(हालाँकि दोबारा यह जोक बॉल थी)

रेग सिम्पसन(इंग्लैंड)- 1960 में

हसीब अहसान(पाकिस्तान)- बॉम्बे में 1960-61 में

चार्ली ग्रिफिथ(वेस्ट इंडीज)- 1961-62 और 1966 में

इयान मैकिफ़(ऑस्ट्रेलिया)- ब्रिस्बेन में अंपायर कॉलिन एगर ने 1963 में इन्हें दोषी पाया।

इयान रेडपाथ(ऑस्ट्रेलिया)- 1964 में

आबिद अली(भारत)- क्राइस्टचर्च में 1968 में

जिम हिग्स(ऑस्ट्रेलिया)- 1975 में

ब्रूस यार्डली(ऑस्ट्रेलिया)- 1977-78 में

सय्यद किरमानी(भारत)– ब्रिजटाउन में 1983 में

डेविड गोवेर(इंग्लैंड)– 1986 में

हेनरी ओलांगा(ज़िम्बाब्वे)- हरारे में 1995 में

ग्रांट फ्लावर(ज़िम्बाब्वे)– बुलावायो में 2000 में

मुथैया मुरलीधरन(श्रीलंका)– 1995 में मेलबॉर्न में अंपायर डरेल हेयर ने इन्हें दोषी पाया। ब्रिस्बेन में जनवरी 1996 में अंपायरों टोनी मैकक्विल्लन और रॉस एमर्सन ने इन्हें दोषी करार दिया। 1999 में एडिलेड में अंपायर रॉस एमर्सन ने इन्हें फिरसे दोषी पाया। उन्होंने अपनी गेंदबाज़ी एक्शन को सही साबित करने के लिए हाथ में प्लास्टर बांध कर बिना मोड़े सारी गेंदे सटीक फेंक कर दिखाईं।

क्रिकेटर जिन्हें मैच के दौरान दोषी नहीं पाया गया

कुछ खिलाड़ियो की गेंदबाज़ी एक्शन के खिलाफ आई सी सी को रिपोर्ट सौंपी गई लेकिन मैच के दौरान उन्हें कभी दोषी नहीं पाया गया। बिना किसी सुझाव के उन्हें क्रिकेट खेलने की अनुमति दे दी गई। ये क्रिकेटर हैं-

कुमार धर्मसेना(श्रीलंका)

मोहम्मद हफ़ीज़(पाकिस्तान)

जर्मेन लॉसन(वेस्ट इंडीज)

ब्रेट ली(ऑस्ट्रेलिया)

शोएब मलिक(पाकिस्तान)

हरभजन सिंह(भारत)

शमिंदा एरंगा(श्रीलंका)

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क्रिकेटर जिन्हें मैच के दौरान दोषी पाया गया और कार्यवाही भी की गई

इन क्रिकेटरों के खिलाफ आई सी सी को रिपोर्ट सौंपी गयी और उन पर कार्यवाही की गई-

शोएब अख्तर(पाकिस्तान)– दिसंबर 1999 में उन्हें दोषी पाया गया लेकिन तुरंत ही उन्हें क्लीन चिट भी मिल गई।

शब्बीर अहमद(पाकिस्तान)- दिसंबर 2005 में उन पर 12 माह का प्रतिबंध लगाया गया। इसके पहले 1999, 2004 में एक बार और 2005 में दो बार दोषी पाने के अलावा 12 माह के लिए प्रतिबंधित हुए।

जेम्स कर्टली(इंग्लैंड)- 2001 में अपने पदार्पण एकदिवसीय मैच में और 2005 में इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड द्वारा

जोहान बोथा(दक्षिण अफ्रीका)- फरवरी 2006 में आई सी सी ने गेंदबाज़ी एक्शन न सुधारने तक प्रतिबंध लगाया। नवम्बर 2006 में उन्हें क्लीन चिट मिली लेकिन अप्रैल 2009 में वह फिर संदेह के घेरे में आए और उनका दूसरा प्रतिबंधित कर दिया गया।

अब्दुर रज़्ज़ाक(बांग्लादेश)- दिसंबर 2008 में लेकिन मार्च 2009 में प्रतिबंध हटा लिया गया।

शेन शिलिंगफोर्ड(वेस्ट इंडीज)- नवम्बर 2010 में रिपोर्ट किया गया और दिसंबर 2010 में प्रतिबंधित। जून 2011 में प्रतिबंध हटाया गया। हालाँकि नवंबर 2013 में फिरसे रिपोर्ट किया गया और दिसंबर 2013 में पूर्णतः प्रतिबंधित हो गए।

मार्लन सैमुएल्स(वेस्ट इंडीज)– दिसंबर 2013 में प्रतिबंधित। आई सी सी उनकी तेज़ गेंदबाज़ी को ही वैध मानती है।

सचित्र सेनानायके(श्रीलंका)- जुलाई 2014 में प्रतिबंधित और दिसंबर 2014 में सुधार के बाद प्रतिबंध हटा दिया गया।

केन विलियमसन(न्यूज़ीलैण्ड)– जुलाई 2014 में प्रतिबंधित और दिसंबर 2014 में सुधार के बाद प्रतिबंध हटा दिया गया।

सईद अजमल(पाकिस्तान)– सितम्बर 2014 में प्रतिबंधित

प्रोस्पर उत्सेया(ज़िम्बाब्वे)– अक्टूबर 2014 में प्रतिबंधित

सोहाग गाज़ी(बांग्लादेश)- अक्टूबर 2014 में प्रतिबंधित

तस्कीन अहमद और अराफात सनी(बांग्लादेश)- मार्च 2016 में टी 20 विश्व कप के दौरान प्रतिबंधित

Source: List of international cricketers called for throwing

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